EC-SIR विवाद: वोटर लिस्ट में बदलाव पर कांग्रेस की 5 मांगें, खरगे ने मांगा पूरा डेटा

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EC-SIR विवाद: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR प्रक्रिया और वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप है कि इन बदलावों से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

29 सितंबर 2026 को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में खरगे ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। आयोग का कहना है कि उसके फैसले कानूनी प्रावधानों के तहत लिए जाते हैं और आयुक्तों के बीच विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।

खरगे ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

EC-SIR विवाद: वोटर लिस्ट में बदलाव पर कांग्रेस की 5 मांगें, खरगे ने मांगा पूरा डेटा

CWC बैठक में खरगे ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए वोटर लिस्ट में किए जा रहे बदलावों को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मतदाताओं के नाम हटाए जाने और वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है।

खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए अधिक पारदर्शिता जरूरी है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना राजनीतिक अभियान आगे बढ़ाने की बात भी कही है।

वहीं, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाने की बात कही है और आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों पर कहा है कि अलग-अलग टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकती हैं।

Form 6 में बदलाव का मुद्दा भी उठा

EC-SIR विवाद के बीच कांग्रेस ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

खरगे ने आरोप लगाया कि नियमों में किए गए बदलावों से कुछ युवाओं के मतदाता के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इसे युवाओं के मतदान अधिकार से जोड़ते हुए सरकार पर राजनीतिक हमला भी किया।

हालांकि, चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पात्र भारतीय नागरिक इसके जरिए मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं।

डुप्लीकेट वोटर और एक पते पर कई नामों का मुद्दा

खरगे ने वोटर लिस्ट में कथित डुप्लीकेट नाम, संदिग्ध पते और एक ही पते पर कई मतदाताओं के नाम दर्ज होने जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया।

कांग्रेस का कहना है कि ऐसे मामलों की जांच और सुधार के लिए चुनाव आयोग को प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। पार्टी ने राहुल गांधी की ओर से पहले उठाए गए वोटर लिस्ट संबंधी सवालों का भी समर्थन किया।

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मतदाता अपने नाम और निर्वाचन संबंधी जानकारी की जांच कर सकते हैं। आयोग के पोर्टल पर SIR से जुड़ी पुरानी मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा भी उपलब्ध है।

कांग्रेस ने रखीं पांच प्रमुख मांगें

CWC बैठक में खरगे ने वोटर लिस्ट और SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं।

पहली मांग: वोटर लिस्ट में किए गए बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए। जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी दी जाए और उन्हें अपील का पर्याप्त अवसर मिले।

दूसरी मांग: राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट और उससे संबंधित जरूरी डेटा समय पर और ऐसे प्रारूप में उपलब्ध कराया जाए, जिसे आसानी से इस्तेमाल और जांचा जा सके।

तीसरी मांग: गंभीर गड़बड़ियों के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाए और इसके लिए एक निश्चित समय-सीमा तय हो।

चौथी मांग: चुनाव से जुड़े डेटा और फैसलों में पारदर्शिता बढ़ाई जाए, ताकि राजनीतिक दलों और मतदाताओं के बीच किसी तरह की सूचना संबंधी आशंका न रहे।

पांचवीं मांग: मतदाताओं का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक पात्र मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके।

SIR प्रक्रिया को लेकर क्या है विवाद?

SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा और उसमें जरूरी सुधार करना है। चुनाव आयोग ने SIR के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 से संबंधित मतदाता सेवाएं, पुराने SIR रोल में नाम खोजने और दस्तावेज जमा करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

विवाद इस बात को लेकर है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम, दस्तावेज और पुराने रिकॉर्ड का मिलान किस तरह किया जा रहा है और जिन लोगों की जानकारी में कोई अंतर पाया जाता है, उन्हें किस तरह अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलता है।

महाराष्ट्र में भी SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की गई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट रोल में किसी मतदाता का नाम नहीं होना अपने आप में अंतिम रूप से नाम हटाए जाने के बराबर नहीं है और पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा दर्ज करा सकते हैं।

कांग्रेस ने CEC और सरकार पर भी साधा निशाना

बैठक के दौरान खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी उठाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की। ये कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप और मांगें हैं; इन पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की स्थिति अलग है।

खरगे ने चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता पर जोर देते हुए कहा कि आयोग ऐसा होना चाहिए जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को भरोसा हो।

मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है?

EC-SIR विवाद के बीच मतदाताओं के लिए अपनी वोटर जानकारी की जांच करना महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर मतदाता अपना नाम, निर्वाचन क्षेत्र और वोटर लिस्ट से संबंधित जानकारी देख सकते हैं। नए मतदाता Form 6 के जरिए पंजीकरण करा सकते हैं, जबकि नाम हटाने पर आपत्ति या संबंधित प्रक्रिया के लिए अलग-अलग निर्धारित फॉर्म उपलब्ध हैं।

फिलहाल SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक और संस्थागत विवाद जारी है। कांग्रेस पारदर्शिता, डेटा उपलब्ध कराने और स्वतंत्र जांच की मांग कर रही है, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बता रहा है। ऐसे में आगे की प्रक्रिया और संबंधित आधिकारिक फैसले इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

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