Seva Sankalp Camp बस्तर में नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों से प्रभावित लोगों के लिए मदद और पुनर्वास की नई उम्मीद लेकर आया। जगदलपुर में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में प्रभावित ग्रामीणों और दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग के साथ कई तरह के सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए।
शिविर में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब कृत्रिम हाथ मिलने के बाद एक हितग्राही ने उसी हाथ से पानी की बोतल उठाकर पानी पिया। लंबे समय बाद सामान्य काम कर पाने की खुशी उसके चेहरे पर दिखाई दी। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पल को आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास लौटाने वाली पहल बताया।
नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों की वजह से अपने हाथ-पैर गंवा चुके बस्तर के लोगों के लिए सेवा संकल्प शिविर नई उम्मीद लेकर आया। जगदलपुर में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में प्रभावित ग्रामीणों और दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए। कृत्रिम हाथ मिलने के बाद एक हितग्राही ने उसी हाथ से पानी की बोतल उठाकर पानी पिया। यह भावुक पल देखकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इसे जिंदगी बदलने वाली पहल बताया।
शिविर में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहा है। अब क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास का माहौल तैयार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य प्रभावित नागरिकों को सुरक्षा के साथ-साथ पुनर्वास, रोजगार और बेहतर जीवन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है।
कृत्रिम हाथ से पानी की बोतल उठाई, लौट आया आत्मविश्वास

सेवा संकल्प शिविर में कृत्रिम अंग मिलने के बाद हितग्राही ने खुद पानी की बोतल उठाकर पानी पिया। यह दृश्य शिविर में मौजूद लोगों के लिए भावुक करने वाला रहा।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि किसी व्यक्ति को दोबारा अपने रोजमर्रा के काम करने में सक्षम बनाना केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि उसके आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
नक्सली हिंसा या आईईडी विस्फोटों के कारण अंग गंवाने वाले लोगों के लिए कृत्रिम अंग रोजमर्रा की जिंदगी में वापस लौटने का महत्वपूर्ण साधन बन सकते हैं।
नक्सल हिंसा प्रभावितों को मुफ्त कृत्रिम अंग और उपकरण

तीन दिवसीय Seva Sankalp Camp का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को एक ही स्थान पर सरकारी योजनाओं और विभिन्न विभागों की सुविधाओं से जोड़ना है। शिविर में नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों से प्रभावित नागरिकों के साथ दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर लंबे समय तक माओवादी हिंसा से प्रभावित रहा है। अब क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास का वातावरण तैयार करने के साथ प्रभावित नागरिकों के पुनर्वास और बेहतर जीवन के लिए भी काम किया जा रहा है।
सरकार की कोशिश है कि हिंसा से प्रभावित परिवारों और नागरिकों को केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित मदद न मिले, बल्कि उन्हें रोजगार, पुनर्वास और जरूरी सरकारी सुविधाओं से भी जोड़ा जाए।
5 लोगों को ₹6.50 लाख की आर्थिक सहायता
शिविर के दौरान विभिन्न विभागों ने पात्र हितग्राहियों को अलग-अलग योजनाओं का लाभ दिया। राजस्व विभाग की ओर से आपदा प्रबंधन के तहत पांच बाढ़ प्रभावित लोगों को कुल ₹6 लाख 50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
इसके अलावा 35 हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख भी वितरित किए गए। इससे पात्र लोगों को अपने अधिकारों और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज हासिल करने में मदद मिली।
श्रम विभाग की ओर से मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत एक हितग्राही को ₹20 हजार की सहायता दी गई। वहीं, मुख्यमंत्री मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के तहत एक पात्र व्यक्ति को ₹1 लाख की आर्थिक मदद प्रदान की गई।
किसानों और मछुआरों को भी मिला योजनाओं का लाभ

सेवा संकल्प शिविर में कृषि और मत्स्य पालन विभाग ने भी हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ा। कृषि विभाग ने पांच किसानों को फसल बीमा प्रमाण पत्र वितरित किए।
वहीं, मत्स्य पालन विभाग की ओर से तीन मत्स्य पालकों को मछली पकड़ने के जाल उपलब्ध कराए गए। इससे स्थानीय स्तर पर आजीविका से जुड़े लोगों को अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से वरिष्ठ नागरिकों के लिए वय वंदन कार्ड और पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। शिविर में 12 नागरिकों के आधार विवरण में जरूरी सुधार और अपडेट भी किए गए।
जन्म एवं मृत्यु पंजीयन से जुड़े आवेदन भी मौके पर स्वीकार किए गए।
सांसद महेश कश्यप ने गिनाईं बस्तर में विकास की उपलब्धियां
बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों का असर अब बस्तर के दूरदराज इलाकों में भी दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उग्रवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, मुफ्त राशन, पक्के आवास और शौचालय जैसी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने का प्रयास जारी है।
एक ही जगह मिल रहीं कई सरकारी सेवाएं
Seva Sankalp Camp की एक खास बात यह रही कि लोगों को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। एक ही परिसर में कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे और पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया गया।
शिविर में नागरिकों की समस्याएं सुनी गईं और जरूरी दस्तावेजों तथा सेवाओं से जुड़े काम मौके पर किए गए। इससे खासकर दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान हुई।
बस्तर में विकास के साथ पुनर्वास पर जोर
बस्तर में नक्सली हिंसा का सामना कर चुके लोगों के लिए पुनर्वास और आत्मनिर्भरता बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने जैसी पहल प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद कर सकती है।
कृत्रिम हाथ मिलने के बाद पानी की बोतल उठाकर पानी पीने वाले हितग्राही का दृश्य इसी बदलाव का उदाहरण बना। Seva Sankalp Camp के जरिए सरकार ने नक्सल हिंसा प्रभावित नागरिकों को सहायता, पुनर्वास और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया।
शिविर में आर्थिक सहायता से लेकर स्वास्थ्य, कृषि, मत्स्य पालन और दस्तावेज संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इससे बस्तर में सुरक्षा के साथ विकास और प्रभावित लोगों के पुनर्वास को आगे बढ़ाने की कोशिश दिखाई दी।