Ayushman Yojana Action in CG: छत्तीसगढ़ में आयुष्मान स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत मरीजों के इलाज में कथित अनियमितता करने वाले निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में मरीजों को एजेंटों के जरिए अस्पताल बुलाने, गलत इलाज पैकेज का इस्तेमाल करने और मुफ्त उपचार के नाम पर अतिरिक्त पैसे वसूलने जैसी शिकायतें सही पाए जाने के बाद 16 अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है। इनमें 10 अस्पतालों पर एक साल और 6 अस्पतालों पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया है। कार्रवाई की जद में रायपुर जिले के 8 अस्पताल भी आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के हितों और अस्पतालों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विभाग ने जांच के दौरान अस्पतालों से दस्तावेज और रिकॉर्ड भी जुटाए थे। नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया, लेकिन संबंधित अस्पतालों के स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
Ayushman Yojana Action in CG: आखिर क्यों हुई 16 अस्पतालों पर कार्रवाई?

आयुष्मान योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को निर्धारित पैकेज के अनुसार कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाती है। लेकिन जांच में कुछ निजी अस्पतालों पर इस व्यवस्था का कथित दुरुपयोग करने के आरोप सामने आए।
शिकायतों के मुताबिक, कुछ अस्पतालों में एजेंटों के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों से मरीजों को बुलाया जा रहा था। सामान्य बीमारी से पीड़ित मरीजों को गंभीर बताकर उनके नाम पर महंगे इलाज के पैकेज ब्लॉक किए जाने के आरोप भी लगे।
इसके अलावा कुछ मामलों में सामान्य मरीजों को आईसीयू में भर्ती दिखाकर योजना का लाभ लेने और मुफ्त उपचार के बावजूद मरीजों से अतिरिक्त रकम वसूलने की शिकायतें मिली थीं। जांच के दौरान इन शिकायतों से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों की पड़ताल की गई।
30 सितंबर को आठ जिलों के 19 अस्पतालों की हुई थी जांच
लगातार शिकायतें मिलने के बाद आयुष्मान स्वास्थ्य सहायता योजना की स्टेट नोडल एजेंसी की टीम ने 30 सितंबर को प्रदेश के कई जिलों में अस्पतालों का निरीक्षण किया था। इस जांच में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के कुल 19 अस्पतालों को शामिल किया गया था।
जांच टीम ने अस्पतालों से योजना के तहत किए गए इलाज, मरीजों की भर्ती और पैकेज से संबंधित दस्तावेज तथा रिकॉर्ड जुटाए। इसके बाद संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
अस्पतालों की ओर से दिए गए जवाबों की समीक्षा के बाद 16 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई संचालक एवं आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं और स्टेट नोडल एजेंसी के सीईओ संजीव कुमार झा के निर्देश पर किए जाने की जानकारी दी गई है।
अतिरिक्त वसूली के मामलों में 10 अस्पताल एक साल के लिए निलंबित
जांच में मरीजों से अतिरिक्त राशि लेने और अन्य अनियमितताओं के मामले सामने आने के बाद 10 अस्पतालों को एक-एक साल के लिए आयुष्मान योजना से निलंबित किया गया है।
वहीं, गलत पैकेज ब्लॉक करने, एजेंटों के माध्यम से मरीजों को बुलाने और गंभीर प्रकृति की अन्य गड़बड़ियों के मामलों में 6 अस्पतालों पर तीन-तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया है।
इस कार्रवाई का मतलब है कि प्रतिबंध की अवधि के दौरान संबंधित अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों का उपचार योजना के पैकेज में नहीं कर सकेंगे। हालांकि, निलंबन से जुड़े विस्तृत आदेश और अस्पतालवार शर्तों की जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों से देखी जानी चाहिए।
तीन साल के लिए निलंबित किए गए ये 6 अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में छह अस्पतालों को तीन साल के लिए योजना से बाहर किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन अस्पतालों के खिलाफ अलग-अलग तरह की अनियमितताओं के मामले सामने आए।
- स्वामी चंद्रशेखरानंद अस्पताल, जगदलपुर: ट्रैक्टर से गिरकर घायल हुए एक मरीज के इलाज में हेपेटाइटिस का पैकेज ब्लॉक किए जाने का मामला सामने आया।
- श्रीनिवास अस्पताल, गुढ़ियारी: एजेंटों के माध्यम से मरीजों को बुलाने और सामान्य शिकायतों के आधार पर हृदय तथा किडनी फेल्योर से जुड़े पैकेज ब्लॉक करने के आरोप मिले।
- नगर अस्पताल: मध्य प्रदेश से मरीज बुलाने और निमोनिया के मरीज बताकर इलाज करने के मामले में अनियमितता सामने आई।
- अनंत साई अस्पताल, तेलीबांधा: ओडिशा से मरीज बुलाने और सामान्य शिकायतों को गंभीर बताकर इलाज का पैकेज ब्लॉक करने का मामला मिला।
- पल्स अस्पताल, भिलाई: एजेंटों के जरिए मरीज बुलाने, हितग्राहियों से बाहर से दवाएं मंगवाने और कूटरचित दस्तावेजों से जुड़े मामले सामने आए।
- छठे अस्पताल का नाम: उपलब्ध विवरण में तीन साल के लिए निलंबित सभी छह अस्पतालों के नाम स्पष्ट रूप से नहीं दिए गए हैं। इसलिए बिना आधिकारिक आदेश के किसी अन्य अस्पताल का नाम जोड़ना उचित नहीं होगा।
एक साल के लिए निलंबित किए गए अस्पताल
जांच के बाद 10 अस्पतालों को एक साल के लिए योजना से निलंबित किया गया है। उपलब्ध विवरण में इनमें से कुछ अस्पतालों के नाम और कार्रवाई के कारण सामने आए हैं।
- महावीर अस्पताल, शंकर नगर: योजना के हितग्राही से 80 हजार रुपये अतिरिक्त लेने और पंजीकृत स्थान से अलग जगह अस्पताल संचालित करने का मामला मिला।
- एसके केयर हॉस्पिटल, पचपेड़ीनाका: अधिकांश मरीजों को निमोनिया बताकर भर्ती करने और इलाज करने की शिकायत मिली।
- जय जगन्नाथ अस्पताल, कबीरधाम: मरीजों से अतिरिक्त राशि वसूलने की शिकायत जांच में सही पाई गई।
- अशोक प्रसूति मंदिर, बिलासपुर: गलत पैकेज से इलाज करने और दस्तावेजों में कमियां मिलने पर कार्रवाई की गई।
- नेताम हॉस्पिटल, कबीरधाम: अस्पताल के खिलाफ भी कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है।
- हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल, कोरबा: इस अस्पताल का नाम भी कार्रवाई की सूची में शामिल है।
- केयर एंड केयर हॉस्पिटल, बिलासपुर: अस्पताल के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।
उपलब्ध जानकारी में एक साल के लिए निलंबित सभी 10 अस्पतालों के नाम और प्रत्येक के खिलाफ कार्रवाई के विस्तृत कारण नहीं दिए गए हैं। इसलिए शेष नामों और आरोपों की पुष्टि आधिकारिक सूची से की जानी चाहिए।
रायपुर जिले के 8 अस्पताल भी कार्रवाई की जद में

इस कार्रवाई में रायपुर जिले के आठ अस्पतालों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। राजधानी के अस्पतालों पर हुई कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में मरीज आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने पहुंचते हैं।
योजना के तहत पात्र मरीजों को निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएं बिना अतिरिक्त भुगतान के उपलब्ध कराना अस्पतालों की जिम्मेदारी है। यदि मरीजों से अनुचित रकम ली जाती है या गलत पैकेज के जरिए भुगतान का दावा किया जाता है, तो इससे योजना के उद्देश्य पर असर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच और निलंबन की कार्रवाई का मकसद ऐसे मामलों पर नियंत्रण लगाना और योजना के क्रियान्वयन में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
आयुष्मान योजना में पारदर्शिता के लिए क्यों जरूरी है निगरानी?

आयुष्मान स्वास्थ्य सहायता योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को इलाज के खर्च से राहत देना है। ऐसे में अस्पतालों द्वारा गलत पैकेज का इस्तेमाल, मरीजों से अतिरिक्त वसूली या गलत जानकारी के आधार पर इलाज का दावा करना गंभीर विषय है।
योजना का लाभ लेने वाले कई मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। ऐसे में उन्हें इलाज के नाम पर अतिरिक्त भुगतान करने के लिए मजबूर करना उनके लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
अस्पतालों के रिकॉर्ड की नियमित जांच, मरीजों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और उपचार से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन इस व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में मदद कर सकता है।
आगे भी जारी रह सकती है अस्पतालों की निगरानी
छत्तीसगढ़ में 16 निजी अस्पतालों के निलंबन की कार्रवाई से योजना के तहत इलाज करने वाले अस्पतालों को स्पष्ट संदेश गया है कि अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। जांच के बाद जवाब मांगा जाना और फिर कार्रवाई करना विभागीय निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग आगे भी अस्पतालों के कामकाज की निगरानी किस तरह करता है और मरीजों की शिकायतों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।
आयुष्मान योजना में कथित गड़बड़ियों को लेकर छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने 16 निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की है। इनमें 10 अस्पताल एक साल और 6 अस्पताल तीन साल के लिए निलंबित किए गए हैं। इस कदम से योजना के तहत मुफ्त इलाज पाने वाले मरीजों के हितों की रक्षा और अस्पतालों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की उम्मीद है।