CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। 99 पन्नों की इस अभियोजन शिकायत के साथ करीब 3,700 पन्नों के दस्तावेज भी पेश किए गए हैं। मामले में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टमन सिंह सोनवानी समेत 7 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
ED की जांच में कथित पेपर लीक, उम्मीदवारों से पैसे लेने, परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने और पैसों के लेनदेन से जुड़े कई आरोप सामने आए हैं। इसी जांच के दौरान अधिकारियों और कथित बिचौलियों के बीच बातचीत से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी सामने आने की बात कही गई है।
‘सबको लेकर डूबूंगा’ मैसेज से क्या सामने आया?

ED की जांच में सामने आए डिजिटल साक्ष्यों को लेकर रिपोर्ट में एक कथित WhatsApp बातचीत का उल्लेख किया गया है। इसमें उत्कर्ष चंद्राकर की ओर से चेतन बोरघरिया को कथित तौर पर धमकी भरा संदेश भेजे जाने की बात कही गई है, जिसमें लिखा था कि वह “सबको लेकर डूबूंगा”।
ED की जांच के मुताबिक, यह बातचीत पैसों की मांग और लेनदेन से जुड़े विवाद के संदर्भ में सामने आई। जांच एजेंसी ने डिजिटल डिवाइस से मिले संचार और वित्तीय लेनदेन को अपनी जांच का हिस्सा बनाया है। हालांकि, किसी भी चैट या जांच एजेंसी के आरोप को अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता।
7 आरोपियों के नाम चार्जशीट में शामिल
ED की अभियोजन शिकायत में कुल सात लोगों के नाम हैं। इनमें:
- टमन सिंह सोनवानी — पूर्व CGPSC अध्यक्ष
- श्रवण गोयल — कारोबारी
- ललित गनवीर — तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक
- उत्कर्ष चंद्राकर
- विकास चंद्राकर
- अनिल चंद्राकर
- चेतन बोरघरिया — तत्कालीन OSD, पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय
शामिल हैं। ED ने इन लोगों की कथित भूमिका को भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं, पेपर लीक और पैसों के लेनदेन से जोड़कर जांच की है।
पेपर लीक और उम्मीदवारों से पैसे लेने का आरोप

ED के मुताबिक, उत्कर्ष चंद्राकर और विकास चंद्राकर ने कथित तौर पर कुछ उम्मीदवारों के लिए प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों की व्यवस्था की और उनसे पैसे जुटाए।
ED की जांच में यह भी आरोप है कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC State Service Examination 2021 में उम्मीदवारों से 3 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध रकम जुटाई। एजेंसी के अनुसार, उम्मीदवारों को परीक्षा में मदद और चयन का भरोसा दिया गया था।
परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर का आरोप
मामले में ED ने परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने और कुछ उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के आरोपों की भी जांच की है।
एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक किए गए और कुछ उम्मीदवारों के चयन में कथित तौर पर हेरफेर किया गया। जांच का संबंध CGPSC की 2020 और 2021 की परीक्षाओं से बताया गया है, जिनमें डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी जैसे पदों के लिए भर्ती शामिल थी।
हालांकि, परीक्षा में OMR शीट के जरिए नंबर बढ़ाने जैसे विशिष्ट आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा सकता, जब तक अदालत में इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आता।
टमन सिंह सोनवानी से जुड़ा NGO और CSR फंड
ED की शिकायत के मुताबिक, कारोबारी श्रवण गोयल ने टमन सिंह सोनवानी से जुड़े ग्रामीण विकास समिति (GVS) नामक NGO को कथित तौर पर धन उपलब्ध कराया था।
ED का आरोप है कि यह रकम CGPSC परीक्षा में गोयल के बेटे और बहू को लाभ पहुंचाने की कथित व्यवस्था से जुड़ी थी। एजेंसी ने 2021 में CGPSC भर्ती नियमों में हुए बदलाव को भी अपनी जांच का हिस्सा बनाया है। ED के मुताबिक, “nephew” शब्द को परिवार की परिभाषा से हटाने से कुछ रिश्तेदारों को लाभ पहुंचने का आरोप है।
चेतन बोरघरिया के मोबाइल से भी मिले डिजिटल साक्ष्य
ED ने सितंबर 2026 में तत्कालीन OSD और वर्तमान में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर तैनात रहे चेतन बोरघरिया के परिसरों पर तलाशी ली थी। बाद में 11 सितंबर को उन्हें PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया।
ED के अनुसार, उनके मोबाइल समेत कई डिजिटल उपकरणों की जांच में उत्कर्ष चंद्राकर के साथ वित्तीय लेनदेन और पैसों की मांग/वापसी से संबंधित बातचीत सामने आई। एजेंसी ने यह भी कहा कि कुछ वित्तीय लेनदेन एक कंपनी के जरिए फंड की layering और movement से जुड़े होने की आशंका है।
उत्कर्ष चंद्राकर की भी हुई गिरफ्तारी
ED ने 1 सितंबर 2026 को CGPSC मामले में उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया था। एजेंसी के अनुसार, रायपुर, दुर्ग और जशपुर में की गई तलाशी के दौरान डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की गई।
इसके बाद जांच में सामने आए डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड को अभियोजन शिकायत में शामिल किया गया है।
₹47.54 लाख की संपत्ति अटैच
ED ने इस मामले में PMLA के तहत ₹47.54 लाख की अचल संपत्तियों को अटैच किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा जांच के दौरान विभिन्न परिसरों से डिजिटल उपकरण और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग जांच का आधार छत्तीसगढ़ EOW/ACB की FIR और बाद में CBI की कार्रवाई को बताया गया है। CBI ने भी मामले में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टमन सिंह सोनवानी और अन्य के खिलाफ जांच की थी।

बचाव पक्ष ने कहा- आरोपों को अंतिम सत्य न माना जाए
मामले में बचाव पक्ष की ओर से कहा गया है कि अभियोजन शिकायत में लगाए गए आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। बचाव पक्ष का कहना है कि PMLA के तहत कथित अपराध से जुड़ी संपत्ति और Proceeds of Crime के बीच संबंध को अदालत में स्थापित करना जरूरी होगा।
कानूनी रूप से भी अभियोजन शिकायत दाखिल होना दोषसिद्धि नहीं है। मामले में अदालत उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य सामग्री का परीक्षण करेगी।
अब अदालत में होगी आरोपों की जांच

CGPSC Scam मामले में ED की अभियोजन शिकायत के बाद जांच अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गई है। ED ने अपनी शिकायत में सात आरोपियों के खिलाफ कथित मनी लॉन्ड्रिंग और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अपराधों का विवरण दिया है।
एक तरफ जांच एजेंसी ने डिजिटल चैट, बैंकिंग लेनदेन, दस्तावेजों और बयानों को अपने मामले का आधार बताया है, वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को अंतिम सत्य मानने से इनकार किया है।
अब यह अदालत की प्रक्रिया में तय होगा कि जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए साक्ष्य आरोपों को किस हद तक साबित करते हैं। अभी मामले में अंतिम दोषसिद्धि नहीं हुई है।