Surendra Koli Death: हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत, अल्मोड़ा के मंगरूखाल गांव

Spread the love

Surendra Koli Death: देशभर में चर्चित निठारी कांड से बरी हुए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का मंगरूखाल गांव एक बार फिर चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में एक चाय की दुकान के अंदर सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका मिला। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

हरिद्वार, सुरेंद्र कोली के निधन की खबर सामने आने के बाद उनके पैतृक गांव की कहानी भी फिर सामने आ गई है। हरिद्वार में मंगरूखाल गांव में अब उनके परिवार की पुरानी यादों और संघर्ष की निशानी के तौर पर उनका खंडहर हो चुका पैतृक मकान ही बचा है।

मंगरूखाल गांव से दिल्ली तक का सफर

Surendra Koli Death: हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत

सुरेंद्र कोली हरिद्वार में अल्मोड़ा के स्याल्दे ब्लॉक स्थित मंगरूखाल गांव के रहने वाले थे। वह शाकरू राम और कुंती देवी के चार बेटों में दूसरे नंबर पर थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी।

पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने रोजगार की तलाश में दिल्ली का रुख किया। बाद में उनकी शादी गांव की ही शांति देवी से हुई। पिता के निधन के बाद उनके दो भाई भी रोजगार की तलाश में दिल्ली चले गए।

सुरेंद्र कोली का जीवन उस समय पूरी तरह बदल गया, जब वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी कांड में उनका नाम सामने आया। इसके बाद उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ती चली गईं।

जेल जाने के बाद परिवार पर बढ़ीं मुश्किलें

रिपोर्ट के अनुसार, जब सुरेंद्र कोली जेल गए, उस समय उनकी एक बेटी थी, जबकि उनका बेटा उनकी पत्नी शांति देवी के गर्भ में था। इसके बाद बच्चों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी शांति देवी ने संभाली।

परिवार को गांव में सामाजिक और पारिवारिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बताया जाता है कि करीब 10 साल पहले शांति देवी अपने दोनों बच्चों के साथ हरियाणा चली गई थीं। इसके बाद वह गांव वापस नहीं लौटीं और न ही जेल में सुरेंद्र कोली से मिलने गईं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बाद में शांति देवी ने दूसरी शादी कर ली थी। इस तरह समय के साथ सुरेंद्र कोली का अपने गांव और परिवार से संपर्क लगभग खत्म हो गया।

बेटे के लौटने का इंतजार करती रहीं मां

सुरेंद्र कोली की मां कुंती देवी ने जेल में उनसे अंतिम मुलाकात की थी। यह मुलाकात डासना जेल में हुई थी। इसके बाद मां अपने बेटे के वापस लौटने का इंतजार करती रहीं।

लेकिन सुरेंद्र के जेल से बाहर आने से पहले ही कुंती देवी का निधन हो गया। इस तरह वह अपने बेटे को दोबारा घर लौटते नहीं देख सकीं।

नवंबर 2025 में सुरेंद्र कोली के दोषमुक्त होने की खबर सामने आई थी। लेकिन परिवार में उस समय जश्न मनाने वाला कोई नहीं था। मां का निधन हो चुका था, जबकि पत्नी और दोनों बच्चे पहले ही गांव छोड़ चुके थे।

अब गांव में सिर्फ खंडहर मकान बचा

Surendra Koli Death के बाद मंगरूखाल गांव की चर्चा एक बार फिर होने लगी है। कभी जिस मकान में सुरेंद्र कोली अपने परिवार के साथ रहते थे, आज वहां सिर्फ खंडहरनुमा पैतृक मकान बचा है।

परिवार के अधिकांश सदस्य गांव से दूर जा चुके हैं। मां का निधन हो चुका है और पत्नी तथा बच्चे भी वर्षों पहले गांव छोड़ चुके हैं। ऐसे में यह पुराना मकान उस परिवार की कहानी का आखिरी निशान बनकर रह गया है।

निठारी कांड से बरी होने के बाद भी नहीं लौटी पुरानी जिंदगी

निठारी मामले में नाम सामने आने के बाद सुरेंद्र कोली लंबे समय तक जेल में रहे। बाद में उन्हें दोषमुक्त किए जाने की खबर सामने आई। हालांकि, इतने वर्षों के अंतराल में उनका परिवार बिखर चुका था और गांव से उनका जुड़ाव भी लगभग समाप्त हो गया था।

उनकी मौत के बाद मंगरूखाल गांव में उनके परिवार से जुड़ी पुरानी यादें फिर चर्चा में आ गई हैं। पैतृक मकान अब वीरान और जर्जर स्थिति में है, लेकिन वह इस परिवार के लंबे संघर्ष और बदलते हालात की कहानी को अपने भीतर समेटे हुए है।

फिलहाल हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत को लेकर पुलिस की जांच जारी है। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक शव भूपतवाला क्षेत्र में एक चाय की दुकान के अंदर मिला। मौत की परिस्थितियों और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

जरुर पढ़ें

InkLink News Agency is a fast-growing digital news agency and aggregator delivering accurate, timely, and reliable updates across India. We provide dedicated coverage for India, Chhattisgarh, and Madhya Pradesh, along with in-depth reporting across key categories including Business, Technology, Politics, Crime, Literature, and more.

Stay informed. Stay connected. Stay ahead with InkLink News Agency.