Chhattisgarh Custom Milling Scam मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। 140 करोड़ रुपये के कथित कस्टम मिलिंग घोटाले से जुड़े इस मामले में गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने पूछताछ के लिए रामगोपाल अग्रवाल को 13 अक्टूबर तक ED की रिमांड पर भेज दिया है।
जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तारी से पहले जांच एजेंसी ने रायपुर जेल में उनसे लगातार तीन दिनों तक पूछताछ की थी। इसके बाद आगे की जांच के लिए उन्हें हिरासत में लिया गया। ED इस मामले में वर्ष 2024 में ही अदालत में आरोप-पत्र दाखिल कर चुकी है, लेकिन रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ नहीं हो सकी थी।
क्या है 140 करोड़ रुपये का कस्टम मिलिंग घोटाला?

Chhattisgarh Custom Milling Scam का संबंध खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में धान की कस्टम मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि से है। कस्टम मिलिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें मिलर्स सरकार या संबंधित एजेंसियों से प्राप्त धान को चावल में बदलते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान कस्टम मिलिंग की प्रोत्साहन राशि 40 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई थी। जांच में आरोप लगाया गया कि इस व्यवस्था के तहत मिल मालिकों से दो किस्तों में 20-20 रुपये प्रति क्विंटल की राशि ली गई।
जांच एजेंसी इस कथित लेन-देन और उससे जुड़ी रकम के प्रवाह की पड़ताल कर रही है। मामले में सामने आए आरोपों के आधार पर यह जांच की जा रही है कि कथित रूप से जुटाई गई रकम कहां इस्तेमाल हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
रामगोपाल अग्रवाल पर पार्टी फंड जुटाने का आरोप

ED की जांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल पर कथित घोटाले से प्राप्त रकम कांग्रेस के पार्टी फंड के लिए जुटाने का आरोप है। हालांकि, यह आरोप जांच का हिस्सा है और इसे अदालत में साबित होना बाकी है।
रामगोपाल अग्रवाल छत्तीसगढ़ कांग्रेस में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी गिरफ्तारी से राज्य में कस्टम मिलिंग घोटाले को लेकर राजनीतिक चर्चा फिर तेज हो सकती है।
जांच एजेंसी अब रिमांड के दौरान उनसे कथित लेन-देन, संबंधित लोगों और रकम के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पूछ सकती है। पूछताछ में क्या जानकारी सामने आती है, यह आगे की जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों से स्पष्ट होगा।
2024 में दाखिल हो चुका है आरोप-पत्र
इस मामले में ED वर्ष 2024 में ही अदालत में आरोप-पत्र दाखिल कर चुकी है। इसके बावजूद रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ नहीं हो पाने के कारण जांच एजेंसी को उनसे जानकारी जुटाने की जरूरत थी।
रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले रायपुर जेल में तीन दिनों तक पूछताछ की गई। इसके बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश कर रिमांड मांगी गई। अदालत ने उन्हें 13 अक्टूबर तक ED की हिरासत में रखने की अनुमति दी है।
रिमांड के दौरान जांच एजेंसी कथित घोटाले की प्रक्रिया, धन के लेन-देन और अन्य संबंधित पहलुओं पर पूछताछ कर सकती है। हालांकि, पूछताछ के नतीजों और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर अंतिम स्थिति जांच एजेंसी तथा अदालत की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।
शराब घोटाला मामले में भी आरोपित हैं रामगोपाल अग्रवाल

कस्टम मिलिंग घोटाले के अलावा रामगोपाल अग्रवाल छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में भी आरोपित हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को इस मामले में भी जांच एजेंसी ने आरोप-पत्र पेश किया।
शराब घोटाले से संबंधित मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को निर्धारित की गई है। दोनों मामलों की जांच और न्यायिक कार्यवाही अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ेंगी।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
Chhattisgarh Custom Milling Scam में अब ED की पूछताछ और अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसी कथित तौर पर जुटाई गई रकम, उसके इस्तेमाल और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश करेगी।
फिलहाल विशेष अदालत ने रामगोपाल अग्रवाल को 13 अक्टूबर तक ED रिमांड पर भेजा है। दूसरी ओर, शराब घोटाले से जुड़े मामले में अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।
इस पूरे मामले में आरोपों और जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर समझना जरूरी है। गिरफ्तारी या आरोप-पत्र अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के फैसले के आधार पर ही तय होगा।