CJP Protest Supreme Court: दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर बंद किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। पार्क बंद करने के नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के फैसले के खिलाफ व्यापारियों की ओर से याचिका दायर की गई थी। कारोबारियों ने आशंका जताई कि इस कदम से त्योहारों के मौसम में उनके व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए सभी संबंधित पक्षों से समझदारी से काम लेने की उम्मीद जताई। अदालत ने छोटे दुकानदारों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का भी उल्लेख किया।
‘कोई आंदोलन करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना’

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने विरोध प्रदर्शन, व्यापार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन की जरूरत पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कोई विरोध करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है और कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है। ये सभी मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
पीठ ने कहा कि छोटे दुकानदारों के लिए त्योहारों का समय आजीविका कमाने के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में किसी भी फैसले का असर उन परिवारों पर पड़ सकता है, जो रोजाना के कारोबार पर निर्भर हैं।
अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष स्थिति को समझते हुए जिम्मेदारी से काम करेंगे। सुनवाई के दौरान यह भी संकेत दिया गया कि यदि प्रशासन की ओर से उठाए गए कदम अनुचित या जरूरत से ज्यादा पाए जाते हैं, तो अदालत उचित परिस्थितियों में हस्तक्षेप कर सकती है।
26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई की संभावना

व्यापारियों की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि मामले को 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि NDMC ने गुरुवार देर रात नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने का निर्देश दिया था। व्यापारियों का कहना है कि पार्क बंद रहने से वहां कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा और त्योहारों से पहले उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
न्यायमूर्ति बागची की टिप्पणी के मुताबिक, यदि उठाए गए कदम जरूरत से ज्यादा पाए जाते हैं, तो अदालत के पास हस्तक्षेप करने का अधिकार है। हालांकि, तत्काल सुनवाई से इनकार के बाद पार्क बंद करने के फैसले की वैधता पर कोई अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है।
व्यापारियों ने याचिका में क्या कहा?
इस मामले में दिल्ली किराना कमिटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन की ओर से याचिका दायर की गई है। वकील जय अनंत देहादराय ने अदालत में याचिका का उल्लेख करते हुए व्यापारियों की चिंताओं को सामने रखा।
याचिका में दावा किया गया कि सेंट्रल पार्क बंद होने से प्रतिदिन करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह आंकड़ा याचिकाकर्ताओं की ओर से दिया गया अनुमान है; इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नुकसान के आंकड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
व्यापारियों ने कहा कि त्योहारों का मौसम नजदीक है और इस समय कारोबार पर रोक लगने से दुकानदारों तथा उनसे जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। उन्होंने पार्क बंद करने के आदेश पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।
NDMC के फैसले को लेकर विवाद

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद की ओर से सेंट्रल पार्क बंद करने का निर्देश प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर जारी किए जाने की बात याचिका में कही गई है। इसके बाद कारोबारियों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
इस मामले में एक तरफ प्रदर्शन आयोजित करने और अपनी बात रखने के अधिकार से जुड़ा सवाल है, तो दूसरी तरफ सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और व्यापारियों की आजीविका की चिंता भी सामने आई है।
अदालत की टिप्पणियों से स्पष्ट हुआ कि मामले में विरोध प्रदर्शन, सार्वजनिक सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन अहम मुद्दा है। हालांकि, पार्क बंद करने के प्रशासनिक फैसले पर अंतिम स्थिति आगे की सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों के बाद ही स्पष्ट होगी।
CJP के अभिजीत दीपके ने की प्रदर्शन में शामिल होने की अपील
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके ने लोगों से शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज के साथ एकत्र होने की अपील की थी।
दीपके ने आरोप लगाया कि CJP के सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रांका को तिरंगा फहराने के कारण जेल में डाल दिया गया। यह आरोप उनकी ओर से लगाया गया है और इससे जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर पार्क बंद करने का फैसला विवाद का विषय बना। इसके बाद व्यापारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई।
प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की आजीविका के बीच संतुलन का सवाल
CJP Protest Supreme Court मामले में प्रमुख सवाल यह है कि प्रस्तावित प्रदर्शन, सार्वजनिक सुरक्षा और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल सुनवाई से इनकार किया है, लेकिन जरूरत से ज्यादा प्रशासनिक कदम उठाए जाने की स्थिति में न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना का उल्लेख किया है। व्यापारियों की ओर से संभावित आर्थिक नुकसान की आशंका जताई गई है, जबकि प्रदर्शन के आयोजकों ने अपनी मांगों को सामने रखने की अपील की है।
अब मामले की अगली सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि NDMC के आदेश के पीछे क्या आधार थे, पार्क बंद रखने की जरूरत कितनी थी और इससे प्रभावित व्यापारियों की चिंताओं पर क्या विचार किया जाता है।