Maa Lingeshwari Darshan के लिए छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में बुधवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। फरसगांव क्षेत्र की झाटीबन पहाड़ी की गुफा में विराजमान मां लिंगेश्वरी के कपाट सुबह विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
कपाट खुलते ही माता के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार लग गई। मां लिंगेश्वरी का यह गुफा मंदिर वर्ष में केवल एक दिन श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इसी वजह से यहां दर्शन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है।
बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दर्शन के लिए 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही जा रही है और बड़ी संख्या में भक्त अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
तीन दिन पहले से दर्शन के लिए इंतजार

मां लिंगेश्वरी के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त आस्था देखने को मिल रही है। कई भक्त मंदिर परिसर के आसपास दो से तीन दिन पहले ही पहुंच गए थे और कपाट खुलने का इंतजार कर रहे थे।
मंदिर के कपाट खुलते ही माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मां लिंगेश्वरी का यह गुफा मंदिर वर्ष में केवल एक दिन श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इसी वजह से यहां दर्शन के लिए छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि दर्शन के लिए 50 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं और बड़ी संख्या में लोग कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
तीन दिन से दर्शन के इंतजार में डटे श्रद्धालु

मां लिंगेश्वरी के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। कई भक्त दो से तीन दिन पहले ही मंदिर क्षेत्र में पहुंचकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। कपाट खुलने के बाद गुफा मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर श्रद्धालुओं की लंबी कतार दिखाई दी। दूर-दराज के इलाकों से आए भक्तों का मानना है कि मां लिंगेश्वरी के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही आस्था हर साल बड़ी संख्या में लोगों को इस दुर्लभ धार्मिक स्थल तक खींच लाती है।
बुधवार को गुफा मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं की कतार काफी दूर तक दिखाई दी। दूर-दराज से आए भक्त अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लिंगेश्वरी के दर्शन से मनोकामनाएं पूरी होने की आस्था है। इसी विश्वास के चलते हर साल इस विशेष अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु झाटीबन पहाड़ी पहुंचते हैं।
बस्तर महाराजा कमल चंद भंजदेव ने भी किए दर्शन
मां लिंगेश्वरी के दर्शन करने वालों में बस्तर महाराजा कमल चंद भंजदेव भी शामिल रहे। वे अपनी धर्मपत्नी के साथ गुफा मंदिर पहुंचे और माता की पूजा-अर्चना की।
बताया गया कि इस दौरान उन्होंने मां लिंगेश्वरी से संतान प्राप्ति की कामना की। उनके मंदिर पहुंचने के दौरान भी धार्मिक माहौल बना रहा और उन्होंने परंपरा के अनुसार माता के दर्शन किए।
गुफा में दिखाई देते हैं शेर के पदचिह्न

मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गुफा के भीतर प्रवेश करने पर शेर के पदचिह्न दिखाई देते हैं। मंदिर के पुजारी के मुताबिक, इन पदचिह्नों को क्षेत्र में अच्छी बारिश, बेहतर फसल और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
इन्हीं धार्मिक मान्यताओं और आस्था के कारण मां लिंगेश्वरी का यह गुफा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर परिसर के साथ-साथ श्रद्धालुओं के आने-जाने वाले मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है।
इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य सेवाओं समेत जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। प्रशासन का फोकस भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने पर है।
रात 12 बजे तक मिलेंगे मां लिंगेश्वरी के दर्शन
मंदिर में दर्शन का सिलसिला रात 12 बजे तक जारी रहने की जानकारी दी गई है। इसके बाद श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया जाएगा।
मंदिर समिति की धार्मिक परंपरा के अनुसार, पूजा-अर्चना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गुफा के कपाट दोबारा बंद कर दिए जाएंगे। चूंकि मंदिर साल में केवल एक दिन श्रद्धालुओं के लिए खुलता है, इसलिए इस दिन दर्शन करने के लिए हर साल बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं।
फिलहाल झाटीबन पहाड़ी का पूरा क्षेत्र धार्मिक माहौल में डूबा हुआ है। गुफा मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं की लंबी कतार और माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आ रहा है।