Naxal Leader Devji Surrender News: नक्सल संगठन को बड़ा झटका, शीर्ष माओवादी नेता देव जी ने चार साथियों संग किया सरेंडर

Spread the love

Naxal Leader Devji Surrender News: नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे सुरक्षा अभियान के बीच एक बड़ी सफलता सामने आई है। प्रतिबंधित संगठन CPI (Maoist) के शीर्ष नेता देव जी ने अपने चार साथियों के साथ तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। हैदराबाद में हुए इस घटनाक्रम को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल मोर्चे पर अब तक की बड़ी उपलब्धियों में से एक मान रही हैं। बताया जा रहा है कि कर्रेगुट्टा क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त अभियान “ऑपरेशन कगार” के दबाव के बाद संगठन का शीर्ष नेतृत्व कमजोर पड़ा और सरेंडर का फैसला लिया गया।

कौन है देव जी?

देव जी का वास्तविक नाम थिप्पिरी तिरुपति बताया जाता है। लगभग 60 वर्षीय देव जी मूल रूप से तेलंगाना के करीमनगर जिले का निवासी है। छात्र जीवन के दौरान वह रैडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ा और बाद में भूमिगत माओवादी गतिविधियों में सक्रिय हो गया। रणनीतिक समझ और संगठनात्मक कौशल के चलते वह संगठन की मिलिट्री इंटेलिजेंस विंग का प्रमुख बना और बाद में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का इंचार्ज तथा पोलित ब्यूरो सदस्य के रूप में शीर्ष नेतृत्व में शामिल हुआ। मई 2025 में शीर्ष माओवादी नेता बसवराजु के एनकाउंटर के बाद सितंबर 2025 में उसे संगठन का महासचिव बनाया गया था।

कई बड़े हमलों से जुड़ा नाम

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार देव जी उर्फ देवअन्ना, चेतन, संजीव और सुधर्शन जैसे नामों से सक्रिय रहा। उस पर झीरम घाटी कांड समेत कई बड़े एंबुश और आईईडी हमलों की रणनीति में शामिल होने का आरोप रहा है। विभिन्न राज्यों में उस पर 1 से 2 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था। जांच एजेंसियों का कहना है कि संगठन के विस्तार और नेटवर्क को मजबूत करने में उसकी अहम भूमिका थी।

‘ऑपरेशन कगार’ का असर

सूत्रों के मुताबिक कर्रेगुट्टा क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त अभियान “ऑपरेशन कगार” के बाद संगठन पर दबाव काफी बढ़ गया था। लगातार सुरक्षा कार्रवाइयों और बढ़ती घेराबंदी के चलते शीर्ष नेतृत्व ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना। इसे लाल आतंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, जिससे संगठन को रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तर पर नुकसान पहुंचा है।

सरकार का बयान

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री Vijay Sharma ने कहा कि नक्सलियों का एक बड़ा धड़ा अब ढह चुका है और सुरक्षा बलों का अभियान तेजी से जारी है। उन्होंने शेष उग्रवादियों से भी मुख्यधारा में लौटने और आत्मसमर्पण कर पुनर्वास योजना का लाभ लेने की अपील की।

31 मार्च 2026 से पहले बड़ी उपलब्धि

सुरक्षा एजेंसियां इसे 31 मार्च 2026 से पहले की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिन रही हैं। माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व के आत्मसमर्पण से नक्सली गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा और आने वाले समय में और भी कैडर हथियार डाल सकते हैं।

जरुर पढ़ें

InkLink News Agency is a fast-growing digital news agency and aggregator delivering accurate, timely, and reliable updates across India. We provide dedicated coverage for India, Chhattisgarh, and Madhya Pradesh, along with in-depth reporting across key categories including Business, Technology, Politics, Crime, Literature, and more.

 

Stay informed. Stay connected. Stay ahead with InkLink News Agency.