Om Birla No Confidence Motion: संसद के बजट सत्र के दौरान भारतीय राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर लोकसभा स्पीकर Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। सदन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और इस पर चर्चा की अनुमति भी दे दी गई है।
भारतीय संसदीय इतिहास में यह बेहद दुर्लभ घटना मानी जा रही है, क्योंकि आजादी के बाद यह केवल तीसरी बार है जब किसी लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने की मांग औपचारिक प्रस्ताव के जरिए सदन में लाई गई है। इस घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है।
विपक्ष की ओर से पेश किया गया प्रस्ताव
कांग्रेस सांसद Mohammad Jawed ने विपक्ष की ओर से यह प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया। इस प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला, जिसके बाद संसदीय नियमों के अनुसार इसे चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया गया।
इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए लोकसभा में करीब 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई बार विपक्ष को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संसद में तीखी बहस देखने को मिली। इस दौरान सदन की अध्यक्षता कर रहे सांसद Jagadambika Pal को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए।
विपक्षी नेताओं ने पूछा कि उन्हें सदन की अध्यक्षता करने के लिए किस आधार पर चुना गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पीकर कार्यालय को यह अधिकार है कि वह चेयरपर्सन पैनल में शामिल किसी भी सदस्य को सदन की कार्यवाही चलाने के लिए नामित कर सकता है।
अमित शाह और गौरव गोगोई के बीच तीखी नोकझोंक
बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi के बीच भी तीखी बहस हुई।
अमित शाह ने कहा कि लोकसभा स्पीकर का पद संवैधानिक रूप से हमेशा सक्रिय रहता है और इसे खाली नहीं माना जाता। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया।
वहीं गौरव गोगोई ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सदन में विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं दिया जाता और माइक का इस्तेमाल सत्ता पक्ष की सुविधा के अनुसार किया जाता है।
डिप्टी स्पीकर का पद खाली होने पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद के दौरान लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली होने का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस नेता K. C. Venugopal ने कहा कि सरकार ने कई वर्षों से इस पद को भरने की पहल नहीं की है।
उनका कहना था कि अगर डिप्टी स्पीकर का पद भरा होता, तो ऐसी संवैधानिक स्थिति में सदन की अध्यक्षता को लेकर कोई विवाद नहीं होता।
संवैधानिक प्रावधानों पर भी हुई चर्चा
स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत लाया गया है। नियमों के अनुसार जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा होती है, तो वह स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करते।
इस दौरान डिप्टी स्पीकर या चेयरपर्सन पैनल का कोई सदस्य सदन की कार्यवाही चलाता है। सांसद Asaduddin Owaisi ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव हो, तो उनके द्वारा नामित सदस्य को सदन की अध्यक्षता नहीं करनी चाहिए।
सरकार ने किया नियमों का बचाव
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju और भाजपा सांसद Nishikant Dubey ने संविधान और संसदीय नियमों का हवाला देते हुए सरकार का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि डिप्टी स्पीकर का पद खाली होने की स्थिति में चेयरपर्सन पैनल का कोई भी सदस्य सदन की अध्यक्षता कर सकता है और यह पूरी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है।
संसदीय इतिहास में दुर्लभ उदाहरण
भारतीय संसदीय इतिहास में स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाने के बहुत कम उदाहरण मिलते हैं। 18 दिसंबर 1954 को देश के पहले लोकसभा स्पीकर G. V. Mavalankar के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन वह मतदान में गिर गया था।
इसके बाद 1987 में भी स्पीकर की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हुए प्रस्ताव पेश किया गया था। अब Om Birla के खिलाफ लाया गया यह प्रस्ताव भी भारतीय संसदीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
