Chhattisgarh Pensioners Protest: छत्तीसगढ़ में सेवानिवृत्त कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। पेंशनर्स समाज के आह्वान पर खरोरा में बड़ी संख्या में रिटायर्ड कर्मचारियों ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान पेंशनर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की।
धरने में शामिल पेंशनर्स का कहना था कि लंबे समय से उनकी कई जरूरी मांगें लंबित पड़ी हैं, जिससे उन्हें आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय और चिकित्सा सुविधा बेहद जरूरी होती है, लेकिन इन दोनों ही मामलों में उन्हें दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
पांच प्रमुख मांगों को लेकर सरकार को घेरा
धरना प्रदर्शन के दौरान पेंशनर्स समाज ने अपनी पांच सूत्रीय मांगें सरकार के सामने रखीं। इसमें पेंशन भुगतान की जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग प्रमुख रही। इसके साथ ही राहत पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई।
पेंशनर्स ने छठे वेतनमान के तहत 32 महीने और सातवें वेतनमान के अनुसार 27 महीने से लंबित एरियर के भुगतान की मांग को भी दोहराया। इसके अलावा पेंशनर्स कल्याण निधि से चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये सभी मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं और अब इन्हें जल्द हल किया जाना चाहिए।
पदाधिकारियों ने रखी अपनी बात
कार्यक्रम के दौरान पेंशनर्स समाज के कई पदाधिकारियों और वरिष्ठ सदस्यों ने मंच से अपनी समस्याएं साझा कीं। उन्होंने कहा कि पेंशनर्स को उनका वैधानिक अधिकार समय पर मिलना चाहिए। यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
धरने को संगठन के संयोजक सीताराम यादव, संरक्षक केआर वर्मा, महामंत्री अंबिका प्रसाद वर्मा और अध्यक्ष गोपाल दास पदवार सहित कई अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने सरकार से संवेदनशील रवैया अपनाने और जल्द समाधान करने की अपील की।
सौ से अधिक पेंशनर्स की भागीदारी
खरोरा में आयोजित इस प्रदर्शन में करीब 100 से अधिक पेंशनर्स शामिल हुए। सभी ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखा और एकजुटता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया, जिसमें समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
पेंशनर्स ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और जल्द ही ठोस कदम उठाएगी, ताकि उन्हें आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत मिल सके।