रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में करीब 1500 मीटर लंबे स्काईवॉक का निर्माण एक बार फिर तय समय सीमा से पीछे रह गया है। परियोजना को अप्रैल 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन डेडलाइन खत्म होने के बाद भी अब तक करीब 40 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। यानी परियोजना का 60 फीसदी से अधिक हिस्सा अभी निर्माणाधीन है।
टेंडर की निर्धारित अवधि भी जुलाई में समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई करने के बजाय उसे अतिरिक्त समय देने की तैयारी की जा रही है। ठेका एजेंसी ने दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का दावा किया है, लेकिन मौजूदा निर्माण गति को देखते हुए इस नई समय सीमा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कई जगह गर्डर चढ़े, लेकिन जरूरी कनेक्टिविटी अधूरी
ग्राउंड स्तर पर देखा जाए तो कचहरी चौक, आंबेडकर अस्पताल चौक और शास्त्री चौक के आसपास स्काईवॉक के गर्डर लगाए जा चुके हैं। इससे परियोजना का ढांचा कई स्थानों पर आकार लेता दिखाई दे रहा है।
हालांकि, केवल मुख्य स्ट्रक्चर तैयार होना ही परियोजना के पूरा होने का संकेत नहीं है। पैदल यात्रियों के लिए जरूरी कई कनेक्टिविटी अब भी अधूरी हैं।
कई स्थानों पर पिलर और सीढ़ियों का काम बाकी है। इसके अलावा रोटरी, लिफ्ट, एस्केलेटर और ऊपरी हिस्से की वेल्डिंग का काम भी पूरा नहीं हुआ है।
कलेक्टोरेट और कोर्ट जाने वाले एग्जिट भी अधूरे
स्काईवॉक के तीन एग्जिट प्वाइंट, जो कलेक्टोरेट और जिला कोर्ट की तरफ जाते हैं, अभी तैयार नहीं हुए हैं।
डीकेएस अस्पताल और आंबेडकर अस्पताल को जोड़ने वाला हिस्सा भी बंद है। जयस्तंभ चौक, शहीद स्मारक और तहसील कार्यालय की तरफ की कनेक्टिविटी का काम भी पूरा होना बाकी है।
इसका मतलब है कि कई जगहों पर स्काईवॉक का ढांचा नजर आने लगा है, लेकिन यात्रियों को एक छोर से दूसरे छोर तक सुरक्षित और सुगम तरीके से पहुंचाने वाला पूरा नेटवर्क अभी तैयार नहीं हुआ है।
निर्माण में देरी की वजह ट्रैफिक का दबाव
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार शहर के व्यस्त इलाकों में निर्माण कार्य चलने के कारण काम प्रभावित हुआ है। सड़क पर भारी ट्रैफिक और सीमित कार्यक्षेत्र को निर्माण में देरी की वजह बताया जा रहा है।
हालांकि, परियोजना की योजना और निर्माण अवधि पहले से तय थी। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि व्यस्त सड़कों और ट्रैफिक की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मैनपावर और बेहतर कार्ययोजना पहले से क्यों नहीं बनाई गई।
स्काईवॉक को लेकर उठ रहे 5 बड़े सवाल
1. अप्रैल की डेडलाइन क्यों टूटी?
परियोजना को अप्रैल 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन डेडलाइन बीतने के बाद भी 60 फीसदी से ज्यादा काम बाकी है।
2. पूरी कनेक्टिविटी कब मिलेगी?
कई जगह गर्डर लगाए जा चुके हैं, लेकिन सीढ़ियां, लिफ्ट, एस्केलेटर और एग्जिट प्वाइंट अब भी अधूरे हैं।
3. पर्याप्त मैनपावर क्यों नहीं लगाया गया?
निर्माण की रफ्तार धीमी रहने के बावजूद काम तेजी से पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन लगाए गए या नहीं, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
4. कार्रवाई की जगह एक्सटेंशन क्यों?
टेंडर की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद निर्माण एजेंसी को अतिरिक्त समय देने की तैयारी की जा रही है।
5. दिसंबर 2026 की डेडलाइन कितनी पक्की है?
एजेंसी ने दिसंबर तक काम पूरा करने का दावा किया है, लेकिन नई समय सीमा पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।
77 करोड़ रुपये तक पहुंची परियोजना की लागत
स्काईवॉक की लंबाई करीब 1500 मीटर है और परियोजना की कुल लागत लगभग 77 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार ने परियोजना को मूल डिजाइन के अनुसार पूरा करने का निर्णय लिया था। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने 37.75 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की थी।
इसके बाद परियोजना की कुल लागत करीब 77 करोड़ रुपये हो गई। 21 मई 2025 को निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया गया और PSA कंस्ट्रक्शन को अप्रैल 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था।
लेकिन निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी परियोजना सिर्फ करीब 40 फीसदी ही पूरी हो सकी है।
पुराने स्ट्रक्चर से भी सुरक्षा का सवाल
निर्माण स्थल पर कुछ पुराने स्ट्रक्चर अब तक हटाए नहीं गए हैं। कुछ जगह इनके हिस्से लटके हुए दिखाई देते हैं। ऐसे में तेज हवा या अन्य परिस्थितियों में इनके गिरने की आशंका को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं।
नई संरचना के निर्माण के साथ पुराने और अनुपयोगी हिस्सों को हटाकर निर्माण स्थल को सुरक्षित करना भी जरूरी माना जा रहा है।
PWD की हाईलेवल मीटिंग में होगा एक्सटेंशन पर फैसला
ब्रिज संभाग, रायपुर के ईई बीके गोठी के मुताबिक स्काईवॉक को लेकर बैठक हो चुकी है। निर्माण एजेंसी ने दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने की बात कही है, जबकि टेंडर की निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी है।
अब एजेंसी को एक्सटेंशन देने और आगे की कार्ययोजना को लेकर उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
विधायक राजेश मूणत ने अधिकारियों से मांगा जवाब
रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने स्काईवॉक की धीमी प्रगति को लेकर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और ठेका एजेंसी के साथ बैठक की। बैठक में ईएनसी और ब्रिज विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
मूणत ने सवाल उठाया कि निर्धारित समय सीमा गुजरने के बावजूद परियोजना अधूरी क्यों है। ठेकेदार की ओर से मैनपावर की कमी और बारिश को निर्माण में देरी की वजह बताया गया।
विधायक ने अधिकारियों को उच्चस्तरीय समीक्षा के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल नई डेडलाइन तय करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि निर्धारित समय में काम क्यों पूरा नहीं हुआ और देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी है।
फिलहाल रायपुर का यह महत्वपूर्ण स्काईवॉक प्रोजेक्ट अधूरी कनेक्टिविटी, धीमी निर्माण गति और लगातार बढ़ती समय सीमा के कारण सवालों के घेरे में है। अब नजर इस बात पर है कि पीडब्ल्यूडी की आगामी बैठक में एजेंसी को कितना अतिरिक्त समय दिया जाता है और दिसंबर 2026 तक परियोजना वास्तव में पूरी हो पाती है या नहीं।