Charandas Mahant on Congress Infighting: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक कमजोरी और आपसी मतभेदों को लेकर बहस तेज हो गई है। विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पार्टी की हार के कारणों पर अपनी बात रखते हुए गुटबाजी को बड़ी कमजोरी बताया है। उनके बयान को प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के लिए आत्ममंथन का संदेश माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 में हुए थे। इन चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि चुनाव के समय सभी लोग बंटे थे जिस कारण से चुनाव में हार हुई थी।
महंत के मुताबिक, चुनाव के दौरान पार्टी के सभी नेता एकजुट नहीं थे। अलग-अलग गुटों में बंटने और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के कारण संगठन को नुकसान पहुंचा। उनके बयान ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एकता और नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को चर्चा में ला दिया है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हार की वजह मुख्य रूप से एक नहीं थी। सभी अलग-अलग बंटे हुए थे। तभी चुनाव में हार हुई है। कोशिश यही थी कि सभी वर्गों के लिए काम किए जाए और आदिवासियों को उनका हक दिया जाए। लेकिन पार्टी के अंदर कौन आ गया और हमारे बीच क्या कमजोरी पैदा हो गई? साथ ही सब बड़े-बड़े सपने भी देखने लगे। सभी एक नहीं थे। सब अलग-अलग हो गए थे। यही हार की वजह बनी। साल 2023 में सभी कांग्रेसी एक नहीं थे।
‘सभी नेता एक नहीं थे, अलग-अलग हो गए थे’
डॉ. चरणदास महंत ने पार्टी के भीतर एकजुटता की कमी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता एक साथ खड़े होने के बजाय अलग-अलग समूहों में बंट गए थे। इसका असर चुनावी माहौल और जनता के बीच पार्टी की छवि पर पड़ा।
महंत के बयान का आशय है कि जब पार्टी के नेता आपसी तालमेल बनाने के बजाय अपने-अपने राजनीतिक भविष्य और महत्वाकांक्षाओं पर ध्यान देने लगते हैं, तो संगठन कमजोर होता है। चुनाव में जीत के लिए केवल मजबूत मुद्दे या जनसमर्थन ही पर्याप्त नहीं होते, बल्कि नेताओं के बीच समन्वय और साझा रणनीति भी जरूरी होती है।
बड़े-बड़े सपने और आपसी खींचतान बनी कमजोरी

महंत ने पार्टी के भीतर बढ़ती महत्वाकांक्षाओं और आपसी खींचतान की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि सभी नेता बड़े-बड़े सपने देखने लगे थे, लेकिन एकजुट होकर काम करने में कमी रह गई।
उनकी टिप्पणी को इस रूप में देखा जा रहा है कि पार्टी के भीतर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और नेतृत्व को लेकर मतभेदों ने सामूहिक चुनावी रणनीति को प्रभावित किया। हालांकि, किसी एक कारण को चुनावी हार की पूरी वजह मानने के बजाय संगठन, नेतृत्व, प्रचार और मतदाताओं के रुझान जैसे दूसरे पहलुओं का विश्लेषण भी जरूरी है।
‘आपसी मतभेद भुलाकर एक जाजम पर बैठना होगा’
डॉ. चरणदास महंत ने कांग्रेस नेताओं को आपसी मतभेद भुलाकर साथ बैठने और संगठन को मजबूत करने की नसीहत दी। उनके मुताबिक, यदि पार्टी को भविष्य में चुनावी सफलता हासिल करनी है, तो नेताओं को गुटबाजी से ऊपर उठकर साझा रणनीति बनानी होगी।
उनका संदेश साफ है कि कांग्रेस को अपनी कमजोरियों की पहचान करके संगठनात्मक स्तर पर सुधार करना होगा। पार्टी के नेताओं के बीच संवाद, जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल भविष्य की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सामने एकता की चुनौती

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में संगठन को एकजुट रखना और कार्यकर्ताओं का भरोसा मजबूत करना शामिल है। महंत के बयान के बाद यह सवाल फिर उठ रहा है कि क्या पार्टी के वरिष्ठ नेता आपसी मतभेदों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
राजनीतिक दलों में विचारों और रणनीतियों को लेकर मतभेद होना सामान्य है, लेकिन जब ये मतभेद सार्वजनिक खींचतान या अलग-अलग गुटों के रूप में सामने आते हैं, तो संगठन की छवि प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कांग्रेस के सामने चुनौती केवल हार के कारणों पर चर्चा करने की नहीं, बल्कि उन कमजोरियों को दूर करने की भी है, जिनकी ओर महंत ने इशारा किया है।
क्या गुटबाजी खत्म कर पाएगी कांग्रेस?
Charandas Mahant on Congress Infighting के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक एकता को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। महंत ने पार्टी की कमजोरी के रूप में गुटबाजी और आपसी मतभेदों को सामने रखा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदेश नेतृत्व और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता इस संदेश को किस तरह लेते हैं।
कांग्रेस के लिए आगे की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी अपने नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने, कार्यकर्ताओं को साथ जोड़ने और जनता के मुद्दों पर प्रभावी ढंग से काम करने के लिए क्या कदम उठाती है।
फिलहाल महंत के बयान ने पार्टी के भीतर आत्ममंथन की जरूरत को रेखांकित किया है। लेकिन क्या इससे गुटबाजी कम होगी और कांग्रेस दोबारा मजबूत होकर उभरेगी, इसका जवाब आने वाले समय में संगठन की कार्रवाई और चुनावी प्रदर्शन से ही मिलेगा।