रायपुर छत्तीसगढ़ व्यापमं फर्जी निर्देश पत्र मामले की जांच के दौरान अवैध वसूली के आरोप में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की सहायक शिक्षक और व्याख्याता भर्ती परीक्षा-2026 से जुड़े इस मामले में ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर (SI) महेश कुमार ओगरे को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि जांच के दौरान एक व्यक्ति से मामला रफा-दफा करने के नाम पर रुपये की मांग की गई थी।
यह मामला छत्तीसगढ़ नवा रायपुर के राखी थाने में दर्ज है। छत्तीसगढ़ के रायपुर में जांच के दौरान सामने आई शिकायत के मुताबिक, एक व्यक्ति से कथित तौर पर एक लाख रुपये की मांग की गई और बाद में उससे 80 हजार रुपये लिए गए। शिकायतकर्ता को जब पता चला कि फर्जी निर्देश पत्र प्रसारित करने के मामले में उसकी कोई भूमिका नहीं है, तो उसने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की।
कोचिंग संचालक के वाट्सऐप ग्रुप से प्रसारित हुआ था फर्जी निर्देश
जानकारी के अनुसार, व्यापमं की भर्ती परीक्षा से संबंधित एक फर्जी निर्देश पत्र सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया गया था। बताया गया कि यह फर्जी निर्देश एक कोचिंग संचालक के वाट्सऐप ग्रुप के जरिए लोगों तक पहुंचा।
फर्जी निर्देश पत्र सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इसके तहत वाट्सऐप ग्रुप से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति को भी पुलिस थाने बुलाया गया था।
आरोप है कि पूछताछ के दौरान संबंधित व्यक्ति से मामले को खत्म करने के नाम पर एक लाख रुपये की मांग की गई। इसके बाद कथित तौर पर उससे 80 हजार रुपये ले लिए गए। बाद में जब व्यक्ति को जानकारी हुई कि उसका इस फर्जी निर्देश पत्र को प्रसारित करने में कोई संबंध नहीं था, तो उसने मामले की शिकायत पुलिस के उच्च अधिकारियों से कर दी।
जांच में ट्रेनी SI पर लगा पद के दुरुपयोग का आरोप
शिकायत मिलने के बाद मामले की विभागीय स्तर पर जांच की गई। जांच में ट्रेनी एसआई महेश कुमार ओगरे की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। आरोप है कि उन्होंने पुलिस विभाग की निष्पक्ष कार्यप्रणाली का उल्लंघन किया और अपने पद का अनुचित इस्तेमाल किया।
जांच के आधार पर पुलिस विभाग ने ट्रेनी एसआई के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद अब मामले में अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
आठ महीने से चल रही है फर्जी निर्देश पत्र मामले की जांच
व्यापमं फर्जी निर्देश पत्र को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले की पुलिस जांच करीब आठ महीने से जारी है। हालांकि, अब तक इस प्रकरण में किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी निर्देश पत्र किसने तैयार किया, इसे किस माध्यम से प्रसारित किया गया और इसके पीछे किसी व्यक्ति या समूह की क्या भूमिका थी। साथ ही, जांच के दौरान सामने आए कथित वसूली के आरोपों को भी गंभीरता से देखा जा रहा है।
एएसपी चंचल तिवारी को सौंपी गई जांच
पूरे मामले की आगे की जांच की जिम्मेदारी एएसपी चंचल तिवारी को सौंपी गई है। पुलिस की ओर से फर्जी निर्देश पत्र के प्रसार से लेकर कथित अवैध वसूली तक सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।
व्यापमं की सहायक शिक्षक और व्याख्याता भर्ती परीक्षा-2026 से जुड़ा यह मामला लंबे समय से जांच के दायरे में है। अब ट्रेनी एसआई के निलंबन के बाद जांच में एक नया पहलू जुड़ गया है। अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फर्जी निर्देश पत्र के प्रसार और कथित वसूली के मामले में आगे किन लोगों पर कार्रवाई होती है।
फिलहाल पुलिस का ध्यान फर्जी निर्देश पत्र के स्रोत, उसके प्रसार और जांच के दौरान सामने आए वसूली के आरोपों से जुड़े तथ्यों को सामने लाने पर है।