raipur collectorate renovation adm : रायपुर कलेक्टोरेट रेनोवेशन राजधानी रायपुर के कलेक्टोरेट परिसर की पुरानी तीन मंजिला इमारत में इन दिनों नवीनीकरण का काम जारी है। करीब 1.60 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे इस रेनोवेशन के कारण कार्यालयों की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि अपर कलेक्टर और ADM को एक ही कार्यालय में बैठकर अपने-अपने विभागों का कामकाज संभालना पड़ रहा है। वहीं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी सीमित जगह में काम करना पड़ रहा है।

भवन में निर्माण कार्य चलने के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। इसका असर केवल कार्यालयीन कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने जरूरी कामों के लिए कलेक्टोरेट पहुंचने वाले आम लोगों को भी परेशानी हो रही है। कार्यालयों के स्थान में बदलाव के बावजूद स्पष्ट मार्गदर्शिका नहीं होने से लोगों को संबंधित अधिकारी तक पहुंचने के लिए पूछताछ करनी पड़ रही है।
एक कमरे में सिमटा अपर कलेक्टर और ADM का कामकाज

कलेक्टोरेट की पुरानी बिल्डिंग में रेनोवेशन के चलते कार्यालयों की व्यवस्था बदल गई है। जगह की कमी के कारण अपर कलेक्टर और ADM को एक ही कार्यालय से काम करना पड़ रहा है। दोनों अधिकारियों की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं, लेकिन फिलहाल सीमित जगह में बैठकर विभागीय कामकाज संचालित करना पड़ रहा है।
कार्यालय में अधिकारियों के बैठने के साथ जरूरी दस्तावेजों और अन्य सामान को रखने के लिए भी पर्याप्त जगह की जरूरत होती है। ऐसे में एक ही कमरे में काम करने की व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
इसी तरह आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी छोटे कमरे में शिफ्ट किया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने तक उन्हें उपलब्ध जगह के अनुसार काम करना पड़ रहा है।
रायपुर कलेक्टोरेट रेनोवेशन का उद्देश्य पुराने भवन को बेहतर बनाना है, लेकिन काम पूरा होने तक अधिकारियों और कर्मचारियों को अस्थायी व्यवस्थाओं के बीच काम करना पड़ रहा है।
1.60 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा भवन का नवीनीकरण

कलेक्टोरेट की पुरानी तीन मंजिला बिल्डिंग के नवीनीकरण पर करीब 1.60 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से भवन के अलग-अलग हिस्सों में सुधार और मरम्मत का काम कराया जा रहा है।
रेनोवेशन के तहत खिड़कियों और दरवाजों सहित भवन के अन्य हिस्सों में बदलाव किए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, कुछ कमरों में खिड़कियां नहीं थीं। ऐसे कमरों में दीवार के हिस्से को तोड़कर खिड़कियां बनाई जा रही हैं, ताकि कमरों की व्यवस्था बेहतर की जा सके।
इसके अलावा शौचालयों और कमरों को व्यवस्थित करने सहित पुरानी इमारत की स्थिति सुधारने से जुड़े काम भी किए जा रहे हैं। भवन के नवीनीकरण का मकसद कार्यालयों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
हालांकि, निर्माण कार्य के दौरान कार्यालयों को अस्थायी रूप से व्यवस्थित करना जरूरी होता है। फिलहाल सीमित जगह के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक दर्जन से अधिक विभागों के अधिकारी-कर्मचारी करते हैं काम
कलेक्टोरेट की इस बिल्डिंग में कई महत्वपूर्ण कार्यालय संचालित होते हैं। यहां ADM और अपर कलेक्टर के अलावा डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर सहित अलग-अलग विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बैठते हैं।
जानकारी के अनुसार, भवन में एक दर्जन से अधिक विभागों के अधिकारी-कर्मचारी कामकाज करते हैं। ऐसे में रेनोवेशन के दौरान कार्यालयों की जगह बदलने से व्यवस्थाओं पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
अधिकारियों और कर्मचारियों को उपलब्ध कमरों के अनुसार बैठने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वहीं, कार्यालयों में आने वाले लोगों को यह पता लगाने में परेशानी होती है कि संबंधित अधिकारी फिलहाल किस कमरे में बैठ रहे हैं।
कलेक्टोरेट में जमीन से जुड़े मामलों, आबकारी विभाग और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए लोग पहुंचते हैं। ऐसे में कार्यालयों की स्थिति और उनके स्थान की जानकारी स्पष्ट होना जरूरी है।
दफ्तरों की जगह बदली, तो अधिकारियों को ढूंढने में हो रही परेशानी
रेनोवेशन के कारण कार्यालयों की जगह बदलने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहले लोग जमीन से जुड़े कामों, आबकारी विभाग और अन्य प्रशासनिक मामलों के लिए संबंधित अधिकारी के कार्यालय तक सीधे पहुंच जाते थे।
लेकिन अब कई कार्यालयों की जगह बदलने के कारण लोगों को पहले पूछताछ करनी पड़ रही है। भवन में संबंधित कार्यालयों की जानकारी देने वाली स्पष्ट मार्गदर्शिका नहीं होने से यह परेशानी और बढ़ जाती है।
कलेक्टोरेट में रोजाना अलग-अलग कामों के लिए नागरिक पहुंचते हैं। कई लोगों को जमीन से संबंधित आवेदन, दस्तावेजों और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए अधिकारियों से मिलना होता है। ऐसे में यदि कार्यालय का स्थान स्पष्ट नहीं हो, तो उन्हें एक कमरे से दूसरे कमरे तक जाना पड़ सकता है।
इस स्थिति में कार्यालयों के बाहर स्पष्ट सूचना बोर्ड और दिशा-निर्देश होने से लोगों को संबंधित अधिकारी तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
रेनोवेशन पूरा होने तक बनी रह सकती है अस्थायी व्यवस्था
पुरानी बिल्डिंग में नवीनीकरण का काम पूरा होने तक अधिकारियों और कर्मचारियों को उपलब्ध जगह के अनुसार काम करना पड़ रहा है। निर्माण कार्य के दौरान कमरों में बदलाव, खिड़कियों और दरवाजों की मरम्मत तथा अन्य सुधार कार्यों के कारण कार्यालयीन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
रेनोवेशन पूरा होने के बाद भवन में कमरों और अन्य सुविधाओं की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि, काम कब तक पूरा होगा और कार्यालयों को पहले की तरह व्यवस्थित करने में कितना समय लगेगा, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
फिलहाल अधिकारियों के लिए जरूरी है कि विभागीय कामकाज प्रभावित न हो और नागरिकों को अपने काम के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
आम लोगों की सुविधा के लिए स्पष्ट मार्गदर्शिका जरूरी
कलेक्टोरेट जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिसर में अलग-अलग विभागों के कार्यालय संचालित होते हैं। यहां आने वाले नागरिकों को संबंधित अधिकारी और विभाग की जानकारी आसानी से मिलना जरूरी है।
रेनोवेशन के दौरान यदि कार्यालयों को अस्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता है, तो प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थानों पर सूचना बोर्ड लगाए जा सकते हैं। इससे लोगों को यह पता चल सकेगा कि किस अधिकारी का कार्यालय किस कमरे में है।
इसके अलावा, कार्यालयों के स्थान में बदलाव होने पर संबंधित विभाग की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने से भी लोगों का समय बच सकता है। खासकर जमीन से जुड़े कामों और अन्य जरूरी प्रशासनिक कार्यों के लिए आने वाले नागरिकों को इससे सुविधा मिल सकती है।
क्या है पूरा मामला?
रायपुर कलेक्टोरेट की पुरानी तीन मंजिला बिल्डिंग में करीब 1.60 करोड़ रुपये की लागत से रेनोवेशन का काम जारी है। भवन में खिड़कियों, दरवाजों, कमरों और शौचालयों सहित विभिन्न हिस्सों में सुधार किया जा रहा है। निर्माण कार्य के चलते कार्यालयों में जगह की कमी हो गई है।
इसी वजह से अपर कलेक्टर और ADM को एक ही कार्यालय से काम करना पड़ रहा है, जबकि आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी सीमित जगह में बैठाया गया है। दूसरी ओर, कार्यालयों का स्थान बदलने और स्पष्ट मार्गदर्शिका नहीं होने के कारण आम लोगों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
अब नजर इस बात पर है कि रेनोवेशन का काम कब तक पूरा होता है और तब तक अधिकारियों के साथ-साथ आम नागरिकों की सुविधा के लिए कार्यालयीन व्यवस्था किस तरह बेहतर बनाई जाती है।
यह खबर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। रेनोवेशन पूरा होने की समय-सीमा और कार्यालयों की अंतिम व्यवस्था के संबंध में आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।