नई दिल्ली: भाजपा ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। इस टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के इस फैसले के बाद राजस्थान की राजनीति में इसके सियासी मायनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर 2028 में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजे की नई भूमिका को अहम माना जा रहा है।
वसुंधरा राजे राजस्थान में भाजपा का लंबे समय से प्रमुख चेहरा रही हैं। ऐसे में उन्हें राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी अपने वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को लेकर अधिक संतुलित रणनीति अपनाना चाहती है।
राजस्थान में वसुंधरा राजे का रहा है मजबूत प्रभाव
राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे का प्रभाव लंबे समय से दिखाई देता रहा है। 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा और पार्टी ने 120 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद अगले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने राजे पर भरोसा कायम रखा। मोदी लहर के दौरान पार्टी का प्रदर्शन और मजबूत हुआ और भाजपा 163 सीटों तक पहुंच गई।
हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति में बदलाव देखने को मिला। पार्टी ने राज्य में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर दिया और वसुंधरा राजे की सक्रिय भूमिका पहले की तुलना में सीमित नजर आई।
2023 में सीमित भूमिका का दिखा असर
राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं और इनमें करीब 70 सीटों पर वसुंधरा राजे का प्रभाव माना जाता रहा है। हालांकि 2023 के चुनाव में उन्हें केवल 54 सीटों पर प्रचार की जिम्मेदारी दी गई। चुनाव परिणाम में भाजपा ने 115 सीटों पर जीत दर्ज की।
चुनाव के बाद भाजपा ने भजन लाल शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया। इसके साथ ही राज्य की राजनीति में वसुंधरा राजे की भूमिका पहले की तुलना में सीमित हो गई। इसके बाद 2024 का लोकसभा चुनाव आया, जहां भी राजे की सक्रियता काफी सीमित रही।
2024 लोकसभा चुनाव ने बढ़ाई चिंता
2024 के लोकसभा चुनाव में वसुंधरा राजे ने मुख्य रूप से झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र में प्रचार किया, जहां उनके बेटे दुष्यंत सिंह चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में राजस्थान में भाजपा का प्रदर्शन पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में कमजोर रहा।
2019 में भाजपा ने राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2024 में पार्टी को 11 सीटों का नुकसान हुआ। चुनाव परिणामों के बाद राज्य में पार्टी की रणनीति और नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठे।
2028 चुनाव से पहले BJP क्यों सक्रिय कर रही है राजे?
अब राजस्थान में 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी को देखते हुए वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दिए जाने को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भाजपा के सामने एक तरफ मौजूदा सरकार के प्रदर्शन को लेकर जनता के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी, तो दूसरी तरफ सत्ता विरोधी माहौल से निपटना भी अहम होगा।
वसुंधरा राजे की राजस्थान में राजनीतिक पकड़ और लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी उनके अनुभव का इस्तेमाल चुनावी रणनीति में कर सकती है। महिला मतदाताओं के बीच उनकी पहचान भी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या 2028 में फिर बड़ी भूमिका निभाएंगी वसुंधरा राजे?
वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भाजपा 2028 के विधानसभा चुनाव में उन्हें फिर से राजस्थान की राजनीति में बड़ी भूमिका देगी। फिलहाल पार्टी की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर आगे किया जाएगा।
हालांकि राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी देकर भाजपा ने यह जरूर संकेत दिया है कि वसुंधरा राजे का राजनीतिक महत्व पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब देखना होगा कि पार्टी उनकी लोकप्रियता, संगठनात्मक अनुभव और राजस्थान में प्रभाव का इस्तेमाल किस तरह करती है।
2028 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति क्या होगी और वसुंधरा राजे की भूमिका कितनी बड़ी होगी, इसका जवाब आने वाले समय में ही साफ होगा।