Coal Levy Scam: कोल लेवी के साथ पैलेट पर भी 100 रुपये प्रति टन वसूली का आरोप, EOW चार्जशीट में बड़ा खुलासा

Spread the love

Coal Levy Scam: छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी मामले में EOW की पूरक जांच रिपोर्ट से एक और कथित वसूली नेटवर्क का खुलासा होने की बात सामने आई है। रायपुर की विशेष अदालत में पेश की गई चार्जशीट के मुताबिक, कोयला परिवहन से जुड़ी कथित अवैध वसूली के साथ लोहे के पैलेट पर भी 100 रुपये प्रति टन की दर से रकम वसूले जाने का आरोप है।

EOW की जांच के अनुसार, यह व्यवस्था जनवरी 2022 के आसपास शुरू किए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि इसके लिए खनिज विभाग के ऑनलाइन ई-परमिट सिस्टम में बदलाव किया गया और परमिट प्रक्रिया में अधिकारियों की मैन्युअल मंजूरी को महत्वपूर्ण बनाया गया।

पैलेट पर 100 रुपये प्रति टन वसूली का आरोप

चार्जशीट में दर्ज जांच के मुताबिक, लोहे के पैलेट पर 100 रुपये प्रति टन की दर से कथित तौर पर नकद भुगतान लिया जाता था। आरोप है कि भुगतान के बाद ही परमिट प्रक्रिया आगे बढ़ती थी।

लोहे के पैलेट का इस्तेमाल स्पंज आयरन, आयरन और स्टील बनाने वाले उद्योगों में कच्चे माल के तौर पर किया जाता है। ऐसे में इस तरह की कथित वसूली का असर प्रदेश के अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कारोबारियों पर पड़ने का दावा जांच रिपोर्ट में किया गया है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप EOW की जांच और चार्जशीट में दर्ज दावों पर आधारित हैं। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

ई-परमिट सिस्टम में बदलाव का आरोप

Coal Levy Scam: कोल लेवी के साथ पैलेट पर भी 100 रुपये प्रति टन वसूली का आरोप, EOW चार्जशीट में बड़ा खुलासा

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित वसूली को संचालित करने के लिए खनिज विभाग के ऑनलाइन ई-परमिट पोर्टल की प्रक्रिया में बदलाव किया गया था।

चार्जशीट के मुताबिक, पहले से मौजूद ऑनलाइन प्रक्रिया के बजाय कुछ मामलों में अधिकारियों की ओर से दी जाने वाली मैन्युअल मंजूरी को अनिवार्य बनाया गया। आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए परमिट जारी करने की प्रक्रिया पर नियंत्रण बनाया गया और भुगतान के बाद ही आगे की अनुमति मिलती थी।

कोल लेवी मामले में भी जांच एजेंसियां पहले ऑनलाइन परमिट व्यवस्था में बदलाव और मैन्युअल प्रक्रिया लागू किए जाने को कथित अवैध वसूली के तरीके से जोड़ती रही हैं।

व्हाट्सऐप ग्रुप से चलती थी निगरानी?

EOW की जांच में पाल ग्रुप और टुडे ग्रुप जैसे व्हाट्सऐप ग्रुप का भी उल्लेख किया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन ग्रुप के जरिए गाड़ियों की आवाजाही और परमिट से जुड़े कामकाज को लेकर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता था।

आरोप है कि कथित भुगतान और हरी झंडी मिलने के बाद ही ई-परमिट जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी।

कोल लेवी मामले की पिछली जांच में भी अलग-अलग व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए रकम और गतिविधियों का हिसाब रखने की बात सामने आ चुकी है। EOW की नई चार्जशीट में पाल ग्रुप, टुडे ग्रुप के साथ अन्य समूहों का भी उल्लेख होने की जानकारी सामने आई है।

कारोबारियों पर आर्थिक दबाव का दावा

EOW की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पैलेट पर कथित तौर पर 100 रुपये प्रति टन की अतिरिक्त वसूली से रायपुर, दुर्ग, रायगढ़ और बिलासपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा।

जांच के मुताबिक, कच्चे माल की लागत बढ़ने से उत्पादन लागत पर असर पड़ सकता था। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पड़ोसी राज्यों में ऐसी कथित वसूली नहीं होने के कारण छत्तीसगढ़ के उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ा।

हालांकि, इस दावे की वास्तविक आर्थिक क्षति और संबंधित उद्योगों पर पड़े प्रभाव का अंतिम आकलन जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

कथित अवैध रकम से संपत्ति बनाने का आरोप

चार्जशीट में कथित अवैध वसूली से हासिल रकम को दूसरे माध्यमों से खपाने और संपत्तियां खरीदने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, नकद रकम को कथित तौर पर कागजी कंपनियों के बैंक खातों में डालकर अलग-अलग लेनदेन के जरिए घुमाया गया। इसमें बिना गारंटी वाले कर्ज और कथित फर्जी शेयर खातों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

EOW के अनुसार, इस तरह रकम को कथित तौर पर वैध दिखाने के बाद जमीन, पेट्रोल पंप और कोल वाशरी जैसी संपत्तियों में निवेश किया गया। कोल लेवी मामले की जांच में भी कथित अवैध कमाई को संपत्तियों में लगाने और फर्जी कंपनियों के जरिए रकम घुमाने के आरोप सामने आए हैं।

कोल लेवी मामले में 25 रुपये प्रति टन की कथित वसूली

छत्तीसगढ़ के कोल लेवी मामले में जांच एजेंसियों का आरोप रहा है कि 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन पर 25 रुपये प्रति टन की अवैध लेवी वसूली गई। ED की पिछली जांच में भी वरिष्ठ अधिकारियों, कारोबारियों, राजनेताओं और बिचौलियों से जुड़े कथित नेटवर्क का उल्लेख किया गया था।

अब EOW की पूरक जांच में लोहे के पैलेट से जुड़ी कथित 100 रुपये प्रति टन वसूली का मुद्दा सामने आने से मामले का दायरा और बड़ा होने की बात कही जा रही है।

EOW की जांच में आगे क्या?

Coal Levy Scam मामले में EOW की पूरक चार्जशीट के बाद अब जांच एजेंसी की ओर से सामने रखे गए दस्तावेज और आरोप अदालत की जांच के दायरे में हैं। पैलेट से जुड़ी कथित वसूली में कौन-कौन लोग शामिल थे, कितनी रकम एकत्र हुई और इस रकम का इस्तेमाल कहां किया गया—इन सवालों का जवाब न्यायिक प्रक्रिया में सामने आना बाकी है।

फिलहाल चार्जशीट में दर्ज आरोपों के मुताबिक, कथित सिंडिकेट की गतिविधियां केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि लोहे के पैलेट की सप्लाई और परमिट प्रक्रिया तक भी पहुंचने का दावा किया गया है। मामले में आरोपियों की भूमिका और आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत के फैसले से ही होगी।

जरुर पढ़ें

InkLink News Agency is a fast-growing digital news agency and aggregator delivering accurate, timely, and reliable updates across India. We provide dedicated coverage for India, Chhattisgarh, and Madhya Pradesh, along with in-depth reporting across key categories including Business, Technology, Politics, Crime, Literature, and more.

Stay informed. Stay connected. Stay ahead with InkLink News Agency.