नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल सामने आया है। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज किया है, सीजफायर जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने में अमेरिका की भूमिका का दावा किया था। जनरल चौहान के मुताबिक, सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों यानी DGMOs के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया था।
सीजफायर के बीच उन्होंने यह भी आशंका जताई कि भारत के आधिकारिक ऐलान से पहले सीजफायर की जानकारी अमेरिका तक संभवतः पाकिस्तान की तरफ से पहुंची हो सकती है।
पूर्व CDS ने ट्रंप के दावे को किया खारिज
नई दिल्ली में विवेकानंद फाउंडेशन की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए सीजफायर के सैन्य पहलू पर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम को लेकर किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी। उनके अनुसार, दोनों देशों के DGMOs ने आपसी बातचीत के जरिए सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला लिया था।
पूर्व CDS ने साफ किया कि वह सीजफायर के केवल सैन्य पहलू पर टिप्पणी कर सकते हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन्हें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नजर नहीं आती।
भारत-पाकिस्तान के DGMOs के बीच हुआ फैसला
जनरल अनिल चौहान के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का फैसला DGMOs स्तर पर लिया गया था। यानी सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क और बातचीत के बाद दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए।
उनके इस बयान से डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर सवाल खड़े होते हैं, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम में अमेरिकी मध्यस्थता का श्रेय लिया था।
भारत के ऐलान से पहले अमेरिका को कैसे मिली जानकारी?
कार्यक्रम के दौरान जनरल अनिल चौहान से यह भी सवाल पूछा गया कि अगर सीजफायर का फैसला भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच हुआ था, तो भारत के आधिकारिक ऐलान से पहले इसकी जानकारी अमेरिका तक कैसे पहुंच गई?
इस पर पूर्व CDS ने कहा कि उन्हें निश्चित तौर पर नहीं पता कि यह जानकारी अमेरिका तक कैसे पहुंची। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जानकारी भारत की तरफ से लीक नहीं हुई थी।
उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान दोनों पक्षों ने अपनी DGMO स्तर की बातचीत को लेकर गोपनीयता बनाए रखी थी। ऐसे में उन्होंने आशंका जताई कि यह जानकारी पाकिस्तानी पक्ष की ओर से लीक हुई हो सकती है।
सीजफायर को लेकर क्या था डोनाल्ड ट्रंप का दावा?
भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद 10 मई को दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई थी। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का श्रेय अमेरिका को दिया था।
ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका की मध्यस्थता और बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान तत्काल युद्धविराम के लिए सहमत हुए। उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष में बड़ी संख्या में विमान गिराए गए और दोनों देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ की चेतावनी भी दी गई थी।
हालांकि, भारत की ओर से लगातार यह रुख रहा है कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्षविराम में मध्यस्थता नहीं की थी।
कैसे शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर?
भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।
इसके जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव तेजी से बढ़ा और दोनों तरफ से हमले तथा जवाबी कार्रवाई हुई।
लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच 10 मई 2025 को पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO से संपर्क किया। बातचीत के बाद दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए।
ऑपरेशन सिंदूर के सीजफायर पर फिर क्यों उठे सवाल?
पूर्व CDS अनिल चौहान के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर की जानकारी आधिकारिक घोषणा से पहले अमेरिका तक कैसे पहुंची।
जनरल चौहान ने जहां सीजफायर के सैन्य निर्णय में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका से इनकार किया, वहीं उन्होंने यह संभावना जताई कि गोपनीय बातचीत की जानकारी पाकिस्तान की तरफ से अमेरिका तक पहुंची हो सकती है।
ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर अमेरिकी मध्यस्थता के दावे पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।