जबलपुर: एमपी हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने भाजपा विधायक संजय पाठक के खिलाफ लंबित आपराधिक अवमानना प्रकरण की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
पूर्व मंत्री व बीजेपी विधायक संजय पाठक से जुड़े आपराधिक अवमानना मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान संजय पाठक तीसरी बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए और अपने कृत्य पर बिना शर्त माफी मांगते हुए गलती स्वीकार की।
सुनवाई के दौरान संजय पाठक तीसरी बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने न्यायालय के समक्ष अपने कृत्य पर खेद व्यक्त करते हुए बिना शर्त माफी मांगी और अपनी गलती स्वीकार की।

जब विधायक संजय पाठक से संबंधित कंपनी के खिलाफ कथित अवैध उत्खनन के मामले की सुनवाई चल रही थी। आरोप है कि इस दौरान संबंधित न्यायाधीश से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। इसके बाद न्यायाधीश ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया और प्रकरण तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया। इसी मामले में कटनी निवासी आशुतोष मिश्रा ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए संजय पाठक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
विधायक ने हलफनामा देक गलती मानी थी
हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप और न्यायपालिका की गरिमा से जुड़े मामले को गंभीर मानते हुए संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी और जवाब तलब किया था। इसके बाद विधायक ने हलफनामा दाखिल कर अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगी थी।
कोर्ट के सामने माफी मांगी, फैसला सुरक्षित
युगलपीठ के निर्देश पर संजय पाठक तीनों सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। बुधवार को भी उन्होंने न्यायालय से क्षमा याचना की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अब अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अदालत संजय पाठक की बिना शर्त माफी स्वीकार करती है या उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करती है।