Abhijeet Dipke : महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चला रहे अभिजीत दिपके के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मामला गरमा गया है। सरकारी स्कूल में बिना अनुमति प्रवेश करने के आरोप में कार्रवाई के बाद दिपके ने महाराष्ट्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि उनके खिलाफ चाहे 100 केस दर्ज कर दिए जाएं, लेकिन सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
अभिजीत दिपके महाराष्ट्र के अलग-अलग सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और कथित अव्यवस्थाओं को सामने ला रहे हैं। उनका दावा है कि कई स्कूलों में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक ठीक से नहीं मिल रही हैं।

Abhijeet Dipke पर क्यों हुई FIR?
Abhijeet Dipke FIR का मामला 22 अगस्त को महाराष्ट्र के लातूर से जुड़ा है। आरोप है कि अभिजीत दिपके अपने साथियों के साथ शिक्षकों की अनुमति के बिना एक सरकारी स्कूल में दाखिल हुए थे।

इस मामले में अभिजीत दिपके समेत कुल पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। FIR दर्ज होने के बाद दिपके ने अपने अभियान से पीछे हटने से इनकार किया और कहा कि स्कूलों की समस्याओं को सामने रखना जारी रहेगा।
उनका कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों में जाकर वहां की कमियों पर सवाल उठाना अपराध है, तो उनके खिलाफ और मामले दर्ज किए जा सकते हैं, लेकिन स्कूलों में सुधार होना जरूरी है।
‘100 केस कर लो, लेकिन स्कूल तो ठीक करो’
FIR के बाद अभिजीत दिपके ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उनके खिलाफ मुकदमा करने से सरकारी स्कूलों की हालत सुधरती है तो सरकार जितने चाहे केस दर्ज कर सकती है।
उन्होंने कहा, “क्या स्कूलों में जाकर वहां की समस्याओं और सुविधाओं की कमी बताना जुर्म है? अगर है, तो मेरे खिलाफ एक नहीं बल्कि 100 केस दर्ज करें, लेकिन प्लीज यह पक्का करें कि स्कूलों में सुधार हो।”
दिपके के इस बयान के बाद सरकारी स्कूलों की व्यवस्था और शिक्षा को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
सरकारी स्कूलों का दौरा कर रहे अभिजीत दिपके
अभिजीत दिपके अपने अभियान के तहत महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों का दौरा कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने हिंगोली तालुका के लोहगांव और करांजल स्थित जिला परिषद स्कूलों का जायजा लिया।
इस दौरान उन्होंने स्कूलों के क्लासरूम, बैठने की व्यवस्था, पीने के पानी और मिड-डे मील की तैयारियों को देखा। उनके साथ सोशल एक्टिविस्ट मुनीर पठान और कुछ स्थानीय लोग भी मौजूद थे।
दिपके का आरोप है कि कई सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उन्होंने साफ पानी और स्वच्छ टॉयलेट जैसी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
मिड-डे मील को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में स्कूल के मिड-डे मील को लेकर भी सवाल उठाए। 29 अगस्त के वीडियो में उन्होंने दावा किया कि बच्चों के भोजन में एक्सपायर हो चुके मसालों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
वीडियो में उन्होंने एक पैकेट दिखाया और दावा किया कि उस पर फरवरी 2026 की एक्सपायरी दर्ज थी। इसी आधार पर उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों को एक्सपायर सामग्री से तैयार भोजन दिया जा रहा है।
इन आरोपों को लेकर संबंधित प्रशासन या स्कूल की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया गया, इसकी जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।

‘क्या मंत्री और विधायक अपने बच्चों को एक्सपायर फूड खिलाते हैं?’
मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दिपके ने सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सरकार से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या मंत्री और विधायक अपने बच्चों को एक्सपायर फूड खिलाएंगे।
दिपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में भी प्रतिभा और क्षमता है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें बेहतर सुविधाएं और आगे बढ़ने का अवसर मिले।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की संख्या का मुद्दा भी उठाया और कहा कि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल
अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि शिक्षा सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। उनका कहना है कि स्कूलों की समस्याओं पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय सरकार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर ध्यान देना चाहिए।
वहीं, बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश को लेकर दर्ज हुई FIR कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगी।
फिलहाल, Abhijeet Dipke FIR के बाद उनका ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान और चर्चा में आ गया है। दिपके ने स्पष्ट किया है कि FIR के बावजूद वह सरकारी स्कूलों की स्थिति और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाते रहेंगे।