Shoaib Dhebar Case: 25 करोड़ की रंगदारी मामले में जमानत खारिज, गिरफ्तारी पर 5 हजार का इनाम

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Shoaib Dhebar Case में आरोपी शोएब ढेबर को अदालत से राहत नहीं मिली है। रायपुर में कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और धमकी देने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर किए जाने की जानकारी सामने आई, जिसे भी अदालत ने स्वीकार नहीं किया।

मामला रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, एक कांग्रेस नेता को कथित तौर पर एक गैंग के नाम पर धमकी देकर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप है। मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है।

शोएब ढेबर की गिरफ्तारी पर 5 हजार रुपये का इनाम

Shoaib Dhebar Case: 25 करोड़ की रंगदारी मामले में जमानत खारिज, गिरफ्तारी पर 5 हजार का इनाम

अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब फरार आरोपी शोएब ढेबर की गिरफ्तारी के लिए रायपुर पुलिस ने 5 हजार रुपये के नकद इनाम की घोषणा की है।

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को आरोपी के ठिकाने या उसके बारे में कोई जानकारी मिलती है तो वह पुलिस को इसकी सूचना दे। पुलिस के अनुसार, सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान शोएब ढेबर, पिता अनवर ढेबर, उम्र 26 वर्ष के रूप में हुई है। वह रायपुर के पाम बेलाजियो, विधानसभा रोड, पंडरी क्षेत्र का निवासी बताया गया है।

इन धाराओं के तहत दर्ज है मामला

पुलिस के अनुसार, तेलीबांधा थाने में शोएब ढेबर के खिलाफ अपराध क्रमांक 403/2026 दर्ज है। मामले में BNS की धारा 308(4), 351(3), 351(4) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश लगातार जारी है। संभावित ठिकानों पर दबिश देने के साथ मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने जारी किए संपर्क नंबर

आरोपी के बारे में जानकारी देने के लिए रायपुर पुलिस ने कुछ संपर्क नंबर भी जारी किए हैं। नागरिक इन नंबरों पर सूचना दे सकते हैं—

  • ACP सिविल लाइंस: 94252-62002
  • तेलीबांधा थाना प्रभारी: 99074-71911
  • निरीक्षक सतीश सिंह: 94061-17235

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि आरोपी के संबंध में किसी भी तरह की विश्वसनीय जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

14 सितंबर को WhatsApp पर भेजे गए थे धमकी भरे संदेश

पुलिस के मुताबिक, मामले की शुरुआत 14 सितंबर 2026 को हुई। शिकायतकर्ता आनंदमल कुकरेजा के मोबाइल फोन पर एक विदेशी नंबर से WhatsApp के जरिए कथित तौर पर धमकी भरे संदेश भेजे गए थे।

शिकायत के अनुसार, संदेश भेजने वाले ने खुद को कथित तौर पर अमन साहू गैंग से जुड़ा हुआ बताया और 25 करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की। आरोप है कि धमकी के दौरान शिकायतकर्ता, उसके बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों को जान से मारने की धमकी भी दी गई।

शिकायत मिलने के बाद तेलीबांधा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

तकनीकी साक्ष्यों से जांच आगे बढ़ी

Shoaib Dhebar Case की जांच तेलीबांधा पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACC&U) की टीम ने संयुक्त रूप से की। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई।

पुलिस के अनुसार, 27 सितंबर को शोएब ढेबर को पकड़े जाने की बात कही गई थी। उसके कब्जे से मामले से संबंधित बताए गए पांच iPhone भी जब्त किए गए। इन मोबाइल फोन की कुल कीमत करीब 5 लाख रुपये बताई गई है।

इसके बाद आरोपी को रिमांड कोर्ट के सामने पेश किया गया था। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान पुलिस ने अदालत से दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति मांगी थी।

28 सितंबर को पुलिस की अर्जी स्वीकार

पुलिस के मुताबिक, 28 सितंबर को अदालत ने पुलिस की अर्जी स्वीकार कर ली थी। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी। अब जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत नहीं मिलने के बाद आरोपी को कानूनी राहत नहीं मिली है।

पुलिस फिलहाल मामले में आरोपी की तलाश के साथ-साथ धमकी और रंगदारी प्रकरण से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित धमकी और रंगदारी की मांग के पीछे अन्य कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

Shoaib Dhebar Case में जमानत याचिका खारिज होने और गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किए जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है। पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश देने के साथ तकनीकी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप और जांच में सामने आए तथ्य ही उपलब्ध हैं। आरोपी पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। किसी व्यक्ति को अदालत के अंतिम निर्णय से पहले दोषी नहीं माना जा सकता।

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