Gariyaband Illegal Clinic News के बीच जिले के अमलीपदर इलाके से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। उरमाल गांव के कश्यपारा में एक कमरे में पिछले करीब 5 साल से कथित तौर पर एक क्लिनिक संचालित किया जा रहा है। आरोप है कि यहां बिना मान्य चिकित्सा डिग्री के मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कम खर्च में इलाज मिलने की उम्मीद में आसपास के ग्रामीण इस क्लिनिक में पहुंचते हैं। खास बात यह है कि यहां इलाज कराने के लिए ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों से भी मरीज आने की बात सामने आई है।
‘इलाज करने से कोई नहीं रोक सकता’ का दावा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, क्लिनिक संचालक बे लोचन प्रधान खुद को पैथोलॉजिस्ट बताते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इलाज करने की अनुमति है, लेकिन उन्होंने यह अनुमति संबंधित अधिकारियों को दिखाने की आवश्यकता नहीं बताई।
रिपोर्ट के अनुसार, उनका कहना है कि मरीज खुद इंजेक्शन लेकर आते हैं और वह उन्हें लगा देते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इलाके के अधिकारी, जिनमें BMO, CMO और कलेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल हैं, यहां आ चुके हैं। इसके बावजूद उनका कहना है कि स्थानीय लोगों का भरोसा उनके ऊपर है और उन्हें इलाज करने से कोई रोक नहीं सकता।
हालांकि, उनके पास वास्तव में किस प्रकार की चिकित्सा योग्यता या वैध अनुमति है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्ट में नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित विभाग की जांच इस मामले में अहम होगी।
‘उड़िया डॉक्टर’ के नाम से पहुंचते हैं मरीज

उरमाल गांव में संचालित इस छोटे से क्लिनिक में सुबह से ही मरीजों की भीड़ जुटने का दावा किया गया है। स्थानीय स्तर पर बे लोचन प्रधान को ‘उड़िया डॉक्टर’ के नाम से भी जाना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा के दूर-दराज इलाकों से भी लोग यहां इलाज कराने पहुंचते हैं। क्लिनिक संचालक हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं का इलाज करने का दावा करते हैं।
आरोप यह भी है कि अलग-अलग बीमारियों के इलाज के नाम पर मरीजों को दो से तीन तरह के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इलाज, दवा और इंजेक्शन के लिए मरीजों से करीब 200 रुपये से लेकर 1,000 रुपये तक लिए जाने की बात सामने आई है।
सरकारी अस्पताल से ज्यादा भीड़ होने का दावा

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्लिनिक में आने वाले मरीजों की संख्या काफी अधिक रहती है। यहां तक कि कुछ स्थानीय दावों के मुताबिक, कई बार क्लिनिक में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की तुलना में भी अधिक भीड़ दिखाई देती है।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार अब तक इस कथित क्लिनिक में इलाज को लेकर प्रशासन के पास कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं हुई है। यही वजह बताई जा रही है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से मौजूदा समय में किसी औपचारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
2019 में भी हुई थी कार्रवाई
इस मामले का एक पुराना रिकॉर्ड भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2019 में तत्कालीन गरियाबंद कलेक्टर श्याम धावड़े को शिकायत मिली थी। इसके बाद उनकी मौजूदगी में क्लिनिक पर छापेमारी की गई थी।
उस समय क्लिनिक उरमाल की बस्ती के बीच संचालित होने की बात सामने आई थी। कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने क्लिनिक को सील कर दिया था।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार छापेमारी के करीब डेढ़ साल बाद कथित क्लिनिक को उरमाल के आश्रित कश्यप पारा में दोबारा शुरू कर दिया गया। यानी पहले की कार्रवाई के बावजूद बाद में इसका संचालन फिर शुरू होने का दावा किया जा रहा है।
ओडिशा के कटक जिले का रहने वाला बताया गया
मीडिया रिपोर्ट में बे लोचन प्रधान को मूल रूप से ओडिशा के कटक जिले का निवासी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उन्होंने उरमाल का वोटर कार्ड और आधार कार्ड बनवा लिया।
हालांकि, दस्तावेजों से जुड़ी इन जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की ओर से होना बाकी है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल

पिछले कई वर्षों से कथित तौर पर क्लिनिक संचालित होने की बात सामने आने के बाद स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्लिनिक के संचालन में जरूरी नियमों और चिकित्सा मानकों का पालन नहीं हो रहा था, तो अब तक इसकी नियमित जांच क्यों नहीं हुई।
विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता के इलाज किए जाने से मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में क्लिनिक की वैधता, संचालक की योग्यता, दवाओं और इंजेक्शन के इस्तेमाल तथा मरीजों से ली जाने वाली फीस की जांच संबंधित स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा सकती है।
शिकायत मिलने पर कार्रवाई की बात
मैनपुर BMO गजेंद्र ध्रुव ने मीडिया को बताया कि इस मामले को लेकर अब तक उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही है।
BMO के अनुसार, यदि जांच में क्लिनिक का संचालन अवैध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल Gariyaband Illegal Clinic News का यह मामला स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा। क्लिनिक संचालक के पास वैध चिकित्सा योग्यता और आवश्यक अनुमति है या नहीं, साथ ही मरीजों को किस आधार पर इलाज और इंजेक्शन दिए जा रहे हैं, इन सवालों का जवाब आधिकारिक जांच के बाद सामने आ सकेगा।