Sugar Price Increase Reason: त्योहारी सीजन से पहले देश के कई बाजारों में चीनी के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। भोपाल के खुदरा बाजार में शक्कर की कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है, जबकि गुड़ भी करीब 80 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
कारोबारियों के अनुसार, पिछले करीब 20 दिनों में चीनी की कीमत में 22 रुपये प्रति किलो तक की तेजी दर्ज की गई है। वहीं, गुड़ के दाम में भी इसी अवधि के दौरान करीब 15 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है।
20 दिनों में चीनी की कीमत में तेज उछाल
बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, थोक बाजार में पहले करीब 43 रुपये प्रति किलो मिलने वाली चीनी की कीमत बढ़कर लगभग 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसका असर खुदरा बाजार पर भी पड़ा है, जहां शक्कर 70 रुपये प्रति किलो तक बिकने की बात कही जा रही है।
इसी तरह गुड़ की कीमत में भी तेजी दर्ज की गई है। थोक बाजार में करीब 55 रुपये प्रति किलो बिकने वाला गुड़ अब लगभग 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि खुदरा बाजार में इसका भाव 80 रुपये प्रति किलो तक बताया जा रहा है।
एथेनॉल और जमाखोरी को लेकर व्यापारियों का दावा
चीनी और गुड़ के बढ़ते दाम को लेकर कारोबारियों ने अलग-अलग कारण बताए हैं। व्यापारियों का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन से जुड़ी मांग और संभावित जमाखोरी का असर बाजार पर दिखाई दे रहा है।
हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे वास्तविक कारणों और बाजार की स्थिति का आकलन सरकार तथा संबंधित एजेंसियों के आंकड़ों के आधार पर किया जा रहा है।
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात को दी मंजूरी
घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक शुल्क दर कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी DGFT की अधिसूचना के अनुसार, यह फैसला चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच लिया गया है।
उद्योग संगठनों के अनुसार, 2026-27 सत्र से पहले शुरुआती चीनी भंडार कम रहने के कारण मिल स्तर पर कीमतों में तेजी आई है।
मिलों में भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची चीनी की कीमत
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को देश में मिल स्तर पर चीनी की औसत कीमत करीब 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल रही। इसकी तुलना में एक साल पहले यही कीमत लगभग 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह औसतन 46.34 रुपये प्रति किलो थी।
बड़े थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट लागू
सरकार ने बढ़ती कीमतों और संभावित जमाखोरी को नियंत्रित करने के लिए बड़े थोक उपभोक्ताओं पर भी भंडारण सीमा लागू कर दी है।
महीने में 10 टन से अधिक चीनी का उपयोग करने वाले उपभोक्ता अब अधिकतम 15 दिन की खपत के बराबर ही चीनी का स्टॉक रख सकेंगे।
इस आदेश के दायरे में मिठाई निर्माता, शीतल पेय कंपनियां, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, मिठाई विक्रेता और अन्य संस्थागत खरीदार शामिल होंगे।
1 सितंबर से लागू होगा नया आदेश
खाद्य मंत्रालय ने चीनी (थोक उपभोक्ताओं की भंडारण सीमा) आदेश, 2026 को अधिसूचित किया है। यह आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
सरकार का कहना है कि इस कदम से अटकलों और अत्यधिक भंडारण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, जिससे बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत उचित एवं स्थिर कीमतों पर चीनी उपलब्ध कराई जा सके।
त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग का असर
अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं। इस दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की खपत भी सामान्य रूप से अधिक रहती है।
ऐसे में चीनी के दाम में बढ़ोतरी और गुड़ की महंगाई ने उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब सरकार के शुल्क मुक्त आयात और स्टॉक लिमिट जैसे फैसलों का बाजार कीमतों पर कितना असर पड़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।