Shardiya Navratri 2026 Ghatasthapana Vidhi: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ पूजा की शुरुआत करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश स्थापना को शुभता, सुख-समृद्धि और मंगल कार्यों का प्रतीक माना जाता है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से हो रही है। पहले दिन घरों और मंदिरों में भक्त विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान करेंगे। ऐसे में आइए जानते हैं कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री, पूजा की विधि और इससे जुड़े प्रमुख मंत्र।
कैसी होनी चाहिए माता भगवती की तस्वीर ?

धार्मिक मान्यता के अनुसार घर में माता भगवती की ऐसी तस्वीर लगाना शुभ माना जाता है, जिसमें माता का स्वरूप शांत, सौम्य और आशीर्वाद प्रदान करने वाला हो। मां दुर्गा को सिंह पर सवार दिखाने वाली तस्वीर विशेष रूप से लोकप्रिय है। माता का चेहरा प्रसन्न और तेजस्वी हो तथा उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र के साथ आशीर्वाद देने की मुद्रा दिखाई दे, तो इसे शुभ प्रतीक माना जाता है।
ऐसी तस्वीर भी लगाई जा सकती है जिसमें माता के पीछे सुंदर और स्वच्छ प्राकृतिक दृश्य हो। धार्मिक दृष्टि से मां दुर्गा का सिंह पर विराजमान स्वरूप साहस, शक्ति और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। वहीं माता के शांत चेहरे को करुणा और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है।
कलश स्थापना का क्या है धार्मिक महत्व?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में कलश को पवित्रता, समृद्धि और देवताओं के आह्वान का प्रतीक माना जाता है। घटस्थापना के दौरान कलश में जल भरकर उसमें देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा की पूजा और नवरात्रि के संकल्प के साथ अनुष्ठान शुरू किया जाता है।
कई परंपराओं में कलश को भगवान गणेश से भी जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि गणेशजी को विघ्नहर्ता माना जाता है। हालांकि, कलश स्थापना की विधि और मंत्र क्षेत्रीय परंपराओं तथा पूजा पद्धति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
कलश स्थापना से पहले क्या तैयारी करें?
घटस्थापना से पहले पूजा स्थल और आवश्यक सामग्री तैयार कर लेना अच्छा रहता है। पूजा की शुरुआत स्वच्छता और संकल्प के साथ की जाती है।
कलश स्थापना के लिए सामान्यतः इन चीजों की जरूरत होती है:
- मिट्टी और साफ मिट्टी का पात्र
- जल से भरा कलश
- जौ या सप्तधान्य
- मौली या कलावा
- रोली, चंदन और अक्षत
- फूल और पुष्पमाला
- सुपारी और सिक्का
- आम या अशोक के पत्ते, परंपरा के अनुसार
- नारियल और लाल कपड़ा
- फल, पान और पूजा में उपयोग होने वाली अन्य सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा सामग्री को व्यवस्थित रखें।
शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना की विधि
1. पूजा स्थल की सफाई करें
सबसे पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। परंपरा के अनुसार, पूजा की जगह पर गंगाजल या स्वच्छ जल का छिड़काव किया जा सकता है। इसके बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा के लिए बैठें।
2. मिट्टी का पात्र तैयार करें
जिस स्थान पर कलश स्थापित करना है, वहां मिट्टी या रेत की परत बिछाएं। उसमें जौ बोएं। नवरात्रि के दौरान जौ के अंकुरित होने को कई धार्मिक परंपराओं में शुभ संकेत माना जाता है।
3. कलश को सजाएं
कलश पर रोली या चंदन से स्वस्तिक बनाएं और उसके गले में मौली बांधें। इसके बाद कलश को तैयार मिट्टी के पात्र में स्थापित करें। पूजा परंपरा के अनुसार कलश में स्वच्छ जल भरें।
4. कलश में पूजा सामग्री रखें
परंपरा के अनुसार, कलश के जल में सुपारी, सिक्का और अन्य निर्धारित पूजन सामग्री डाली जा सकती है। इसके बाद कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें। कुछ पूजा पद्धतियों में कलश के ऊपर अक्षत से भरा पात्र रखकर उस पर लाल कपड़े में लिपटा नारियल स्थापित किया जाता है।
5. वरुण देव का आह्वान करें
कलश में जल भरते समय वरुण देव का स्मरण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे कलश पूजन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। कलश स्थापना के दौरान अपनी परंपरा के अनुसार मंत्रों का उच्चारण करें।
6. मां दुर्गा की पूजा का संकल्प लें
कलश स्थापित करने के बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर नवरात्रि पूजा का संकल्प करें। मन में मां दुर्गा का ध्यान करते हुए अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करें। इसके बाद गणेशजी और मां दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं की पूजा करें।
कलश स्थापना के प्रमुख मंत्र
घटस्थापना के दौरान अलग-अलग पूजा पद्धतियों में विभिन्न वैदिक मंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। यहां कुछ प्रचलित मंत्र दिए गए हैं।
1. पूजा से पहले शुद्धिकरण मंत्र
“ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥”
इस मंत्र का पाठ पूजा से पहले शुद्धिकरण की भावना से किया जाता है।
2. कलश में वरुण देव का आह्वान
“ॐ अपां पतये वरुणाय नमः।”
कलश में जल स्थापित करने के बाद वरुण देव को नमन करते हुए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।
3. धान्य या जौ स्थापना मंत्र
“ॐ धान्यमसि धिनुहि देवान्…”
जौ और धान्य की स्थापना के समय वैदिक पूजा पद्धति में धान्य से संबंधित मंत्रों का पाठ किया जाता है। पूर्ण मंत्र के उच्चारण के लिए प्रमाणित पूजा-पुस्तक या योग्य पुरोहित की सहायता लें।
4. कलश स्थापना के बाद प्रार्थना
कलश स्थापित करने के बाद भक्त मां दुर्गा और भगवान गणेश का ध्यान कर सकते हैं। अपनी पूजा परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं का आह्वान करें और पूजा निर्विघ्न पूरी होने की प्रार्थना करें।
कलश स्थापना के बाद कैसे करें मां दुर्गा की पूजा?
कलश स्थापना पूरी होने के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन और फल अर्पित करें। इसके बाद दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या अपनी परंपरा के अनुसार निर्धारित स्तोत्रों का पाठ किया जा सकता है।
नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिन उपवास करते हैं, जबकि कुछ पहले और आखिरी दिन व्रत रखते हैं। व्रत और पूजा के नियम परिवार तथा क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।
घटस्थापना के समय इन बातों का रखें ध्यान
- कलश स्थापना के लिए स्थानीय पंचांग में दिया गया शुभ मुहूर्त देखें।
- पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और सामग्री पहले से तैयार कर लें।
- कलश को ऐसी जगह रखें, जहां पूजा के दौरान उसे बार-बार हटाना न पड़े।
- मंत्रों का उच्चारण श्रद्धा से करें। किसी मंत्र के पूरे पाठ को लेकर संदेह हो तो प्रमाणित पूजा-पुस्तक या पुरोहित की सहायता लें।
- पूजा की विधि परिवार की परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार अपनाएं।
तस्वीर लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
वास्तु की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार पूजा स्थल को घर का पवित्र और स्वच्छ स्थान माना जाता है। माता भगवती की तस्वीर को साफ-सुथरे पूजा स्थान पर रखना चाहिए। तस्वीर के आसपास अनावश्यक सामान, टूटे हुए पूजा-पात्र या गंदगी नहीं होनी चाहिए।
दिशा का रखें ध्यान
वास्तु मान्यताओं में देवी-देवताओं की तस्वीर के लिए घर की पूर्व या उत्तर दिशा को शुभ माना गया है।शुभ फलों में वृद्धि के लिए देवी दुर्गा की तस्वीर पूर्व या दक्षिण-पूर्व में लगा सकते हैं।
किन तस्वीरों से बचना चाहिए ?
परंपरागत मान्यता के अनुसार घर के पूजा स्थल पर माता भगवती की बहुत उग्र या युद्ध के भयावह दृश्य वाली तस्वीर लगाने से बचना चाहिए। इसी तरह फटी, टूटी या क्षतिग्रस्त तस्वीर को पूजा स्थान पर नहीं रखना चाहिए। यदि तस्वीर पुरानी होकर खराब हो गई हो तो उसे सम्मानपूर्वक बदल देना उचित माना जाता है।
माता रानी की कृपा केवल तस्वीर के स्वरूप या दिशा पर निर्भर मानी जाए, ऐसा आवश्यक नहीं है। सनातन परंपरा में श्रद्धा, भक्ति, सदाचार और निष्ठापूर्वक पूजा को विशेष महत्व दिया गया है। नवरात्रि में माता की तस्वीर के सामने दीपक जलाएं, स्वच्छता रखें, दुर्गा सप्तशती या दुर्गा मंत्रों का पाठ करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार कन्या पूजन तथा सेवा करें।
नवरात्रि 2026 में शुभ मुहूर्त क्यों है महत्वपूर्ण?

घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि, सही समय शहर, स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए 11 अक्टूबर 2026 को कलश स्थापना करने से पहले अपने शहर के विश्वसनीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त की पुष्टि जरूर करें।
Shardiya Navratri 2026 Ghatasthapana Vidhi के अनुसार, कलश स्थापना नवरात्रि पूजा की शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वच्छता, संकल्प, कलश पूजन और मां दुर्गा की आराधना के साथ भक्त इन नौ दिनों में सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।