राजस्थान के झुंझुनूं जिले के ककराना गांव के रहने वाले भारतीय नौसेना के जवान पूरणमल मेहरा (30), उनकी पत्नी ओमा मेहरा (26) और दोनों बच्चों की मौत की खबर से पूरे गांव में शोक का माहौल है। सोमवार को चारों के पार्थिव शरीर पैतृक गांव ककराना लाए गए, जहां गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
जवान पूरणमल मेहरा और उनकी पत्नी का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया, जबकि दोनों बच्चों को दफनाया गया। चारों की मौत मुंबई के कोलाबा स्थित नेवी नगर के सरकारी आवास में हुई थी।
तीन दिन तक फोन नहीं उठने के बाद सामने आई घटना
परिजनों के मुताबिक, परिवार पिछले तीन दिनों से पूरणमल मेहरा से फोन पर संपर्क करने का प्रयास कर रहा था, लेकिन फोन का जवाब नहीं मिल रहा था। इसके बाद शनिवार को परिजनों ने नौसेना अधिकारियों को इसकी सूचना दी।
शनिवार रात करीब 11 बजे परिवार को मुंबई से पूरणमल की मौत की जानकारी मिली। इसके बाद जब घटना की जानकारी सामने आई तो परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
पुलिस कर रही मामले की जांच
मुंबई पुलिस के अनुसार, मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस पारिवारिक विवाद, मानसिक तनाव और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।
पुलिस को मौके से किसी सुसाइड नोट के मिलने की जानकारी नहीं है। फिलहाल मामले में सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है और पुलिस पोस्टमार्टम व फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
2015 में नौसेना में भर्ती हुए थे पूरणमल
परिजनों ने बताया कि पूरणमल मेहरा वर्ष 2015 में जोधपुर से भारतीय नौसेना में भर्ती हुए थे। वर्ष 2020 में उनकी शादी सीकर जिले के खंडेला निवासी ओमा मेहरा से हुई थी।
करीब नौ महीने पहले पूरणमल गांव ककराना आए थे। परिवार के अनुसार, घटना से लगभग छह दिन पहले ही उनकी घरवालों से फोन पर बातचीत हुई थी। बताया गया कि वह करीब 20 दिनों की छुट्टी पर थे।
ग्रामीणों के मुताबिक, पूरणमल का व्यवहार मिलनसार था और गांव में उनकी किसी से रंजिश नहीं थी।
तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे पूरणमल
पूरणमल मेहरा तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उनके बड़े भाई बृजलाल मेहरा भी सेना में कार्यरत हैं, जबकि छोटे भाई मुकेश कुमार गांव में रहते हैं। उनके पिता शंभुदयाल ककराना में किराने की दुकान चलाते हैं।
सेना के वाहन से गांव पहुंचे चारों पार्थिव शरीर
गुढ़ागौड़जी थाने से सेना के वाहन के जरिए चारों पार्थिव शरीर ककराना गांव लाए गए। गांव में शव पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन अंतिम विदाई देने के लिए जुटे।
पूरणमल की अंतिम यात्रा सेना के वाहन से निकाली गई, जबकि उनकी पत्नी के अंतिम संस्कार में परिजनों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। दोनों बच्चों को भी परिजनों की मौजूदगी में अंतिम विदाई दी गई।
पूरणमल को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
श्मशान घाट पर भारतीय नौसेना के जवान पूरणमल मेहरा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सैन्य जवानों ने उनके पिता शंभुदयाल को तिरंगा सौंपा। पूरणमल के छोटे भाई मुकेश कुमार ने अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की।
एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत ने ककराना गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। फिलहाल मुंबई पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।