Chhattisgarh Bitumen Price Hike: बिटुमिन संकट से 13 हजार करोड़ के निर्माण कार्य प्रभावित, सड़क और भवन निर्माण पर ब्रेक

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Chhattisgarh Bitumen Price Hike: छत्तीसगढ़ में बिटुमिन यानी डामर की कीमतों में भारी उछाल और आपूर्ति की परेशानी का असर सड़क, फ्लाईओवर और भवन निर्माण परियोजनाओं पर पड़ रहा है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े संगठनों के मुताबिक, डामर की कीमत करीब 45 हजार रुपए प्रति टन से बढ़कर लगभग 1 लाख रुपए प्रति टन तक पहुंच गई है। इसके चलते प्रदेश में करीब 13 हजार करोड़ रुपए के निर्माण कार्य प्रभावित होने का अनुमान है।

बारिश का दौर थमने के बाद आमतौर पर सड़कों की मरम्मत, नई सड़कों के निर्माण और फ्लाईओवर परियोजनाओं में तेजी आती है। लेकिन इस बार डामर की बढ़ी कीमतों और उपलब्धता की समस्या ने निर्माण एजेंसियों तथा ठेकेदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लोक निर्माण विभाग ने भी बिटुमिन की आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी है। मामले को लेकर राज्य स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।

45 हजार से बढ़कर करीब 1 लाख रुपए प्रति टन हुई कीमत

Chhattisgarh Bitumen Price Hike: बिटुमिन संकट से 13 हजार करोड़ के निर्माण कार्य प्रभावित, सड़क और भवन निर्माण पर ब्रेक

निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च-अप्रैल 2026 में बिटुमिन की कीमत करीब 45 हजार रुपए प्रति टन थी। मई में इसकी कीमत बढ़कर लगभग 1.05 लाख रुपए प्रति टन तक पहुंच गई। फिलहाल भी इसकी कीमत करीब 1 लाख रुपए प्रति टन बताई जा रही है।

डामर की कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी का असर उन परियोजनाओं पर अधिक पड़ रहा है, जिनके टेंडर पहले की दरों पर जारी किए गए थे। पुराने बजट और निर्धारित लागत के आधार पर काम कर रहे ठेकेदारों के लिए मौजूदा कीमतों पर निर्माण जारी रखना मुश्किल हो रहा है।

इसके अलावा आपूर्ति में बाधा के कारण कई परियोजनाओं की समयसीमा और काम की गति पर भी असर पड़ने की आशंका है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े संगठनों का कहना है कि लागत में हुई असाधारण वृद्धि के अनुरूप राहत नहीं मिलने पर ठेकेदारों के सामने आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

13 हजार करोड़ रुपए के काम प्रभावित होने का अनुमान

Chhattisgarh Bitumen Price Hike का असर प्रदेश के सड़क और भवन निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर दिखाई दे रहा है। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) के छत्तीसगढ़ चैप्टर के अनुसार, बिटुमिन की बढ़ी कीमतों के कारण करीब 9 हजार करोड़ रुपए के सड़क निर्माण कार्य और लगभग 4 हजार करोड़ रुपए के भवन निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं।

इस तरह कुल मिलाकर करीब 13 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं पर असर पड़ने का अनुमान है। इनमें विभिन्न विभागों और निर्माण एजेंसियों से जुड़े कार्य शामिल हैं।

लोक निर्माण विभाग के लगभग 2 हजार करोड़ रुपए के प्रगतिरत कार्यों पर भी बिटुमिन की किल्लत और कीमतों में बढ़ोतरी का असर बताया गया है। हालांकि, प्रभावित परियोजनाओं की वास्तविक संख्या और उनमें हुई देरी का विस्तृत आकलन संबंधित विभागों की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 3304 किलोमीटर काम बाकी

डामर की कमी का असर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण पर भी पड़ सकता है। लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, 16 जुलाई 2026 तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत छत्तीसगढ़ में 3304 किलोमीटर सड़क निर्माण का काम शेष था।

इसमें बस्तर सहित प्रदेश के अन्य जिलों की परियोजनाएं शामिल हैं। इन सड़कों का निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों और जरूरी सेवाओं से जोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन कार्यों के लिए करीब 600 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई थी। लेकिन बिटुमिन की महंगी कीमतों और आपूर्ति संबंधी परेशानियों के कारण निर्माण कार्यों की गति प्रभावित होने की बात सामने आई है।

ग्रामीण सड़कों के निर्माण में देरी होने से दूरस्थ गांवों में आवागमन, बाजारों तक पहुंच और अन्य जरूरी सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। खासकर आदिवासी अंचलों में सड़क परियोजनाओं की समय पर पूर्णता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

केंद्र से राहत, राज्य में सहायता बढ़ाने की मांग

बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के छत्तीसगढ़ चैप्टर का कहना है कि निर्माण सामग्री की कीमतों में असाधारण वृद्धि के कारण पुराने टेंडर की दरों पर काम करना कठिन हो गया है। संगठन ने बढ़ी लागत के अनुपात में राहत जारी रखने की जरूरत बताई है।

संगठन के मुताबिक, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पात्र ठेकेदारों को बिटुमिन और डीजल की बढ़ी लागत की भरपाई से जुड़ी व्यवस्था 31 दिसंबर तक बढ़ाई है। इससे संबंधित पात्र परियोजनाओं के ठेकेदारों को राहत मिल सकती है।

वहीं, छत्तीसगढ़ में भी राज्य सरकार ने मांग के बाद मई में सीमित अवधि के लिए बिटुमिन की असाधारण मूल्यवृद्धि पर आंशिक मुआवजे को मंजूरी दी थी। निर्माण क्षेत्र से जुड़े संगठनों का कहना है कि लागत का दबाव अब भी बना हुआ है, इसलिए इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

भवन निर्माण क्षेत्र में जमा मद के कार्यों की लागत अधिकतम करीब 600 करोड़ रुपए बताई गई है। ऐसे में राज्य स्तर पर मुआवजे और राहत की व्यवस्था को लेकर आगे क्या निर्णय होता है, इस पर निर्माण एजेंसियों की नजर है।

बिटुमिन की आपूर्ति पर भी असर

कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ बिटुमिन की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बनी हुई है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में बिटुमिन का आयात पिछले साल के इसी महीने की तुलना में घटकर करीब 2.36 लाख टन रह गया था।

खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष और उससे जुड़े ऊर्जा बाजार के दबाव को बिटुमिन की कीमतों में तेजी की एक वजह बताया जा रहा है। हालांकि, कीमतों में बदलाव पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की लागत, आयात और घरेलू आपूर्ति जैसे कई कारक असर डाल सकते हैं।

डामर सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्री है। इसकी कीमत और उपलब्धता में बदलाव होने पर सड़क निर्माण की लागत सीधे प्रभावित होती है। इसलिए लंबे समय तक महंगी आपूर्ति बनी रहने से सरकारी और निजी दोनों तरह की परियोजनाओं पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

लोक निर्माण विभाग ने सरकार को भेजे प्रस्ताव

लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश बंसल के मुताबिक, प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में विभाग के निर्माण कार्य जारी हैं। उन्होंने बताया कि बिटुमिन की आपूर्ति बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उनके अनुसार, अलग-अलग मांगों के संबंध में प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे गए हैं। इन प्रस्तावों पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इससे प्रभावित परियोजनाओं को राहत मिलने की संभावना तय होगी।

विभाग के सामने चुनौती यह है कि निर्माण कार्यों की गति बनाए रखने के साथ लागत में हुई बढ़ोतरी और सामग्री की उपलब्धता के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। वहीं, ठेकेदारों और निर्माण संगठनों की मांग है कि असाधारण मूल्यवृद्धि के दौरान राहत की व्यवस्था जारी रखी जाए।

सड़क, फ्लाईओवर और भवन निर्माण पर असर

Chhattisgarh Bitumen Price Hike के कारण निर्माण क्षेत्र में सबसे बड़ी चिंता परियोजनाओं की लागत और समयसीमा को लेकर है। सड़क निर्माण और मरम्मत के काम मौसम पर भी निर्भर करते हैं। बारिश के बाद निर्माण के लिए मिलने वाली अनुकूल अवधि में सामग्री की कमी बनी रहती है, तो काम पूरा करने में देरी हो सकती है।

फ्लाईओवर और अन्य सड़क परियोजनाओं में भी डामर की जरूरत होती है। वहीं, भवन निर्माण से जुड़े कुछ कार्यों पर भी बढ़ी लागत का असर पड़ रहा है। निर्माण सामग्री महंगी होने से ठेकेदारों के खर्च बढ़ते हैं और पहले से तय बजट के भीतर परियोजना पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

फिलहाल लोक निर्माण विभाग और राज्य सरकार के स्तर पर इस समस्या से निपटने के लिए विचार-विमर्श जारी है। आगे राहत व्यवस्था बढ़ाने, आपूर्ति बेहतर करने और प्रभावित परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा जैसे कदम महत्वपूर्ण होंगे।

अब राहत के फैसले पर टिकी निर्माण क्षेत्र की नजर

छत्तीसगढ़ में बिटुमिन की कीमत करीब 1 लाख रुपए प्रति टन तक बने रहने से सड़क और भवन निर्माण क्षेत्र पर दबाव जारी है। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के छत्तीसगढ़ चैप्टर के अनुसार, करीब 13 हजार करोड़ रुपए के कार्य प्रभावित हुए हैं, जबकि लोक निर्माण विभाग ने भी आपूर्ति की समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है।

अब निर्माण क्षेत्र की नजर राज्य सरकार की ओर से राहत व्यवस्था को आगे बढ़ाने और बिटुमिन की आपूर्ति में सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर है। यदि कीमतों और उपलब्धता की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो ग्रामीण सड़कों, शहरी निर्माण परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों की समयसीमा पर असर पड़ सकता है।

प्रभावित परियोजनाओं की लागत और निर्माण कार्यों पर असर से जुड़े आंकड़े निर्माण क्षेत्र के संगठनों तथा उपलब्ध विभागीय जानकारी के आधार पर दिए गए हैं।

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