Bemetara News: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में शिवनाथ नदी के बदलते हालात ने पेयजल व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। महज 11 दिन के भीतर नदी की तस्वीर ऐसी बदली कि जहां 27 सितंबर को नांदघाट की निचली बस्ती में बाढ़ के कारण नाव से निगरानी करनी पड़ रही थी, वहीं 8 अक्टूबर को इंटकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए कर्मचारियों को नदी में फावड़ा चलाना पड़ा।
नांदघाट स्थित इंटकवेल से खारा पानी प्रभावित क्षेत्र के करीब 54 गांवों में पेयजल की आपूर्ति होती है। नदी का जलस्तर घटने से इस बार अक्टूबर की शुरुआत में ही संकट के संकेत मिलने लगे हैं। यदि पानी का स्तर इसी तरह कम होता रहा, तो आने वाले दिनों में जलापूर्ति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
11 दिन में बाढ़ से पानी की कमी तक पहुंचे हालात

शिवनाथ नदी में सितंबर के आखिरी सप्ताह में पानी का स्तर इतना बढ़ा था कि नांदघाट की निचली बस्ती में निगरानी के लिए नाव का इस्तेमाल करना पड़ा। लेकिन अक्टूबर की शुरुआत तक हालात बदल गए। 8 अक्टूबर को इंटकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए नदी में फावड़े से रास्ता बनाने की जरूरत पड़ गई।
यह बदलाव नदी के जलस्तर और पेयजल आपूर्ति के बीच सीधे संबंध को सामने लाता है। नांदघाट इंटकवेल पर निर्भर गांवों के लिए नदी में पर्याप्त पानी रहना जरूरी है। जलस्तर कम होने पर पानी इंटकवेल तक पहुंचाने के लिए अस्थायी उपायों का सहारा लेना पड़ सकता है।
पिछले साल नवंबर में करनी पड़ी थी अस्थायी व्यवस्था
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले वर्ष 15 नवंबर के बाद इंटकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ी थी। इस बार अक्टूबर की शुरुआत में ही ऐसी स्थिति बनना चिंता का विषय है।
नांदघाट में शिवनाथ नदी के पुराने एनिकट में रिसाव की समस्या दूर करने के लिए जल संसाधन विभाग ने लंबे समय तक प्रयास किए। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। नदी के दूसरे हिस्से में रेत उत्खनन से कटाव बढ़ने और धारा की दिशा बदलने का भी असर पड़ने की बात सामने आई है।
नदी के प्रवाह में बदलाव और एनिकट से जुड़ी समस्याओं के कारण पानी को इंटकवेल तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में पेयजल व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अस्थायी उपायों के साथ स्थायी समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है।
12 करोड़ रुपये का नया एनिकट अब भी प्रस्तावित
शिवनाथ नदी में पानी रोकने और पेयजल आपूर्ति की समस्या को दूर करने के लिए नांदघाट में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से नया एनिकट बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रस्ताव को अब तक स्वीकृति नहीं मिली है।
पिछले साल मिट्टी का अस्थायी बांध बनाकर पेयजल आपूर्ति बहाल करने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन ऐसी व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं मानी जा सकती। नदी में जलस्तर घटने पर बार-बार अस्थायी इंतजाम करने की जरूरत पड़ सकती है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार, नदी के दूसरे हिस्से में कटाव रोकने का काम नवंबर से शुरू करने की तैयारी है। इसके साथ ही नए एनिकट की योजना को अनुपूरक बजट में शामिल कराने का प्रयास भी किया जा रहा है। क्षेत्र में बैराज निर्माण का प्रस्ताव भी पाइपलाइन में है।
54 गांवों की करीब 70 हजार आबादी निर्भर

नांदघाट इंटकवेल से लगभग 54 गांवों की करीब 70 हजार आबादी को पेयजल मिलता है। ऐसे में नदी के जलस्तर में गिरावट का असर केवल एक गांव या एक बस्ती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़ी आबादी की पानी की जरूरतों से जुड़ा हुआ है।
जल संसाधन विभाग के एसई सीएस शिवहरे के अनुसार, पेयजल आपूर्ति लगातार जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नवंबर में कटाव रोकने का काम शुरू करने की तैयारी है और एनिकट निर्माण की योजना को मंजूरी दिलाने के लिए प्रयास जारी हैं।
फिलहाल विभाग के सामने दो अहम चुनौतियां हैं—एक ओर तत्काल पेयजल आपूर्ति बनाए रखना और दूसरी ओर नदी में कटाव तथा पानी के प्रवाह से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान तलाशना।
बेमेतरा के जल तंत्र के लिए शिवनाथ नदी क्यों अहम?

बेमेतरा जिले के चारों ब्लॉक की बड़ी आबादी की पेयजल व्यवस्था शिवनाथ नदी पर निर्भर बताई जाती है। नदी का जलस्तर घटने से नांदघाट इंटकवेल पर निर्भर गांवों के लिए परेशानी बढ़ सकती है।
शिवनाथ नदी का महत्व केवल स्थानीय पेयजल आपूर्ति तक सीमित नहीं है। खारुन, हाफ, फोक, सकरी और सुरही जैसी नदियों का पानी शिवनाथ के रास्ते महानदी तक पहुंचता है। इस कारण नदी के संरक्षण और उसके प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना व्यापक जल तंत्र के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
नदी में बाढ़ के दौरान नाव चलने और कुछ ही दिनों बाद इंटकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए फावड़े से रास्ता बनाने की स्थिति जल प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर करती है।
जल संकट से निपटने के लिए स्थायी समाधान की जरूरत
शिवनाथ नदी के जलस्तर में तेजी से आए बदलाव ने नांदघाट की पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ 54 गांवों की करीब 70 हजार आबादी की पानी की जरूरत है, तो दूसरी तरफ पुराने एनिकट में रिसाव, नदी के कटाव और पानी के प्रवाह में बदलाव जैसी समस्याएं हैं।
करीब 12 करोड़ रुपये के नए एनिकट प्रस्ताव को मंजूरी मिलने, कटाव रोकने का काम शुरू होने और अस्थायी व्यवस्था की जगह स्थायी समाधान तैयार होने से क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था को राहत मिल सकती है। हालांकि, इन योजनाओं की समयसीमा और स्वीकृति की स्थिति पर आगे की प्रगति महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल विभाग ने पेयजल आपूर्ति जारी रखने के प्रयासों की बात कही है। आने वाले दिनों में शिवनाथ नदी का जलस्तर, इंटकवेल तक पानी पहुंचाने की स्थिति और प्रस्तावित निर्माण कार्यों की प्रगति पर 54 गांवों के लोगों की नजर रहेगी।