Surajpur Double Murder Case: सूरजपुर डबल मर्डर में कुलदीप साहू समेत 3 को फांसी, चौथे दोषी को उम्रकैद

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Surajpur Double Murder Case में अदालत ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और नाबालिग बेटी की नृशंस हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। दोषी कुलदीप साहू समेत तीन आरोपितों को मृत्युदंड यानी फांसी की सजा दी गई है, जबकि चौथे दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

मामले की सुनवाई न्यायाधीश आनंद प्रकाश वरियाल की अदालत में हुई। अदालत ने अपराध की गंभीरता और वारदात को अंजाम देने के तरीके को बेहद क्रूर और सुनियोजित माना। इस प्रकरण में दो अन्य आरोपितों को साक्ष्यों के अभाव में पहले ही दोषमुक्त किया जा चुका था।

13 अक्टूबर 2024 को शुरू हुआ था घटनाक्रम

अभियोजन के अनुसार, मुख्य दोषी कुलदीप साहू और प्रधान आरक्षक तालिब शेख के बीच पुराना विवाद था। इसी विवाद के चलते 13 अक्टूबर 2024 को सूरजपुर बस स्टैंड के पास कुलदीप साहू ने एक पुलिसकर्मी पर कथित तौर पर खौलता हुआ तेल फेंक दिया था।

इसके बाद जब पुलिसकर्मी उसे पकड़ने पहुंचे, तो उसने चार पहिया वाहन से उन्हें कुचलने का प्रयास किया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इसके बाद कुलदीप साहू अपने तीन अन्य साथियों के साथ प्रधान आरक्षक के घर में घुस गया।

यहीं से यह मामला एक गंभीर आपराधिक वारदात में बदल गया। घर में मौजूद प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी नाबालिग बेटी को निशाना बनाया गया। वारदात के समय प्रधान आरक्षक घर पर मौजूद नहीं थे।

महिला के साथ दुष्कर्म और मां-बेटी की हत्या

Surajpur Double Murder Case: सूरजपुर डबल मर्डर में कुलदीप साहू समेत 3 को फांसी, चौथे दोषी को उम्रकैद

अभियोजन पक्ष के अनुसार, चारों दोषियों ने प्रधान आरक्षक की पत्नी के साथ दुष्कर्म किया और फिर मां-बेटी की धारदार हथियार से हत्या कर दी। मामले की गंभीरता का अंदाजा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों से लगाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान आरक्षक की पत्नी के शरीर पर धारदार हथियार से 37 वार के निशान मिले थे, जबकि उनकी नाबालिग बेटी के शरीर पर 28 वार के निशान दर्ज किए गए। इन तथ्यों को मामले की सुनवाई के दौरान अहम साक्ष्य के रूप में देखा गया।

हत्या के बाद दोनों के शव घटनास्थल से दूर पीढ़ा गांव में फेंक दिए गए थे। इस वारदात ने सूरजपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

अदालत ने अपराध को माना बेहद क्रूर

Surajpur Double Murder Case में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 28 सितंबर को चार आरोपितों को दोषी ठहराया था। इसके बाद सजा सुनाते हुए तीन दोषियों को मृत्युदंड और चौथे को आजीवन कारावास दिया गया।

अदालत की टिप्पणी के अनुसार, अपराध अत्यंत क्रूर और सुनियोजित तरीके से किया गया था। मामले में सामने आए घटनाक्रम, मेडिकल साक्ष्य और अन्य सबूतों को दोषसिद्धि के आधार के रूप में देखा गया।

मृत्युदंड सबसे कठोर दंड है। इस तरह की सजा के मामलों में लागू कानूनी प्रक्रिया और अपील से जुड़े प्रावधान भी महत्वपूर्ण होते हैं।

दो आरोपित साक्ष्य के अभाव में हुए दोषमुक्त

इस मामले में कुल छह आरोपितों के नाम सामने आए थे। इनमें से दो को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण पहले ही दोषमुक्त कर दिया गया था। शेष चार को अदालत ने दोषी माना, जिनमें से तीन को फांसी और एक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

इस फैसले के साथ मामले में दोषी ठहराए गए चारों लोगों की सजा भी स्पष्ट हो गई है। हालांकि, आगे की कानूनी प्रक्रिया में अपील और अन्य न्यायिक प्रावधानों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

सूरजपुर हत्याकांड ने झकझोर दिया था प्रदेश को

प्रधान आरक्षक की पत्नी और बेटी की हत्या की घटना अपनी क्रूरता के कारण प्रदेशभर में चर्चा का विषय बनी थी। पुलिसकर्मी से विवाद के बाद उसके परिवार को निशाना बनाए जाने और हत्या के बाद शवों को दूर ले जाकर फेंकने की बात ने मामले को और गंभीर बना दिया था।

अब अदालत के फैसले में तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक को आजीवन कारावास सुनाए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।

Surajpur Double Murder Case में अदालत का फैसला अपराध की गंभीरता को रेखांकित करता है। मामले में दो आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया, जबकि चार दोषियों को अलग-अलग सजाएं सुनाई गईं। आगे की कानूनी प्रक्रिया से यह तय होगा कि फैसले के बाद मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।

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