Rahul Gandhi on TMC Symbol Freeze: तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़कर टिप्पणी की है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि उन सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं की है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं। उन्होंने अपने बयान में BJP और चुनाव आयोग पर राजनीतिक दलों को तोड़ने और चुनाव चिह्न छीनने का आरोप भी लगाया।
‘वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी’
राहुल गांधी ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि पहले ‘वोट चोरी’, फिर ‘सरकार चोरी’ और अब ‘पार्टी चोरी’ की स्थिति बन रही है। उन्होंने इसे देश में लोकतांत्रिक गिरावट का प्रतीक बताया।
यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है। चुनाव आयोग के फैसले के संदर्भ में आयोग की अपनी प्रक्रिया TMC के दो गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ी है।

TMC का नाम और चुनाव चिह्न क्यों हुआ फ्रीज?
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर 2026 को अंतरिम आदेश के तहत ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। यह कदम पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच संगठन और पार्टी की पहचान को लेकर चल रहे विवाद के बीच उठाया गया है।
मौजूदा विवाद में एक पक्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला है, जबकि दूसरा पक्ष ऋतब्रत बनर्जी से जुड़ा है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और मुक्त चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा है।
दोनों गुटों से मांगे गए नए नाम और सिंबल

चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों TMC गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने के निर्देश दिए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्षों से तीन-तीन पसंदीदा नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिह्न बताने को कहा गया था।
यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम तौर पर लागू की गई है। पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय बाद की प्रक्रिया में होना है।
राहुल गांधी ने शिवसेना और NCP का भी किया जिक्र
Rahul Gandhi on TMC Symbol Freeze प्रतिक्रिया में राहुल गांधी ने पहले के राजनीतिक दलों से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का उदाहरण देते हुए दावा किया कि TMC के मामले में भी ऐसा ही पैटर्न दिखाई दे रहा है।
राहुल गांधी का आरोप है कि BJP और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ने और उनके चुनाव चिह्न छीनने का काम कर रहे हैं। इन आरोपों को राहुल गांधी के राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए; चुनाव आयोग ने TMC मामले में अपने अंतरिम आदेश को पार्टी के दो गुटों के बीच संगठनात्मक विवाद और नाम-सिंबल पर दावे से जुड़ी प्रक्रिया के संदर्भ में जारी किया है।
‘यह सिर्फ ममता बनर्जी की लड़ाई नहीं’

राहुल गांधी ने कहा कि TMC के नाम और सिंबल को लेकर चल रहा विवाद केवल ममता बनर्जी तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, यह उन सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं का मुद्दा है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था चाहते हैं।
उन्होंने चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका पर भी सवाल उठाया। राहुल गांधी का कहना है कि आयोग की जिम्मेदारी जनता के जनादेश की रक्षा करना है, जबकि उनके आरोप के अनुसार आयोग ऐसी ताकतों की मदद कर रहा है जो जनादेश को प्रभावित करना चाहती हैं। यह उनके द्वारा लगाया गया आरोप है, न कि चुनाव आयोग के बारे में स्थापित तथ्य।
आगामी उपचुनाव से जुड़ा है पूरा विवाद
TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, नंदीग्राम और रेजिनगर सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC की संगठनात्मक पहचान और चुनावी चिह्न को लेकर विवाद और तेज हो गया है। अब आगे की प्रक्रिया में यह स्पष्ट होना बाकी है कि चुनाव आयोग दोनों गुटों के दावों पर क्या अंतिम निर्णय लेता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल चुनाव आयोग का फैसला अंतरिम है। दोनों गुटों को वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा गया है, जबकि पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय आगे की प्रक्रिया के बाद होगा।
इस बीच राहुल गांधी की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। जहां राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और BJP पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं TMC के नाम और सिंबल पर आयोग की कार्रवाई फिलहाल दोनों गुटों के बीच जारी संगठनात्मक विवाद के संदर्भ में अंतरिम व्यवस्था के रूप में सामने आई है।