Bharatmala Road Crack: उद्घाटन से पहले भारतमाला सड़क में दरार,15 तरह के टेस्ट से खुलेगी गुणवत्ता की पोल

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Bharatmala Road Crack: रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना के तहत बनी सड़क पर उद्घाटन से पहले दरार आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की स्थानीय टीम के साथ नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के अधिकारियों ने भी जांच शुरू कर दी है। सड़क के प्रभावित हिस्से से अलग-अलग परतों के नमूने लेकर कुल 15 तरह के परीक्षण कराने की जानकारी सामने आई है।

इस मामले में स्वतंत्र जांच के लिए दिल्ली स्थित राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से मान्यता प्राप्त लैब में भी सैंपलिंग कराई गई है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सड़क पर दरार आने की वजह निर्माण सामग्री में कमी, निर्धारित मोटाई से जुड़ी समस्या, परतों की कमजोर पकड़, उचित कम्पैक्शन का अभाव या पानी की निकासी में गड़बड़ी है या नहीं।

दरार सामने आने के बाद NHAI ने संबंधित निर्माण एजेंसी को नोटिस भी जारी किया है। फिलहाल प्रभावित हिस्से की मरम्मत कराए जाने की जानकारी दी गई है, लेकिन सड़क की गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

15 तरह के टेस्ट से कैसे खुलेगी सड़क की गुणवत्ता की पोल?

Bharatmala Road Crack: उद्घाटन से पहले भारतमाला सड़क में दरार,15 तरह के टेस्ट से खुलेगी गुणवत्ता की पोल

Bharatmala Road Crack मामले में जांच के दौरान सड़क की केवल ऊपरी सतह ही नहीं, बल्कि नीचे की परतों की स्थिति भी परखी जाएगी। सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, परतों की मोटाई, उनकी मजबूती और भार सहने की क्षमता का आकलन करने के लिए अलग-अलग तकनीकी परीक्षण किए जाते हैं।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस मामले में 15 तरह के परीक्षणों के लिए नमूने जुटाए गए हैं। हालांकि, सभी 15 परीक्षणों की आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है। सड़क की गुणवत्ता जांचने में इस्तेमाल होने वाले कुछ प्रमुख परीक्षण इस प्रकार हैं।

1. कोर कटिंग टेस्ट

इस परीक्षण में सड़क की सतह से बेलनाकार नमूने निकाले जाते हैं। इनके जरिए बिटुमिनस परत की मोटाई, परतों की बनावट और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री का आकलन किया जा सकता है। इससे यह जांचने में मदद मिलती है कि सड़क निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार बनाई गई है या नहीं।

2. बिटुमिन कंटेंट टेस्ट

डामर की सड़क में बिटुमिन की मात्रा महत्वपूर्ण होती है। इस परीक्षण से पता लगाया जाता है कि मिश्रण में बिटुमिन निर्धारित अनुपात में मौजूद है या नहीं। मात्रा में कमी या असंतुलन सड़क की मजबूती और टिकाऊपन को प्रभावित कर सकता है।

3. एग्रीगेट ग्रेडेशन टेस्ट

सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली गिट्टी और दूसरे कणों के आकार तथा उनके अनुपात की जांच इस परीक्षण के जरिए की जाती है। यदि सामग्री का अनुपात सही नहीं है, तो सड़क की परत की संरचना और उसकी मजबूती प्रभावित हो सकती है।

4. फील्ड डेंसिटी और कम्पैक्शन टेस्ट

सड़क के नीचे मिट्टी और अन्य निर्माण परतों को उचित तरीके से दबाना यानी कम्पैक्शन करना जरूरी होता है। इस परीक्षण से पता लगाया जाता है कि परतों का घनत्व निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। कमजोर कम्पैक्शन के कारण सड़क में बैठने, धंसने या दरार पड़ने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

5. फॉलिंग वेट डिफ्लेक्टोमीटर टेस्ट

इस परीक्षण में सड़क पर नियंत्रित भार डालकर उसके झुकाव या प्रतिक्रिया को मापा जाता है। इससे सड़क की संरचनात्मक क्षमता और विभिन्न परतों के प्रदर्शन का आकलन करने में मदद मिलती है। हालांकि, किसी दरार का वास्तविक कारण निर्धारित करने के लिए इसे दूसरे परीक्षणों और निरीक्षण के साथ देखा जाता है।

6. रोड रफनेस टेस्ट

इस परीक्षण से सड़क की सतह की समतलता और उसमें मौजूद उतार-चढ़ाव का तकनीकी आकलन किया जाता है। इससे वाहन चलाने के दौरान सड़क की सतह कैसी है, इसका पता चलता है। यह परीक्षण सड़क की उपयोगिता और सतह की गुणवत्ता का आकलन करने में सहायक होता है।

इन परीक्षणों के अलावा जरूरत के अनुसार सामग्री की गुणवत्ता, परतों की मजबूती, सड़क की संरचना और जल निकासी से संबंधित जांच भी की जा सकती है। हालांकि, इस मामले में कराए जा रहे सभी 15 परीक्षणों के नाम और उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

कांकेर में सरगी-बासनवाही के बीच सामने आई थी दरार

यह मामला कांकेर जिले में सरगी और बासनवाही के बीच मौलीपारा के पास सड़क पर दरार आने से जुड़ा है। सड़क में दरार दिखाई देने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे थे।

स्थानीय स्तर पर मामला उठने और मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद जांच की प्रक्रिया तेज होने की जानकारी सामने आई है। अब NHAI की स्थानीय टीम के साथ मुख्यालय के अधिकारी भी प्रभावित हिस्से का निरीक्षण कर चुके हैं और नमूने लेकर परीक्षण कराए जा रहे हैं।

इस जांच से यह समझने में मदद मिल सकती है कि दरार केवल ऊपरी परत तक सीमित थी या सड़क की निचली परतों में भी कोई समस्या मौजूद है। यदि निर्माण सामग्री या निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन में कमी सामने आती है, तो उसके आधार पर संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी उठ सकता है।

सड़क निर्माण से किसानों और विद्यार्थियों की परेशानी भी बढ़ी

रायपुर-विशाखापट्टनम हाईवे के निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने केवल सड़क की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि आवागमन की समस्याओं को लेकर भी चिंता जताई है। मालवीपारा पंचायत के कुछ किसानों का कहना है कि हाईवे बनने के कारण उनके खेतों तक पहुंचने का रास्ता बाधित हो गया है।

किसान उत्तम साहू, देवेंद्र नेताम और लोखनाथ मंडावी के मुताबिक, खेतों तक पहुंचने के लिए पहले इस्तेमाल होने वाला रास्ता प्रभावित हुआ है। इससे खेती-किसानी से जुड़े कामों में परेशानी हो रही है।

गांव के पूर्व उपसरपंच हनुमान पांडेय ने बताया कि सड़क के दूसरी ओर हाईस्कूल स्थित है। स्कूल के लिए नई जमीन तलाश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ग्रामीणों ने नए शैक्षणिक सत्र से पहले स्कूल की व्यवस्था करने की मांग रखी थी।

स्थानीय लोगों की इन शिकायतों से स्पष्ट है कि बड़े राजमार्गों के निर्माण के दौरान सड़क की गुणवत्ता के साथ-साथ आसपास के गांवों के संपर्क मार्ग, खेतों तक पहुंच और विद्यार्थियों की आवाजाही की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है।

125 किलोमीटर लंबा छह लेन हाईवे, लागत करीब 4,146 करोड़ रुपये

रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना का छत्तीसगढ़ वाला हिस्सा करीब 125 किलोमीटर लंबा बताया जा रहा है। इस छह लेन हाईवे की लागत लगभग 4,146 करोड़ रुपये बताई गई है। यह परियोजना क्षेत्रीय संपर्क और सड़क परिवहन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है।

इतनी बड़ी लागत वाली परियोजना में सड़क की गुणवत्ता और टिकाऊपन की जांच महत्वपूर्ण है। खासकर उद्घाटन से पहले दरार दिखाई देने पर निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच और भी जरूरी हो जाती है। हालांकि, केवल दरार दिखाई देने से निर्माण में लापरवाही साबित नहीं होती। इसके पीछे के कारणों का पता तकनीकी रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर ही लगाया जा सकता है।

NHAI ने निर्माण एजेंसी को जारी किया नोटिस

दरार वाले हिस्से को लेकर NHAI ने संबंधित निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी किया है। विभागीय जांच के साथ थर्ड पार्टी परीक्षण भी कराया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सड़क की गुणवत्ता और दरार के संभावित कारणों का तकनीकी आकलन करना है।

NHAI के धमतरी प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर शमशेर सिंह के मुताबिक, रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला सड़क पर बासनवाही-मालवीपारा के आसपास जहां दरारें आई थीं, वहां से नमूने लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि विभागीय जांच जारी है और थर्ड पार्टी से भी जांच कराई जा रही है। उनके अनुसार, फिलहाल सड़क में सुधार करा दिया गया है।

अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सड़क पर दरार किस वजह से आई और निर्माण के दौरान तय तकनीकी मानकों का पालन हुआ था या नहीं। यदि किसी स्तर पर खामी सामने आती है, तो आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और लागू नियमों के अनुसार की जा सकती है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें

Bharatmala Road Crack का मामला अब तकनीकी जांच के नतीजों पर निर्भर है। 15 तरह के परीक्षणों और स्वतंत्र लैब की जांच से सड़क की विभिन्न परतों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इससे दरार के कारणों और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकती है।

फिलहाल प्रभावित हिस्से की मरम्मत कराए जाने की बात कही गई है, लेकिन स्थायी समाधान और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच रिपोर्ट अहम होगी। साथ ही, स्थानीय किसानों और विद्यार्थियों की आवागमन संबंधी समस्याओं का समाधान भी जरूरी है, ताकि हाईवे निर्माण से क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होने के साथ गांवों के लोगों को भी सुविधा मिल सके।

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