Missing Women in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में बढ़ते लापता महिलाओं के मामले, 7188 से ज्यादा गुमशुदगी, पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल

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Missing Women in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में महिलाओं और लड़कियों के लापता होने के मामलों ने गंभीर रूप ले लिया है। गृह विभाग के हालिया आंकड़ों ने प्रदेश में महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 से 31 जनवरी 2026 तक हजारों महिलाएं और लड़कियां लापता हुई हैं, जिनमें बड़ी संख्या का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

राजधानी रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक नजर आ रही है। कई मामलों में बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका सामने आती है, लेकिन शुरुआती स्तर पर अधिकतर मामलों में केवल गुमशुदगी दर्ज की जाती है। बाद में जांच के आधार पर ही अपहरण या अन्य धाराएं जोड़ी जाती हैं।

रायपुर में सबसे ज्यादा मामले, हर दिन एक लड़की लापता जैसी स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, रायपुर में 2023 से जनवरी 2026 तक 1243 लड़कियां और 5481 महिलाएं लापता हुई हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में महिलाओं की गुमशुदगी का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।

साल 2023 में 355 लड़कियां लापता हुईं, 2024 में यह संख्या 410 और 2025 में 478 तक पहुंच गई। 2026 में भी जनवरी तक 49 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से कुछ मामलों में पुलिस को सफलता भी मिली है, लेकिन कई मामलों में अब भी जांच जारी है।

महिलाओं के मामलों में भी स्थिति गंभीर है। 2023 में 1590, 2024 में 1726 और 2025 में 1982 महिलाओं के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। 2026 में जनवरी तक ही 183 महिलाएं गायब हो चुकी हैं।

बिलासपुर और दुर्ग में भी बढ़ती चिंता

बिलासपुर में भी गुमशुदगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। यहां कुल 4294 महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं, जिनमें से 3387 को पुलिस ने ढूंढ निकाला, लेकिन कई अब भी लापता हैं।

दुर्ग जिले में भी 2565 महिलाओं और 752 लड़कियों के गुमशुदा होने के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा बलौदाबाजार में भी बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़कियां गायब हुई हैं।

ये आंकड़े साफ बताते हैं कि यह समस्या केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में फैल चुकी है।

शुरुआती जांच प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल

इन मामलों के सामने आने के बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आमतौर पर पुलिस पहले गुमशुदगी का केस दर्ज करती है और बाद में जांच के दौरान अगर कोई आपराधिक पहलू सामने आता है, तभी धाराएं जोड़ी जाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के मामलों में शुरुआती जांच ज्यादा संवेदनशील और तेज होनी चाहिए, क्योंकि शुरुआती समय ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।

बढ़ते मामले बने बड़ी चेतावनी

छत्तीसगढ़ में बढ़ती गुमशुदगी की घटनाएं न सिर्फ पुलिस बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चेतावनी हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे बहला-फुसलाकर ले जाने वाले गिरोह, सामाजिक असुरक्षा, पारिवारिक तनाव या रोजगार से जुड़े मुद्दे।

ऐसे में जरूरत है कि पुलिस तंत्र को और मजबूत किया जाए, साथ ही जागरूकता बढ़ाई जाए और समुदाय स्तर पर सतर्कता बरती जाए। आने वाले समय में यह मुद्दा महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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