Raipur Prayas Institution Case: राजधानी रायपुर की प्रयास संस्था से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है। आरोप है कि 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 13 वर्षीय छात्र को तांत्रिक क्रिया करने के आरोप में रात के समय हॉस्टल से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद छात्र को अचानक ट्रांसफर सर्टिफिकेट यानी TC भी थमा दी गई।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद बाल संरक्षण आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग की डीसीपीयू यूनिट मामले की जांच के लिए प्रयास संस्था पहुंचेगी। जांच में बच्चे के साथ हुए व्यवहार, उस पर लगाए गए आरोप और हॉस्टल से बाहर निकालने की प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी।
बाल संरक्षण आयोग ने लिया मामले का संज्ञान
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा के अनुसार, उन्होंने बच्चे के पिता से फोन पर बातचीत की है। अब डीसीपीयू की पूरी टीम मामले की विस्तृत जांच करेगी।

आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि बच्चों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई करना या उनके लिए इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल करना गंभीर विषय है। यदि जांच के दौरान लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित मामले में कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
आयोग की ओर से जांच रिपोर्ट भी मंगाई जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किशोर न्याय अधिनियम यानी जेजे एक्ट के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, महासमुंद जिले के एक किसान के 13 वर्षीय बेटे का एडमिशन रायपुर की प्रयास संस्था में 3 सितंबर को हुआ था। छात्र 9वीं कक्षा में पढ़ता है और एडमिशन के कुछ ही दिनों बाद उसे लेकर विवाद सामने आ गया।
परिजनों का आरोप है कि संस्था प्रबंधन ने उन्हें बुलाकर बताया कि उनका बच्चा हॉस्टल में रात करीब 2 बजे तक जागता है और तांत्रिक क्रिया करता है। इसके बाद प्रबंधन ने छात्र को हॉस्टल से बाहर निकालने का निर्णय लिया।
परिजनों का सवाल है कि जब बच्चे का एडमिशन हुए अभी दो सप्ताह भी पूरे नहीं हुए थे, तो उसके बारे में इस तरह का निष्कर्ष किस आधार पर निकाला गया। उनका कहना है कि इससे पहले संस्था की ओर से बच्चे को लेकर किसी तरह की शिकायत, चेतावनी या लिखित सूचना नहीं दी गई थी।
परिजनों ने प्राचार्य पर लगाए गंभीर आरोप
छात्र के माता-पिता का आरोप है कि संस्था की प्राचार्य ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया और दबाव बनाकर कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए। परिजनों के मुताबिक, इसके बाद बच्चे को हॉस्टल से बाहर कर दिया गया और उसे TC थमा दी गई।
परिजनों का यह भी दावा है कि उन्होंने हॉस्टल में रहने वाले अन्य बच्चों से मामले की जानकारी लेने की कोशिश की। उनके अनुसार, अन्य छात्रों ने इस तरह की किसी घटना या कथित गतिविधि की पुष्टि नहीं की।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आधी रात बच्चे को हॉस्टल से निकालने का आरोप

परिजनों के अनुसार, बच्चे को अचानक हॉस्टल से बाहर निकालने की कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि इतनी कम अवधि में छात्र के खिलाफ इस तरह का फैसला लेना उचित प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
परिवार का आरोप है कि बच्चे को अपनी बात रखने या लगाए गए आरोपों पर स्पष्टीकरण देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसके अलावा, प्रबंधन की ओर से पहले किसी शिकायत या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी भी नहीं दी गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम से छात्र और उसके परिवार को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा है। परिजन अब मामले की निष्पक्ष जांच और बच्चे के भविष्य को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री शिकायत सेल में भी दर्ज कराई शिकायत
प्रयास संस्था के इस मामले को लेकर छात्र के परिजनों ने मुख्यमंत्री शिकायत सेल में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है। परिवार ने संस्था प्रबंधन के खिलाफ जांच की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि बच्चे पर लगाए गए आरोपों से उसकी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो सकता है। वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
डीसीपीयू जांच के बाद साफ होगी स्थिति

अब इस मामले में बाल संरक्षण आयोग की डीसीपीयू यूनिट की जांच अहम मानी जा रही है। टीम छात्र, उसके परिजनों और संस्था प्रबंधन से जुड़े लोगों से जानकारी ले सकती है। साथ ही, हॉस्टल के अन्य छात्रों से भी घटनाक्रम के संबंध में पूछताछ की जा सकती है।
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि छात्र को हॉस्टल से बाहर निकालने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया, क्या संस्था ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया और बच्चे के अधिकारों का ध्यान रखा गया या नहीं।
Raipur Prayas Institution Case में फिलहाल आरोपों की जांच जारी है। आयोग की रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।