Raipur E-Challan को लेकर राजधानी रायपुर में वाहन मालिकों की परेशानी सामने आई है। कुछ वाहन चालकों का दावा है कि उन्हें मोबाइल पर SMS नहीं मिला और न ही घर पर चालान का नोटिस पहुंचा, लेकिन परिवहन विभाग के मोबाइल ऐप पर वाहन चेक करने के दौरान हजारों रुपये के लंबित ई-चालान दिखाई दिए। इससे चालान जारी करने और उसकी सूचना वाहन मालिकों तक पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
राजधानी की सड़कों पर लगे इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) कैमरों की मदद से यातायात नियमों के उल्लंघन दर्ज किए जाते हैं। इसके बाद संबंधित वाहन के खिलाफ ई-चालान जारी किया जा सकता है। हालांकि, वाहन मालिकों की शिकायत है कि कई बार उन्हें इसकी जानकारी समय पर नहीं मिलती। ऐसे में चालान लंबे समय तक लंबित रह सकता है और बाद में एक साथ कई चालान सामने आने पर जुर्माने की राशि हजारों रुपये तक पहुंच जाती है।
कुछ वाहन मालिकों ने ऐप पर 4,900 रुपये से लेकर 10,300 रुपये तक के लंबित चालान दिखने की बात कही है। वहीं, कुछ मामलों में कुल जुर्माना 20 हजार रुपये तक होने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि, इन मामलों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रत्येक चालान का अलग-अलग विवरण सामने आना जरूरी है।
ऐप पर स्टेटस चेक करने पर सामने आए लंबित चालान

Raipur E-Challan से जुड़ी परेशानी का पता तब चला, जब वाहन मालिकों ने परिवहन विभाग के मोबाइल ऐप पर अपने वाहन का स्टेटस चेक किया। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, उन्हें पहले चालान की जानकारी नहीं थी। ऐप पर रिकॉर्ड देखने के बाद उन्हें पता चला कि उनके वाहन के खिलाफ एक से ज्यादा चालान दर्ज हैं।
केस 1: कार पर 10,300 रुपये के तीन चालान
पुरानी बस्ती के बंधवापारा निवासी शशांक शर्मा के मुताबिक, उनकी कार का रजिस्ट्रेशन नंबर CG 04 NB 9246 है। उन्होंने बताया कि ऐप पर उनकी कार के खिलाफ कुल 10,300 रुपये के चालान दिखाई दिए। शशांक का दावा है कि उन्हें इन चालानों के बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी और न ही मोबाइल पर कोई मैसेज मिला था।
उनके अनुसार, जब उन्होंने खुद वाहन का स्टेटस चेक किया, तब लंबित चालानों का पता चला। उन्होंने बताया कि उनकी कार के खिलाफ तीन चालान दर्ज दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में चालान की तारीख, उल्लंघन का प्रकार और सूचना भेजे जाने का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होगा।
केस 2: 4,900 रुपये के पांच चालान
न्यू राजेंद्र नगर निवासी विवेक डागा ने भी इसी तरह की शिकायत की है। उनके मुताबिक, उनकी कार का नंबर CG 04 NB 6700 है। उन्हें पहले जानकारी नहीं थी कि वाहन के खिलाफ चालान लंबित हैं।
विवेक डागा के अनुसार, मोबाइल ऐप पर जांच करने पर उनकी कार के खिलाफ पांच अलग-अलग चालान दिखाई दिए, जिनकी कुल राशि 4,900 रुपये बताई गई। उनका कहना है कि उन्हें इन चालानों की जानकारी पहले नहीं मिली थी।
इन दोनों मामलों में वाहन मालिकों के दावों के साथ-साथ चालान के आधिकारिक रिकॉर्ड और सूचना भेजने की प्रक्रिया की जांच जरूरी है। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि नोटिस भेजा गया था या नहीं और यदि भेजा गया था, तो वह संबंधित वाहन मालिक तक क्यों नहीं पहुंचा।
ई-चालान व्यवस्था में सूचना पहुंचना भी जरूरी

ई-चालान व्यवस्था का उद्देश्य यातायात नियमों का उल्लंघन दर्ज करना और कार्रवाई को अधिक पारदर्शी बनाना है। कैमरों की मदद से नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान की जा सकती है, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था पर निगरानी रखने में मदद मिलती है।
लेकिन व्यवस्था की पारदर्शिता केवल चालान जारी करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। वाहन मालिकों को समय पर चालान की जानकारी मिलना भी जरूरी है, ताकि वे रिकॉर्ड की जांच कर सकें, गलती होने पर आपत्ति दर्ज करा सकें और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चालान का निपटारा कर सकें।
यदि किसी वाहन मालिक को लंबे समय तक चालान की जानकारी नहीं मिलती, तो उसे एक साथ कई लंबित चालानों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में चालान की तारीख, उल्लंघन का विवरण, उपलब्ध फोटो या वीडियो साक्ष्य और नोटिस भेजने की स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।
आठ महीने में 8.94 करोड़ रुपये के समन शुल्क जारी
रायपुर कमिश्नरेट में ई-चालान कार्रवाई से संबंधित आंकड़े भी चर्चा में हैं। खबर में उपलब्ध RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच आठ महीनों में कुल 8 करोड़ 94 लाख 32 हजार 350 रुपये के समन शुल्क जारी किए गए।
इन आंकड़ों के अनुसार, मार्च में सबसे अधिक समन शुल्क जारी किया गया। उस महीने राशि करीब 1.94 करोड़ रुपये रही। इसके बाद मई और अप्रैल में भी बड़ी रकम के समन शुल्क जारी किए गए।
महीनेवार आंकड़े इस प्रकार हैं:
| महीना | समन शुल्क की राशि |
|---|---|
| जनवरी | ₹1,08,41,200 |
| फरवरी | ₹95,36,900 |
| मार्च | ₹1,93,94,500 |
| अप्रैल | ₹1,52,00,500 |
| मई | ₹1,75,42,050 |
| जून | ₹44,47,600 |
| जुलाई | ₹63,77,700 |
| अगस्त | ₹60,91,900 |
| कुल | ₹8,94,32,350 |
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। जारी किए गए समन शुल्क की राशि और वास्तव में वसूल की गई राशि अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए इन आंकड़ों को कुल वसूली बताने से पहले संबंधित विभाग से इसकी पुष्टि की जानी चाहिए। उपलब्ध जानकारी में इसे जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान जारी किए गए समन शुल्क की राशि बताया गया है।
ई-चालान के नियम और वाहन मालिकों के अधिकार

ई-चालान से संबंधित प्रक्रिया केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार चलती है। चालान की स्थिति, जारी होने की तारीख और मामले की प्रकृति के आधार पर उसके निपटारे की प्रक्रिया अलग हो सकती है।
90 दिन की समय-सीमा का क्या मतलब है?
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 167 में इलेक्ट्रॉनिक चालान और उससे जुड़ी प्रक्रिया के प्रावधान हैं। चालान मिलने पर वाहन मालिक को निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा की जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड से जांचनी चाहिए। नियमों के तहत नोटिस और निपटारे से संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं, लेकिन हर मामले में कार्रवाई की स्थिति समान हो, यह जरूरी नहीं है।
इसलिए यदि ऐप पर कोई पुराना चालान दिखाई देता है, तो केवल उसकी राशि देखकर निर्णय न लें। चालान की तारीख, भुगतान की स्थिति, नोटिस का विवरण और यह कि मामला न्यायालय में भेजा गया है या नहीं—इन सभी बातों की पुष्टि करें।
लंबित चालान से लाइसेंस या वाहन संबंधी काम प्रभावित हो सकते हैं
कुछ परिस्थितियों में लंबित चालान के कारण वाहन पंजीकरण या ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित सेवाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, यह संबंधित नियमों और चालान की स्थिति पर निर्भर करता है। वाहन मालिकों को किसी भी आवेदन में परेशानी आने पर संबंधित परिवहन कार्यालय या ट्रैफिक पुलिस से जानकारी लेनी चाहिए।
मामला वर्चुअल कोर्ट में भी जा सकता है
कुछ चालान वर्चुअल कोर्ट या संबंधित न्यायालय में भेजे जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में भुगतान या विवाद का निपटारा संबंधित न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। यदि वाहन मालिक चालान को गलत मानता है, तो उसे आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध विकल्पों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए।
परिवहन विभाग ने क्या कहा?
अपर आयुक्त, परिवहन विभाग डी. रविशंकर के मुताबिक, कई बार वाहन मालिकों के मोबाइल नंबर या मकान का पता बदल जाने के कारण चालान से जुड़ी सूचना उन तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने कहा कि इस मामले को चेक करवाया जाएगा।
उन्होंने वाहन मालिकों को सलाह दी कि वे अपने वाहन पर दर्ज चालान की पुष्टि के लिए नजदीकी ट्रैफिक थाने से संपर्क करें। यह सलाह उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें ऐप पर चालान दिखाई दे रहा है, लेकिन उसके संबंध में कोई मैसेज या नोटिस मिलने की जानकारी नहीं है।
हालांकि, मोबाइल नंबर या पते में बदलाव सूचना नहीं पहुंचने का एक संभावित कारण हो सकता है। प्रत्येक शिकायत में यह जांचना जरूरी होगा कि चालान कब जारी हुआ, संबंधित रिकॉर्ड में कौन-सा मोबाइल नंबर और पता दर्ज था और सूचना भेजने की प्रक्रिया पूरी हुई थी या नहीं।
वाहन मालिक ऐसे चेक करें अपना ई-चालान
Raipur E-Challan से जुड़ी परेशानी से बचने के लिए वाहन मालिक समय-समय पर अपने वाहन का चालान स्टेटस जांच सकते हैं।
- आधिकारिक पोर्टल खोलें: भारत सरकार के ई-चालान पोर्टल https://echallan.parivahan.gov.in/ पर जाएं।
- वाहन का विवरण भरें: उपलब्ध विकल्प के अनुसार वाहन नंबर या चालान नंबर दर्ज करें।
- लंबित चालान देखें: चालान की तारीख, राशि, उल्लंघन का विवरण और भुगतान की स्थिति जांचें।
- रिकॉर्ड सुरक्षित रखें: चालान का विवरण डाउनलोड या स्क्रीनशॉट के रूप में सुरक्षित रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारी को दिखाया जा सके।
- गलती होने पर पुष्टि करें: यदि चालान गलत लगता है या उसकी सूचना नहीं मिली, तो आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध शिकायत विकल्प देखें अथवा नजदीकी ट्रैफिक थाने से संपर्क करें।
वाहन मालिकों को अपने मोबाइल नंबर और पते का विवरण भी अपडेट रखना चाहिए, ताकि विभागीय सूचनाएं सही जगह पहुंच सकें।
पारदर्शिता के लिए जरूरी है समय पर सूचना
रायपुर में सामने आए इन मामलों ने ई-चालान व्यवस्था में सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। डिजिटल कैमरों से नियमों का उल्लंघन दर्ज करना यातायात प्रबंधन का अहम हिस्सा है, लेकिन वाहन मालिकों को चालान की जानकारी मिलना भी उतना ही आवश्यक है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतों की जांच में क्या सामने आता है और सूचना न पहुंचने के मामलों में विभाग क्या कदम उठाता है। फिलहाल वाहन मालिकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपने वाहन का चालान स्टेटस आधिकारिक माध्यम से जांचें, रिकॉर्ड का मिलान करें और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में संबंधित विभाग से पुष्टि करें।