रायपुर। Chhattisgarh NEET Counselling 2026: छत्तीसगढ़ में NEET-UG 2026 की प्रथम चरण की मेरिट सूची को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि राज्य की मेरिट सूची में शामिल कुछ अभ्यर्थियों के नाम अन्य राज्यों की मेरिट या काउंसिलिंग सूची में भी दर्ज हैं। इसके अलावा कुछ उम्मीदवारों की जाति श्रेणी, डोमिसाइल और पहचान संबंधी जानकारियों में भी कथित विसंगतियां सामने आने का दावा किया गया है।
मामले को लेकर छात्र संगठन NSUI ने अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराने और संशोधित मेरिट सूची जारी करने की मांग की है।
कई राज्यों की सूची में नाम होने का दावा
आरोपों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की स्टेट रैंक सूची में शामिल कुछ अभ्यर्थियों के नाम अन्य राज्यों की प्रवेश या काउंसिलिंग सूची में भी पाए गए हैं।
दावे के मुताबिक, नेविदिता मंडावी का नाम छत्तीसगढ़ की सूची के साथ मध्य प्रदेश की काउंसिलिंग सूची में भी दर्ज है। वहीं, रिद्धि टांडी का नाम छत्तीसगढ़ की मेरिट सूची के अलावा ओडिशा संयुक्त प्रवेश परीक्षा यानी OJEE की राज्य मेरिट सूची में भी होने की बात कही गई है।
इसको लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि राज्य कोटे के तहत प्रवेश के लिए जमा किए गए दस्तावेज और डोमिसाइल संबंधी जानकारी का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
जाति और डोमिसाइल विवरण में भी विसंगति का आरोप
मेरिट सूची को लेकर सामने आए विवाद में कुछ उम्मीदवारों की जाति श्रेणी, निवास प्रमाण पत्र और पहचान संबंधी विवरण में अंतर होने का भी दावा किया गया है।
छात्र संगठन का कहना है कि यदि दस्तावेजों की पूरी तरह जांच नहीं की गई, तो राज्य कोटे के लिए अपात्र अभ्यर्थियों को भी प्रवेश का लाभ मिल सकता है। हालांकि, इन आरोपों और दस्तावेजों की अंतिम पुष्टि सक्षम काउंसिलिंग प्राधिकरण की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
NSUI ने की भौतिक सत्यापन की मांग
मामले में NSUI ने मांग की है कि प्रथम चरण की मेरिट सूची में शामिल संदिग्ध मामलों की फिजिकल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराई जाए।
संगठन का कहना है कि केवल ऑनलाइन दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने के बजाय अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। सत्यापन के बाद यदि किसी अभ्यर्थी के दस्तावेज या पात्रता में गड़बड़ी मिलती है, तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए संशोधित मेरिट सूची जारी की जाए।
NEET काउंसिलिंग प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस विवाद के बाद छत्तीसगढ़ NEET-UG काउंसिलिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि मेडिकल सीटों पर प्रवेश से पहले पात्रता, डोमिसाइल और आरक्षण श्रेणी से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच जरूरी है।
अब इस मामले में काउंसिलिंग प्राधिकरण की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी। आरोपों की पुष्टि होने या खारिज होने का फैसला दस्तावेजों के आधिकारिक सत्यापन के बाद ही होगा।