रीवा अस्पताल: मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गांधी मेमोरियल अस्पताल में गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में दो डॉक्टर और दो नर्सिंग अधिकारियों समेत कुल चार लोगों को निलंबित किया गया है। वहीं, पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों की एक विशेष समिति गठित की गई है।

परिवार की ओर से इलाज में लापरवाही और अस्पताल में दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण और किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही की पुष्टि जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
रीवा अस्पताल में क्या हुआ?
यह मामला रीवा जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के हटवा गांव की रहने वाली कल्पना मिश्रा से जुड़ा है। उनके पति अमित मिश्रा ने उन्हें 28 अगस्त की सुबह करीब 2:38 बजे गांधी मेमोरियल अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग में भर्ती कराया था।

एक तरफ जहां पूरा देश रक्षाबंधन और त्योहारों की खुशियां मना रहा था, वहीं एक भाई अपनी बहन और उसके बच्चे के शव को लेकर इंसाफ की भीख मांग रहा था…पूरा मामला अजब गजब के मध्य प्रदेश का हैं जहाँ से डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला आते है देख लो…।
पापा हमको बचा लो, ये लोग मार डालेंगे…” मरने से कुछ घंटे पहले एक गर्भवती महिला अस्पताल के गलियारे में रोते-बिलखते हुए यही गुहार लगा रही थी। और इसके कुछ ही देर बाद, उस महिला और उसके नवजात बच्चे दोनों की मौत हो जाती है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जब इंसाफ़ के लिए परिजन अस्पताल के अधीक्षक के पास पहुंचे, तो डॉक्टर साहब ने ढांढस बंधाने के बजाय उल्टा परिजनों को ही डांटना शुरू कर दिया !
इस घटना के बाद पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था और उन्होंने लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के गेट पर शव रखकर भारी हंगामा और प्रदर्शन किया। इसी बीच, सोशल मीडिया पर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा का एक और वीडियो वायरल हो गया। इस वीडियो में वे दुखी और आक्रोशित परिजनों को सांत्वना देने के बजाय उन्हें फटकार लगाते हुए सुनाई दे रहे हैं।
उन्होंने परिजनों से संवेदनहीन तरीके से कहा कि “तुमने अपनी बहन को 22 साल (या इतनी कम उम्र) में ही गर्भवती क्यों करवा दिया, तुम्हें समझाना चाहिए था।” डॉक्टर के इस बयान ने आग में घी का काम किया और सोशल मीडिया पर लोग डॉक्टर के इस रवैये की जमकर आलोचना कर रहे हैं।
अस्पताल में इलाज के दौरान उसी दिन रात करीब 11:55 बजे गर्भवती महिला और उसके बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने इलाज को लेकर सवाल उठाए और अस्पताल में कथित दुर्व्यवहार की शिकायत भी की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

2 डॉक्टर समेत 4 लोग सस्पेंड
रीवा अस्पताल में हुई इस घटना के बाद प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की डॉक्टर सोनल अग्रवाल और एनेस्थीसिया विभाग की डॉक्टर निधि पांडे को प्रथम दृष्टया कर्तव्य में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
इसके अलावा दो नर्सिंग अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इन दोनों पर महिला के परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे।
प्रशासन का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई जांच समिति की रिपोर्ट और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने घटना को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा और निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मरीज और उनके परिजनों के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि चिकित्सा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच समिति की रिपोर्ट में यदि किसी की जिम्मेदारी सामने आती है, तो उसके अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भर्ती के समय महिला की हालत गंभीर थी
चिकित्सा रिकॉर्ड के अनुसार अस्पताल में भर्ती कराए जाने के समय महिला की हालत गंभीर बताई गई थी। उनके प्लेटलेट्स की संख्या करीब 30 हजार प्रति माइक्रोलीटर थी। इसके अलावा उनका ब्लड प्रेशर काफी अधिक था और लिवर एंजाइम भी बढ़े हुए पाए गए थे।
डॉक्टरों के रिकॉर्ड में महिला को गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और HELLP सिंड्रोम जैसी जटिलताओं के साथ पूर्ण अवधि की गर्भावस्था की स्थिति में बताया गया।
सरकार के अनुसार, महिला के लिए निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार और जरूरी चिकित्सा प्रक्रियाएं शुरू की गई थीं। हालांकि, इलाज के दौरान महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई।
परिवार ने लगाए इलाज में लापरवाही के आरोप
घटना के बाद महिला के परिवार ने अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही और परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। परिवार की शिकायत के बाद मामले को जांच के लिए आगे बढ़ाया गया।
प्रशासन ने वरिष्ठ डॉक्टरों की एक समिति गठित की है, जो पूरे मामले की जांच करेगी। समिति अस्पताल में महिला के भर्ती होने से लेकर इलाज, चिकित्सा प्रक्रियाओं और मौत तक के घटनाक्रम की समीक्षा करेगी।
इस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज के दौरान किसी स्तर पर चिकित्सा प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे गए शव
परिवार की मांग पर महिला और उनके अजन्मे बच्चे का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके लिए रीवा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की संयुक्त टीम ने प्रक्रिया पूरी की।
जरूरी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद महिला और बच्चे के शव परिजनों को सौंप दिए गए। शवों को वाहन के माध्यम से उनके पैतृक गांव ले जाया गया।
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी जिम्मेदारी
रीवा अस्पताल में हुई इस घटना के बाद चार लोगों के निलंबन से प्रशासन ने यह संकेत दिया है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि, निलंबन को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।