Chhattisgarh Road Construction: 8 साल का इंतजार, 15 करोड़ स्वाहा… एक बारिश में उखड़ी वाड्रफनगर बायपास की सड़क

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Chhattisgarh Road Construction: छत्तीसगढ़ के वाड्रफनगर में करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से तैयार बायपास सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। करीब आठ साल के लंबे इंतजार के बाद 30 मई 2026 को कागजों में काम पूरा हुआ, लेकिन बारिश के बाद सड़क की हालत खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं।

सड़क पर कई जगह डामर उखड़ने, गहरे गड्ढे बनने और पानी जमा होने की स्थिति दिखाई दे रही है। इससे बायपास से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

8 साल में पूरा हुआ 13 किलोमीटर का प्रोजेक्ट

वाड्रफनगर बायपास सड़क के लिए लोक निर्माण विभाग के रामानुजगंज डिवीजन ने 12 मार्च 2018 को 13 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 19.30 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था।

बताया गया है कि मेसर्स हर्ष कंस्ट्रक्शन, जिसके ठेकेदार संतोष सिंह हैं, ने करीब 15 करोड़ रुपये में यह काम लिया था। निर्माण कार्य के लिए 1 नवंबर 2018 को मशीनरी मोबिलाइजेशन के मद में करीब 18.91 लाख रुपये जारी किए गए थे।

परियोजना को निर्धारित समय में पूरा किया जाना था, लेकिन निर्माण कार्य करीब आठ साल तक चलता रहा। आखिरकार 30 मई 2026 को 25वें और अंतिम बिल के जरिए काम पूरा दिखाया गया।

पहली बारिश में उखड़ने लगा डामर

Chhattisgarh Road Construction: 8 साल का इंतजार, 15 करोड़ स्वाहा… एक बारिश में उखड़ी वाड्रफनगर बायपास की सड़क

काम पूरा होने के कुछ समय बाद बारिश शुरू हुई तो सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। कई हिस्सों में डामर की परत उखड़ने और सड़क पर गड्ढे बनने की स्थिति सामने आई।

बारिश का पानी सड़क पर जमा होने से कई जगह कीचड़ जैसी स्थिति बन रही है। स्थानीय स्तर पर यह भी बताया जा रहा है कि दोपहिया वाहन चालकों को सड़क के खराब हिस्सों से बचकर निकलना पड़ रहा है, जबकि बड़े वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।

इतने लंबे समय और बड़ी राशि खर्च होने के बाद सड़क की ऐसी स्थिति ने निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्रस्ट और कैंबर को लेकर तकनीकी सवाल

सड़क की तकनीकी गुणवत्ता को लेकर क्रस्ट और कैंबर पर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण में ग्रैनुअल सब-बेस यानी GSB की कॉम्पेक्शन प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं।

तकनीकी रूप से सड़क की परतों को पर्याप्त रूप से कॉम्पैक्ट करना जरूरी होता है, ताकि सड़क पर वाहनों का दबाव और बारिश के पानी का असर कम हो। इसी तरह सड़क का कैंबर यानी ढलान सही होना भी जरूरी है, ताकि बारिश का पानी सड़क पर जमा होने के बजाय बाहर निकल सके।

बताया गया है कि वाड्रफनगर बायपास के कुछ हिस्सों में पानी रिसने और जल निकासी से जुड़ी समस्या सामने आई है। इससे सड़क की सतह को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है।

जांच में कैंबर को लेकर भी सामने आई थी आपत्ति

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विभागीय जांच में सड़क के कैंबर को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बावजूद अंतिम भुगतान और एपीएस राशि जारी किए जाने को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

यह भी आरोप लगाया गया है कि जिस एसडीओ विजय कुमार भारती की देखरेख में सब-ग्रेड और GSB से जुड़े काम हुए, उन्होंने प्रभारी कार्यपालन अभियंता के तौर पर अंतिम बिल पास किया।

हालांकि, इन आरोपों और भुगतान प्रक्रिया की अंतिम जिम्मेदारी तय करने के लिए विभागीय रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

कई अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

निर्माण कार्य के अलग-अलग चरणों में कई अधिकारियों की जिम्मेदारी रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सब इंजीनियर के तौर पर हूबलाल अहिंद, छबिचंद साहू और अशोक कुमार तिवारी के नाम सामने आते हैं।

वहीं एसडीओ स्तर पर एसएम खान, राजीव वर्मा, विजय कुमार भारती और बृजेश यादव की जिम्मेदारी बताई गई है।

कार्यपालन अभियंता यानी EE के स्तर पर एनके ठाकुर, एन एक्का, एसके गुप्ता, मोहन राम भगत और विजय कुमार भारती के नाम सामने आए हैं।

इन अधिकारियों की वास्तविक जवाबदेही निर्माण के किस चरण में कितनी थी, यह विभागीय रिकॉर्ड और जांच से स्पष्ट होना बाकी है।

15 करोड़ के खर्च के बाद उठ रहे तीन बड़े सवाल

वाड्रफनगर बायपास की मौजूदा स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल सड़क की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर है।

पहला सवाल—अंतिम भुगतान किस आधार पर हुआ?
यदि जांच में सड़क के कैंबर या निर्माण गुणवत्ता में कमी सामने आई थी, तो इसके बावजूद अंतिम भुगतान और एपीएस राशि जारी करने का आधार क्या था?

दूसरा सवाल—गुणवत्ता की निगरानी किसने की?
यदि GSB और सब-ग्रेड के काम में तकनीकी खामियां थीं, तो निर्माण के दौरान गुणवत्ता जांच और कॉम्पेक्शन रिपोर्ट की निगरानी किस स्तर पर की गई?

तीसरा सवाल—ठेकेदार पर कार्रवाई कब होगी?
निर्धारित समय से करीब छह साल की देरी और सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी, यह भी बड़ा सवाल है।

बारिश ने खोल दी निर्माण व्यवस्था की पोल?

वाड्रफनगर बायपास का उद्देश्य शहर के भीतर भारी वाहनों और अन्य ट्रैफिक का दबाव कम करना था। लेकिन सड़क की खराब स्थिति के कारण बायपास का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

Chhattisgarh Road Construction से जुड़ा यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि सड़क निर्माण पर बड़ी सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद शुरुआती बारिश के बाद ही इसकी टिकाऊपन पर सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल सड़क की वास्तविक स्थिति, निर्माण में तकनीकी खामियों और भुगतान प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय करने के लिए विभागीय स्तर पर स्पष्ट जांच और कार्रवाई जरूरी है। यदि जांच में लापरवाही या अनियमितता की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार पर नियमों के तहत कार्रवाई का सवाल उठेगा।

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