Vedanta Plant Blast Update: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण बॉयलर विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 25 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
NHRC ने मांगी 2 हफ्ते में रिपोर्ट
NHRC ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेजकर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा है कि अगर मीडिया रिपोर्ट्स सही हैं, तो यह मामला मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
कौन-कौन सी जानकारी मांगी गई?
आयोग ने राज्य सरकार से कई अहम बिंदुओं पर जवाब मांगा है, जिनमें शामिल हैं:
- मृतकों के परिजनों और घायलों को दिए गए मुआवजे की स्थिति
- घायलों के इलाज और स्वास्थ्य की वर्तमान स्थिति
- हादसे के कारणों की जांच की प्रगति
- दोषियों के खिलाफ अब तक की कार्रवाई
- पीड़ितों को दी गई राहत और सहायता
कैसे हुआ हादसा?
यह भीषण हादसा सक्ती जिले के सिंघनातरई गांव स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुआ। बॉयलर यूनिट में ट्यूब फटने से करीब 600 डिग्री सेल्सियस तापमान की भाप बाहर निकल गई, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर बुरी तरह झुलस गए। बताया जा रहा है कि हादसे के समय 40-50 मजदूर मौके पर मौजूद थे।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हाई प्रेशर स्टीम ट्यूब में लीकेज के कारण विस्फोट हुआ। साथ ही यह भी आरोप है कि बॉयलर को निर्धारित समय से अधिक चलाया गया, जो सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है।
मृतकों की संख्या 25 पहुंची
इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है, जबकि 20 से ज्यादा मजदूर अस्पतालों में इलाजरत हैं। घायलों के इलाज के लिए पांच विशेष मेडिकल टीमें बनाई गई हैं और सभी का मुफ्त इलाज किया जा रहा है।
सरकार और केंद्र ने दिए मुआवजे
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की घोषणा की है। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी राहत राशि का ऐलान किया गया है।
वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए और एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है, जबकि घायलों को 15-15 लाख रुपए देने की बात कही गई है।
कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज
पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है। जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही के शुरुआती संकेत मिले हैं। इस केस में कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत कई अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं।
जांच के आदेश, 30 दिन में रिपोर्ट
राज्य सरकार ने बिलासपुर संभागायुक्त को जांच सौंपी है और 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही केंद्र सरकार की औद्योगिक सुरक्षा टीम भी मामले की जांच में जुटी है।
NHRC की सख्ती से बढ़ा दबाव
NHRC के हस्तक्षेप के बाद अब राज्य सरकार पर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। आयोग इस पूरे मामले की निगरानी कर रहा है।
सक्ती का यह भीषण हादसा न केवल औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।