Karwa Chauth 2026: करवा चौथ 2026 का पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखेंगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार करवा चौथ पर परिधि, बुधादित्य और लक्ष्मीनारायण योग का संयोग बताया जा रहा है। शाम को पूजा-अर्चना और करवा चौथ की कथा सुनने के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलेंगी।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी पर्व को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। नेहरू नगर स्थित करुणाधाम आश्रम में 101 जोड़ों के सामूहिक पूजन का आयोजन प्रस्तावित है। वहीं, तुलसी नगर के नर्मदा मंदिर में भी सामूहिक पूजा रखी गई है। भोपाल में चंद्रोदय के समय को लेकर अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनटों का अंतर है। उपलब्ध पंचांग गणनाओं के अनुसार, चंद्रमा के दर्शन लगभग रात 8:24 से 8:31 बजे के बीच होने की संभावना है।
करवा चौथ 2026: कब है व्रत और क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?

करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं। कई परिवारों में निर्जला व्रत रखने की परंपरा है, जिसमें दिनभर अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता। शाम को पूजा और व्रत कथा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
भोपाल के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार, करवा चौथ की पूजा का मुहूर्त शाम 5:44 बजे से 7 बजे तक बताया गया है। कुछ पंचांगों में पूजा का समय अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग या अपने पुरोहित से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
करवा चौथ 2026 की प्रमुख जानकारी:
- व्रत की तारीख: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार
- पूजा का शुभ मुहूर्त: भोपाल में उपलब्ध एक पंचांग के अनुसार शाम 5:44 से 7 बजे तक
- चंद्रोदय: अलग-अलग पंचांगों के अनुसार लगभग रात 8:24 से 8:31 बजे के बीच
- व्रत खोलने की विधि: चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद पारंपरिक रीति से व्रत खोला जाता है
चंद्रोदय का वास्तविक समय स्थान और क्षितिज की स्थिति के कारण कुछ मिनट अलग हो सकता है। बादल या ऊंची इमारतें होने पर चंद्रमा दिखाई देने में भी देरी हो सकती है।
तीन शुभ योगों का बताया जा रहा है संयोग

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ 2026 पर परिधि योग, बुधादित्य योग और लक्ष्मीनारायण योग का संयोग बताया जा रहा है। धार्मिक परंपराओं में इन योगों को पूजा-पाठ और शुभ कार्यों से जोड़कर देखा जाता है।
बुधादित्य योग: ज्योतिष में सूर्य और बुध की युति से बनने वाले योग को बुधादित्य योग कहा जाता है। इसे बुद्धि, निर्णय क्षमता और कार्यक्षमता से जोड़ा जाता है।
लक्ष्मीनारायण योग: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मीनारायण योग बनता है। इसे सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है।
परिधि योग: पंचांग में बताए जाने वाले योगों में परिधि योग भी शामिल है। इसकी धार्मिक व्याख्या अलग-अलग परंपराओं में मिलती है।
इस दिन रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा की वृषभ राशि में स्थिति को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया है। हालांकि, शुभ योगों के फल से संबंधित बातें ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
करुणाधाम आश्रम में 101 जोड़े करेंगे सामूहिक पूजन

भोपाल के नेहरू नगर स्थित करुणाधाम आश्रम में करवा चौथ के अवसर पर सामूहिक व्रत और पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सहज शिक्षा समाधान समिति के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन में 101 जोड़े शामिल होंगे।
कार्यक्रम संत शांडिल्य महाराज के सान्निध्य में आयोजित किया जाएगा, जबकि पंडित विष्णु राजौरिया विधि-विधान से पूजन कराएंगे।
आयोजन में पारंपरिक परिधान और सोलह शृंगार के साथ महिलाएं शामिल होंगी। कार्यक्रम को उत्सवपूर्ण बनाने के लिए करवा चौथ से जुड़े लोकगीतों की प्रस्तुति और विशेष सेल्फी पॉइंट की व्यवस्था भी की जाएगी। चंद्र दर्शन के अवसर पर आतिशबाजी का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
आयोजकों की ओर से कार्यक्रम में शामिल होने के इच्छुक लोगों के लिए पंजीयन की व्यवस्था की गई है। सामूहिक पूजन का उद्देश्य लोगों को एक साथ पर्व मनाने और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ने का अवसर देना है।
नर्मदा मंदिर में दोपहर 3 बजे से सामूहिक पूजा
भोपाल के तुलसी नगर स्थित नर्मदा मंदिर में भी करवा चौथ के अवसर पर सामूहिक पूजन का आयोजन किया जाएगा। नर्मदा सेवा समाज और नार्मदीय महिला मंडल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाएं एक साथ पूजा-अर्चना करेंगी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समाज के अध्यक्ष सुशील बिल्लौरे ने बताया कि कार्यक्रम में पंडित वल्लभानंद शुक्ल मंत्रोच्चार के साथ पूजन और व्रत उद्यापन की प्रक्रिया संपन्न कराएंगे। आयोजन दोपहर 3 बजे से शुरू होने की जानकारी दी गई है।
इस कार्यक्रम में शामिल होने की इच्छुक महिलाओं के लिए पंजीयन की व्यवस्था भी रखी गई है। करवा चौथ के अवसर पर शहर के अन्य धार्मिक और सामाजिक संगठनों की ओर से भी तैयारियां की जा रही हैं।
करवा चौथ से पहले बाजारों में बढ़ेगी रौनक
करवा चौथ से पहले बाजारों में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। व्रत और पूजा की तैयारियों के लिए महिलाएं करवा, पूजा की थाली, छलनी, चुनरी, चूड़ियां, मेहंदी और सोलह शृंगार की सामग्री खरीदती हैं।
कई परिवारों में इस पर्व पर नए कपड़े पहनने और पारंपरिक तरीके से सजने-संवरने की भी परंपरा है। बाजारों में पूजा सामग्री के साथ साड़ी, सूट, आभूषण और सजावटी सामान की मांग बढ़ सकती है।
करवा चौथ केवल व्रत तक सीमित नहीं है, बल्कि कई परिवारों में यह मिल-बैठकर पूजा करने और पारिवारिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी होता है। महिलाएं समूह में करवा चौथ की कथा सुनती हैं और पूजा की तैयारियां साझा करती हैं।
करवा चौथ की पूजा में वीरवती की कथा का महत्व
करवा चौथ पर पूजा के दौरान व्रत कथा सुनने की परंपरा है। इनमें वीरवती की कथा विशेष रूप से प्रचलित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, वीरवती ने अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए व्रत रखा था।
कथा में बताया जाता है कि वीरवती के भाइयों ने उसे चंद्रमा निकलने का भ्रम कराया, जिसके बाद उसने व्रत खोल लिया। इसके बाद उसके पति पर संकट आया। वीरवती ने अपनी भक्ति और प्रार्थना के माध्यम से पति की कुशलता के लिए प्रयास किया। इस कथा को व्रत के नियमों, श्रद्धा और संकल्प के महत्व से जोड़कर सुनाया जाता है।
अलग-अलग क्षेत्रों में करवा चौथ की कथा के अन्य रूप भी प्रचलित हैं। पूजा के दौरान महिलाएं पारंपरिक रीति के अनुसार कथा सुनती हैं और पति की लंबी उम्र तथा परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
चंद्र दर्शन के बाद खोला जाएगा व्रत
करवा चौथ पर दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को पूजा करती हैं और चंद्रमा के दर्शन का इंतजार करती हैं। चंद्रमा दिखाई देने पर अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके बाद कई परिवारों में महिलाएं छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं।
भोपाल में चंद्रोदय के समय को लेकर पंचांगों में कुछ मिनटों का अंतर है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार समय की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
कुल मिलाकर, करवा चौथ 2026 गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। भोपाल में 101 जोड़ों के सामूहिक पूजन और नर्मदा मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के साथ पर्व की तैयारियां की जा रही हैं। महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ व्रत रखेंगी। शाम को पूजा, कथा और चंद्र दर्शन के बाद पारंपरिक रीति से व्रत खोला जाएगा।