Pachmarhi Rocks Dinosaur History: पचमढ़ी की चट्टानों में छिपा 6.6 करोड़ साल पुराना राज, डायनासोर युग से जुड़ा बड़ा खुलासा

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Pachmarhi Rocks Dinosaur History ने मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी को एक बार फिर वैज्ञानिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। IISER भोपाल के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में हुए एक अध्ययन में पचमढ़ी क्षेत्र की प्राचीन डाइक चट्टानों के चुंबकीय रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया है। रिसर्च में इन चट्टानों में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की अलग-अलग दिशाओं के संकेत मिले हैं, जो डेक्कन ज्वालामुखीय गतिविधियों के दौर को समझने में अहम जानकारी देते हैं।

यह अध्ययन फरवरी 2026 में Geochemistry, Geophysics, Geosystems जर्नल में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं में IISER भोपाल के ज्योतिर्मय मल्लिक के साथ गरिमा शुक्ला और बी.वी. लक्ष्मी शामिल हैं।

पचमढ़ी की चट्टानें क्यों हैं खास?

Pachmarhi Rocks Dinosaur History: पचमढ़ी की चट्टानों में छिपा 6.6 करोड़ साल पुराना राज, डायनासोर युग से जुड़ा बड़ा खुलासा

पचमढ़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में बेसाल्टिक डाइक मौजूद हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये डाइक उस समय मैग्मा के रास्ते के रूप में काम करती थीं, जब डेक्कन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ज्वालामुखीय गतिविधियां हो रही थीं।

शोधपत्र के मुताबिक पचमढ़ी डाइक स्वॉर्म में करीब 244 मैप की गई बेसाल्टिक डाइक हैं। इनमें से कई प्राचीन मैग्मा के जमने से बनी संरचनाएं हैं, जो पृथ्वी के भूगर्भीय इतिहास और उस समय की मैग्मा गतिविधियों को समझने में मदद करती हैं।

6.6 करोड़ साल पुराने दौर से कनेक्शन

करीब 66 मिलियन यानी 6.6 करोड़ साल पहले डेक्कन ज्वालामुखीय प्रांत में बड़े पैमाने पर ज्वालामुखीय गतिविधियां हुई थीं। इसी व्यापक भूगर्भीय कालखंड के आसपास पृथ्वी पर क्रिटेशियस काल का अंत हुआ, जिसके बाद गैर-पक्षी डायनासोर समेत कई प्रजातियां विलुप्त हो गईं।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सावधानी भी है। नई स्टडी ने पचमढ़ी की इन डाइक को सीधे डायनासोर के विलुप्त होने का कारण साबित नहीं किया है। शोधपत्र के अनुसार इन डाइक की प्रत्यक्ष भू-काल निर्धारण (direct geochronological dating) अभी उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें डेक्कन ट्रैप्स की किसी खास ज्वालामुखीय घटना से जोड़ना अभी पूरी तरह निश्चित नहीं है।

चट्टानों में मिला पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का रिकॉर्ड

इस रिसर्च का सबसे अहम हिस्सा इन चट्टानों में संरक्षित paleomagnetic record है। वैज्ञानिकों ने 14 डाइक का अध्ययन किया। इनमें से 5 डाइक में सामान्य (normal) polarity, 7 में reverse polarity और 2 डाइक में दोनों तरह की polarity के संकेत मिले।

इसका मतलब है कि जब ये मैग्मा ठंडा होकर चट्टानों में बदला, तब पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की अलग-अलग दिशाओं का रिकॉर्ड उसमें सुरक्षित हो गया। दो डाइक में दोनों प्रकार के संकेत मिलने से शोधकर्ताओं को मैग्मा के अलग-अलग चरणों में पहुंचने और चुंबकीय उलटफेर के दौरान इनके जमने के प्रमाण मिले हैं।

पृथ्वी के Magnetic Field में क्या हुआ था?

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र हमेशा एक ही दिशा में नहीं रहा है। भूवैज्ञानिक इतिहास में कई बार geomagnetic reversal यानी चुंबकीय ध्रुवों की दिशा में उलटफेर हुआ है।

पचमढ़ी की डाइक चट्टानों में सामान्य और विपरीत दोनों polarity के संकेत मिलना इसी तरह के प्राचीन चुंबकीय बदलावों को समझने में मदद करता है। वैज्ञानिकों ने इन रिकॉर्ड के आधार पर पचमढ़ी डाइक के निर्माण और डेक्कन ज्वालामुखीय गतिविधियों के समय की परिस्थितियों का अध्ययन किया है।

वैज्ञानिकों ने कैसे किया अध्ययन?

रिसर्च टीम ने चट्टानों के rock magnetic और paleomagnetic analysis किए। चट्टानों में मौजूद चुंबकीय खनिजों की जांच से यह समझने की कोशिश की गई कि मैग्मा के ठंडा होने के समय पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या थी।

अध्ययन में पाया गया कि चट्टानों में मौजूद मैग्नेटाइट और टाइटेनोमैग्नेटाइट जैसे खनिजों ने प्राचीन चुंबकीय संकेतों को संरक्षित रखने में भूमिका निभाई। वैज्ञानिकों ने अलग-अलग प्रयोगों और चुंबकीय मापों के जरिए इन संकेतों का विश्लेषण किया।

डायनासोर के अंत से कितना सीधा संबंध?

पचमढ़ी की चट्टानों और डायनासोर के अंत के बीच संबंध को समझने में समय का संदर्भ महत्वपूर्ण है। डेक्कन ज्वालामुखीय गतिविधियां लगभग उसी व्यापक कालखंड में हुईं, जब क्रिटेशियस युग समाप्त हुआ।

लेकिन वैज्ञानिक अध्ययन का मुख्य विषय डायनासोर के विलुप्त होने का प्रत्यक्ष कारण ढूंढना नहीं, बल्कि पचमढ़ी की डाइक में दर्ज डेक्कन ज्वालामुखीय गतिविधि और भू-चुंबकीय बदलावों को समझना है। स्टडी खुद भी इन डाइक के सटीक काल निर्धारण को अभी अनिश्चित बताती है।

पचमढ़ी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

पचमढ़ी आमतौर पर अपने जंगलों, झरनों और सतपुड़ा की प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक संरचनाओं को भी समेटे हुए है।

नई रिसर्च से पचमढ़ी की चट्टानों में दर्ज प्राचीन चुंबकीय संकेतों को समझने में मदद मिली है। इससे मध्य भारत में डेक्कन ज्वालामुखीय गतिविधियों, मैग्मा के प्रवाह और उस दौर में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में हुए बदलावों पर आगे के अध्ययन का आधार मिल सकता है। IISER भोपाल और भारतीय भूचुंबकत्व संस्थान की ओर से भी इस अध्ययन को अपने शोध प्रकाशनों में दर्ज किया गया है।

पचमढ़ी की चट्टानों में दर्ज है धरती के पुराने दौर की कहानी

Pachmarhi Rocks Dinosaur History को लेकर सामने आया यह अध्ययन बताता है कि पचमढ़ी की चट्टानें सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनमें करोड़ों साल पुराने भूगर्भीय बदलावों के संकेत भी सुरक्षित हैं।

इन चट्टानों में मिले सामान्य और reverse magnetic polarity के रिकॉर्ड वैज्ञानिकों को उस समय की ज्वालामुखीय गतिविधियों और पृथ्वी के चुंबकीय इतिहास को समझने में नई जानकारी देते हैं। हालांकि इन डाइक की सटीक उम्र और उन्हें डेक्कन ज्वालामुखीय घटनाओं के किसी खास चरण से जोड़ने के लिए अभी और भू-काल निर्धारण की जरूरत है।

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