CGPSC Recruitment Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत यानी चार्जशीट दाखिल की है। ED ने पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत सात लोगों को आरोपी बनाया है। यह शिकायत रायपुर स्थित विशेष PMLA कोर्ट में दाखिल की गई है।
ED की ओर से दाखिल अभियोजन शिकायत करीब 99 पेज की है, जबकि इसके साथ लगभग 3,700 पेज के दस्तावेज भी लगाए गए हैं। एजेंसी का आरोप है कि CGPSC की 2020 और 2021 की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर और उम्मीदवारों से पैसे लेने से जुड़े मामले सामने आए।
कौन-कौन बनाए गए आरोपी?
ED की अभियोजन शिकायत में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के अलावा कारोबारी श्रवण गोयल, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर, उत्कर्ष चंद्राकर, विकास चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम शामिल हैं।
यह ED की ओर से इस मामले में दाखिल की गई पहली prosecution complaint बताई जा रही है। मामला CGPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़े पहले से चल रहे जांच प्रकरण से जुड़ा है।
रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने का ED का आरोप

ED के अनुसार, CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी पर अपने रिश्तेदारों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने के लिए भर्ती नियमों में बदलाव कराने का आरोप है।
एजेंसी का दावा है कि जुलाई 2021 में CGPSC के भर्ती नियमों में बदलाव के दौरान परिवार की परिभाषा से ‘nephew’ यानी भतीजे को बाहर किया गया। ED का आरोप है कि इस बदलाव से सोनवानी के भतीजों को भर्ती प्रक्रिया में लाभ पहुंचाने का रास्ता बना।
ED ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि ये सभी आरोप जांच एजेंसी की अभियोजन शिकायत में लगाए गए हैं और अदालत में इनका परीक्षण होना बाकी है।
श्रवण गोयल के बेटे और बहू से जुड़ा मामला

ED के अनुसार, कारोबारी श्रवण गोयल ने कथित तौर पर ग्रामीण विकास समिति (GVS) नामक संस्था को रकम दी थी। एजेंसी का आरोप है कि यह व्यवस्था उनके बेटे और बहू को CGPSC परीक्षा में चयन दिलाने के उद्देश्य से की गई थी।
ED ने दावा किया है कि इस पूरे मामले में पैसे के लेनदेन और चयन प्रक्रिया में कथित प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी की जांच का एक प्रमुख हिस्सा इसी कथित आर्थिक लेनदेन की पड़ताल से जुड़ा है।
प्रश्नपत्र लीक मामले में ललित गणवीर की भूमिका का आरोप

अभियोजन शिकायत में तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर की भूमिका को लेकर भी ED ने आरोप लगाए हैं। एजेंसी के मुताबिक, 2021 में नियमों में बदलाव से लेकर प्रश्नपत्र की गोपनीयता से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका की जांच की गई।
ED का आरोप है कि प्रश्नपत्र कथित तौर पर कुछ उम्मीदवारों तक परीक्षा से पहले पहुंचाए गए और इसके बदले आर्थिक लाभ हासिल करने की व्यवस्था की गई।
उत्कर्ष और विकास चंद्राकर पर क्या आरोप?

ED के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर और विकास चंद्राकर ने कथित तौर पर उम्मीदवारों को CGPSC के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देकर उनसे रकम जुटाई।
एजेंसी ने आरोप लगाया है कि उम्मीदवारों से इस तरह तीन करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई गई। ED के अनुसार, इस रकम के आगे के लेनदेन की भी जांच की गई है।
उत्कर्ष चंद्राकर को ED ने सितंबर 2026 में CGPSC भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में गिरफ्तार भी किया था। ED की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 1 सितंबर को रायपुर, दुर्ग और जशपुर में पांच स्थानों पर तलाशी के दौरान दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए थे।
चेतन बोरघरिया पर भी गंभीर आरोप
मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया को भी आरोपी बनाया गया है। ED की जांच के मुताबिक उन पर अपने पद और प्रभाव का कथित इस्तेमाल कर उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भरोसा देने का आरोप है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसी ने उनके बैंक खातों में हुए कई लेनदेन की भी जांच की है। इन लेनदेन को कथित तौर पर भर्ती घोटाले से जुड़े पैसों की जांच के हिस्से के रूप में देखा गया है।
3700 पेज के दस्तावेजों में क्या है?
ED ने कोर्ट में दाखिल 99 पेज की अभियोजन शिकायत के साथ करीब 3,700 पेज के दस्तावेज लगाए हैं। इन दस्तावेजों में कथित वित्तीय लेनदेन, भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और जांच के दौरान जुटाए गए अन्य साक्ष्य शामिल बताए गए हैं।
एजेंसी का कहना है कि CGPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े आर्थिक लेनदेन की कड़ियों की जांच की गई है।
2020 और 2021 की परीक्षाएं जांच के दायरे में
यह मामला CGPSC की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़ा है। इन परीक्षाओं में डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए चयन किया गया था।
ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच की शुरुआत छत्तीसगढ़ EOW की FIR और बाद में CBI की जांच से जुड़े मामलों से हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार CBI ने भी इस मामले में पहले कार्रवाई की थी और टामन सोनवानी को 2024 में गिरफ्तार किया गया था।
आगे क्या होगा?
ED की अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद अब मामले में अदालत की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अदालत में सुनवाई होगी और आरोपी पक्ष को अपना बचाव रखने का अवसर मिलेगा।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ED द्वारा चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। अंतिम दोषसिद्धि या बरी होने का फैसला अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
फिलहाल CGPSC Recruitment Scam मामले में ED की करीब 3,700 पेज की दस्तावेजी कार्रवाई और सात आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत ने इस भर्ती प्रकरण को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।