Amit Jogi Notice: जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। स्टेट बार काउंसिल ऑफ छत्तीसगढ़ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। यह कार्रवाई अधिवक्ता बृजेशनाथ पांडेय की शिकायत के बाद की गई है। नोटिस जारी होने के बाद अमित जोगी से जुड़े कथित ‘ज्ञानु-जानू’ वीडियो विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा तेज कर दी है।
इस मामले में पहले से ही रायपुर पुलिस जांच कर रही है। बीजेपी नेताओं की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने पूछताछ के लिए अमित जोगी के निवास के बाहर नोटिस भी चस्पा किया था। अब बार काउंसिल की ओर से जारी नोटिस के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
अधिवक्ता की शिकायत पर बार काउंसिल ने जारी किया नोटिस

जानकारी के मुताबिक, अधिवक्ता बृजेशनाथ पांडेय ने अमित जोगी के खिलाफ स्टेट बार काउंसिल ऑफ छत्तीसगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर विचार करने के बाद काउंसिल ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
नोटिस में अमित जोगी से सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने और जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। अब इस मामले में उनकी ओर से दिया जाने वाला जवाब महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में किसी आरोप की पुष्टि या अंतिम कार्रवाई नहीं है। आगे की प्रक्रिया उनके जवाब और बार काउंसिल के विचार के आधार पर तय होगी।
अमित जोगी पर आरोप है कि, पिछले दिनों अमित ने ‘वोट चोरी’ के मामले में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक आपत्तिजनक वीडियो बनाया था और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया था। हालांकि कुछ वक़्त बाद अमित जोगी ने वह पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट से डिलीट कर दिया था और माफ़ी मांगते हुए दूसरा पोस्ट लिखा था।
कथित ‘ज्ञानु-जानू’ वीडियो मामले में रायपुर पुलिस की जांच

अमित जोगी से जुड़ा यह विवाद कथित ‘ज्ञानु-जानू’ वीडियो सामने आने के बाद शुरू हुआ था। बीजेपी नेताओं की शिकायत पर रायपुर के सिविल लाइंस थाना में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 352, 353(2), 356(2) और आईटी एक्ट के तहत दर्ज की गई है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पूछताछ के लिए अमित जोगी के निवास के बाहर नोटिस चस्पा किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। इस बीच सोशल मीडिया पर उनकी सूरत में मौजूदगी की तस्वीरें साझा की गईं। इसके बाद उनके रायपुर से बाहर होने और फरार होने को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, केवल तस्वीरों के आधार पर फरार होने की स्थिति की पुष्टि नहीं की जा सकती।
क्या है पूरा ‘ज्ञानु-जानू’ वीडियो विवाद?

दरअसल, अमित जोगी पर आरोप है कि उन्होंने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाते हुए एक कथित आपत्तिजनक वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया था।
वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया। बीजेपी नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई और शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अमित जोगी ने कुछ समय बाद संबंधित पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दी। पोस्ट हटाए जाने के बाद उन्होंने एक दूसरा संदेश साझा कर अपनी सफाई भी दी थी।
आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद भाजपा नेता लामबंद हो गए थे और राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त, छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष ने लिखा था “मानसिक विक्षिप्त “अमित जोगी” को बिना किसी देरी के मनोपचार केंद्र में भर्ती किया जाये! सूखा नशा का असर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है अब इससे ज़्यादा नहीं झेल सकते हम लोग!”
नोटिस भेजा है और सात दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। अधिवक्ता बृजेशनाथ पांडेय ने स्टेट बार काउंसिल से शिकायत की थी। जिसके बाद उन्हें कारण बताओं नोटिस जारी किया गया है।
पोस्ट हटाने के बाद अमित जोगी ने क्या कहा था?
विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने स्पष्ट किया था कि जिस संदेश को वह लोगों तक पहुंचाना चाहते थे, उसका मूल उद्देश्य उनके नजरिए से अब भी प्रासंगिक है। हालांकि, उन्होंने माना कि उसे प्रस्तुत करने का तरीका उचित नहीं था।
उन्होंने कहा था कि वह ऐसी मर्यादा पार नहीं करना चाहते, जिसे अपने विचारों और विश्वास के अनुरूप सही नहीं मानते। इस सफाई के बावजूद वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद थमा नहीं और मामला पुलिस जांच तक पहुंच गया।
पोस्ट हटाने के बाद यह दी थी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने संबंधित पोस्ट हटाने के बाद सफाई दी थी कि वह जो संदेश देना चाहते थे, उसका मकसद उनके नजरिए से अब भी प्रासंगिक है, लेकिन उसे प्रस्तुत करने का तरीका उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि वह एक ऐसी मर्यादा पार नहीं करना चाहते थे, जिसे वे अपने विचारों और विश्वास के अनुरूप सही नहीं मानते।
वीडियो विवाद सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने अमित जोगी के खिलाफ नाराजगी जताई थी। छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष ने भी सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने अमित जोगी के मानसिक स्वास्थ्य और कथित नशे को लेकर विवादित बयान दिया था।
उनकी इस टिप्पणी के बाद भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। इस तरह वीडियो विवाद केवल कानूनी शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया।
अब सात दिन के जवाब पर टिकी नजरें
फिलहाल अमित जोगी के सामने दो स्तरों पर मामला चल रहा है। एक तरफ कथित वीडियो को लेकर रायपुर पुलिस की जांच जारी है, वहीं दूसरी तरफ स्टेट बार काउंसिल ने अधिवक्ता की शिकायत पर उनसे सात दिनों में जवाब मांगा है।
अब देखना होगा कि अमित जोगी बार काउंसिल के नोटिस पर क्या पक्ष रखते हैं और पुलिस जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। दोनों मामलों में आगे की कार्रवाई संबंधित संस्थाओं की जांच और प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।