Raipur News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गांजा तस्करी के कथित नए तरीके का मामला सामने आया है। एक मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में सोशल मीडिया के जरिए ओडिशा का गांजा रायपुर में उपलब्ध कराने और घर तक पहुंचाने का दावा सामने आया है। स्टिंग के दौरान कथित सप्लायर से हुई बातचीत में रायपुर डिलीवरी के लिए 15 हजार रुपये प्रति किलो तक कीमत बताए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, यह पूरा मामला स्टिंग में सामने आए दावों और बातचीत पर आधारित है। इससे किसी वास्तविक गांजा आपूर्ति या संबंधित व्यक्ति की आपराधिक भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।
Instagram पर ‘ओडिशा साग’ के नाम से विज्ञापन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गांजा तस्करी के कथित नए तरीके का खुलासा हुआ है। पुलिस की सख्ती के बीच अवैध कारोबार से जुड़े लोग अब खुद ओडिशा जाकर गांजा लाने के बजाय स्थानीय स्तर पर डिलीवरी की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर गांजा उपलब्ध कराने का दावा करने वाले एक अकाउंट और उससे जुड़े व्यक्ति के साथ हुई बातचीत के आधार पर यह जानकारी सामने आई है।
बातचीत के दौरान रायपुर में गांजा पहुंचाने के लिए प्रति किलो 15 हजार रुपये तक की कीमत बताई गई। हालांकि, यह बातचीत स्टिंग में सामने आए दावों पर आधारित है; वास्तविक आपूर्ति और संबंधित व्यक्ति की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम पर ‘High Quality Odisha Saag Available in Raipur’ जैसे शब्दों के साथ एक कथित विज्ञापन सामने आया। इसमें रायपुर में घर तक सामान पहुंचाने और भुगतान से जुड़ी सुविधा का दावा किया गया था।
रिपोर्ट में इस अकाउंट को ‘रॉनी’ नाम के यूजर से जुड़ा बताया गया है। विज्ञापन में सीधे गांजा शब्द का इस्तेमाल करने के बजाय ‘साग’ जैसे शब्दों और हरी पत्तियों के संदर्भ का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया।
सोशल मीडिया पर इस तरह के कथित विज्ञापन सामने आने से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रतिबंधित मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री के प्रयासों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
WhatsApp बातचीत में ₹15 हजार किलो तक कीमत का दावा

स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिपोर्टर ने कथित सप्लायर से WhatsApp के जरिए संपर्क किया। रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत की शुरुआत में ओडिशा में करीब 10 हजार रुपये प्रति किलो कीमत बताई गई।
वहीं, रायपुर तक डिलीवरी की बात आने पर कीमत करीब 15 हजार रुपये प्रति किलो तक होने का दावा किया गया। नियमित तौर पर खरीदारी करने पर कम कीमत की संभावना को लेकर भी बातचीत हुई, लेकिन पहली डील के लिए कथित सप्लायर ने 15 हजार रुपये का भाव बताया।
रिपोर्ट के मुताबिक, कीमत को लेकर बातचीत करने वाला व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से जानकारी लेने की बात भी कर रहा था। इससे स्टिंग में उसके बिचौलिए की भूमिका होने का दावा किया गया है।
कुरियर और ऑनलाइन भुगतान का भी दावा

स्टिंग रिपोर्ट में कथित सप्लायर के साथ बातचीत के दौरान कुरियर के जरिए सामान भेजने, ऑनलाइन अग्रिम भुगतान और डिलीवरी के बाद भुगतान जैसे विकल्पों का भी जिक्र होने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन बातचीतों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वास्तव में किसी ग्राहक को गांजा भेजा गया या कोई डिलीवरी हुई थी। इसके लिए पुलिस जांच और स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होगी।
पुलिस की सख्ती के बाद तरीका बदलने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, रायपुर में गांजा तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई बढ़ने के बाद तस्करी से जुड़े लोग कथित तौर पर अपना तरीका बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के हवाले से बताया गया है कि पुलिस ओडिशा से गांजा लाने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दबाव के बीच कुरियर या दूसरे माध्यमों से मादक पदार्थों की सप्लाई की कोशिश भी की जा सकती है।
पुलिस की ओर से कथित सप्लाई नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों पर नजर रखने की बात कही गई है।
सोशल मीडिया के जरिए नशे के कारोबार पर सवाल
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित मादक पदार्थों की कथित बिक्री और डिलीवरी के दावों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर कोडवर्ड के जरिए विज्ञापन, WhatsApp पर बातचीत और डिजिटल भुगतान जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने के दावे सामने आने के बाद ऐसे मामलों की डिजिटल जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुलिस के लिए सोशल मीडिया अकाउंट, चैट रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े विवरण और संभावित सप्लाई नेटवर्क की जांच मामले की वास्तविकता सामने लाने में अहम हो सकती है।
स्टिंग के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी
Raipur News से जुड़े इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल सामने आई जानकारी मीडिया स्टिंग और कथित बातचीत पर आधारित है। किसी व्यक्ति या अकाउंट को वास्तविक गांजा तस्करी में शामिल बताने के लिए पुलिस जांच, बरामदगी और अन्य स्वतंत्र सबूत जरूरी होंगे।
फिलहाल मामला सोशल मीडिया के जरिए रायपुर में गांजा उपलब्ध कराने के दावे तक सीमित है। यदि जांच में प्रतिबंधित मादक पदार्थ की वास्तविक सप्लाई या नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।