Bhopal ISBT Agnikand : भोपाल की फॉरेंसिक जांच में कई अहम तथ्य सामने आने की जानकारी मिली है। जांच के दौरान वर्मा ट्रेवल्स की उस बस के डीजल टैंक का ढक्कन गायब पाया गया, जिसमें सबसे पहले आग लगी थी। बस का नंबर MP 04 YL 8818 बताया गया है। इसके अलावा, बस की पिछली डिक्की के नीचे मिट्टी और गाड़ी की बॉडी पर ज्वलनशील पदार्थ जैसी गंध दर्ज की गई।
जांच टीम ने मौके से जले हुए अवशेष और कार्बन के नमूने भी एकत्र किए हैं। इन नमूनों को पैक करके आगे की जांच के लिए सागर स्थित फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। हालांकि, शुरुआती जांच में सामने आए इन तथ्यों से आग लगने के वास्तविक कारण की पुष्टि अभी नहीं होती है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।
वर्मा ट्रेवल्स की बस के डीजल टैंक का ढक्कन गायब

Bhopal ISBT Agnikand : भोपाल के इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) में हुए बस अग्निकांड की जांच के दौरान फॉरेंसिक टीम ने सबसे पहले वर्मा ट्रेवल्स की बस MP 04 YL 8818 का निरीक्षण किया। बताया गया है कि इसी बस में सबसे पहले आग लगी थी।
जांच के दौरान बस के डीजल टैंक का ढक्कन गायब मिला। टैंक के मुंह को पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले टुकड़ों से बंद करने की कोशिश किए जाने की बात भी सामने आई। इस स्थिति को लेकर बस के कर्मचारियों से सवाल किए गए, लेकिन वे स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके कि टैंक का ढक्कन किसने निकाला था या उसे इस तरह क्यों बंद किया गया था।
डीजल टैंक की स्थिति जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। हालांकि, ढक्कन गायब होने और आग लगने के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह फॉरेंसिक रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
बस के पिछले हिस्से में ज्वलनशील पदार्थ जैसी गंध

Bhopal ISBT Agnikand : भोपाल ISBT की जांच के दौरान बस के पिछले हिस्से में भी महत्वपूर्ण निरीक्षण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, वर्मा ट्रेवल्स की बस की पिछली डिक्की के नीचे मिट्टी और वाहन की बॉडी पर ज्वलनशील पदार्थ जैसी गंध महसूस की गई।
फॉरेंसिक टीम के प्रमुख एके बरोनिया और गोविंदपुरा थाना प्रभारी अवधेश तोमर ने मौके पर इस गंध को महसूस किया। इसके बाद संबंधित स्थान को चिह्नित कर जांच के रिकॉर्ड में शामिल किया गया।
इस तरह की गंध की मौजूदगी अपने आप में आग लगने के कारण की पुष्टि नहीं करती। यह पता लगाने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है कि वहां वास्तव में कौन-सा पदार्थ मौजूद था और उसका आग की घटना से कोई संबंध था या नहीं।
इसी उद्देश्य से घटनास्थल से नमूने एकत्र किए गए हैं, जिनकी प्रयोगशाला में जांच की जाएगी।
फॉरेंसिक टीम ने जले अवशेष और कार्बन सैंपल जुटाए

घटना की पड़ताल के लिए फॉरेंसिक टीम ISBT पहुंची और गोविंदपुरा थाना प्रभारी अवधेश तोमर की मौजूदगी में बसों का निरीक्षण शुरू किया। अधिकारियों ने एक-एक करके वाहनों की स्थिति देखी और आग से प्रभावित हिस्सों की जांच की।
इस प्रक्रिया के दौरान जले हुए अवशेष और कार्बन के नमूने बरामद किए गए। इन्हें पॉलिथीन में पैक कर जांच के लिए सागर फॉरेंसिक लैब भेजा गया।
Bhopal ISBT Agnikand : फॉरेंसिक जांच का उद्देश्य आग लगने की परिस्थितियों और घटनास्थल पर मौजूद संभावित ज्वलनशील पदार्थों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी जुटाना है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट से जांचकर्ताओं को घटना के कारणों और परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल, आग लगने की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है।
डीजल टैंक का ढक्कन किसने निकाला? कर्मचारियों से पूछताछ
बस के डीजल टैंक का ढक्कन गायब मिलने के बाद वर्मा ट्रेवल्स के सर्विस सुपरवाइजर रईस खान, इलेक्ट्रीशियन और मैनेजर को मौके पर बुलाकर पूछताछ की गई।
जांच टीम ने कर्मचारियों से यह जानने की कोशिश की कि डीजल टैंक को पैकेजिंग सामग्री के टुकड़ों से बंद क्यों किया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कर्मचारी इस बारे में स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
कुछ कर्मचारियों ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि कई गाड़ियों में टैंक के ढक्कन नहीं मिलते और गैस बनने से विस्फोट की आशंका रोकने के लिए पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, कर्मचारियों की ओर से दी गई इस जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जांच के दौरान मुख्य सवाल यही रहा कि संबंधित बस के टैंक का ढक्कन गायब क्यों था और टैंक को इस तरीके से बंद करने के पीछे क्या कारण था।
इग्निशन स्विच और मेन चाबी को लेकर भी सवाल
पूछताछ के दौरान सर्विस सुपरवाइजर रईस खान और इलेक्ट्रीशियन से वाहन के इग्निशन स्विच तथा मेन चाबी से जुड़ा सवाल भी पूछा गया। जांच टीम ने जानना चाहा कि यदि इग्निशन स्विच और गाड़ी की मुख्य चाबी निकाल दी जाए, तो क्या वाहन में इलेक्ट्रिक सप्लाई जारी रहती है।
बताया गया है कि इस सवाल का जवाब देते समय इलेक्ट्रीशियन कुछ कह रहा था, तभी अन्य कर्मचारियों ने उसे कोहनी मारकर इशारा करने की कोशिश की। इसके बाद फॉरेंसिक टीम के प्रमुख ने कर्मचारियों को फटकार लगाई और सीधे जवाब देने की चेतावनी दी।
यह घटनाक्रम पूछताछ के दौरान सामने आया, लेकिन इससे किसी कर्मचारी की संलिप्तता या आग लगने की वजह अपने आप साबित नहीं होती। मामले में संबंधित तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है।
घटना वाली शाम नादरा बस स्टैंड पर होने की बात
पूछताछ के दौरान वर्मा ट्रेवल्स के सर्विस सुपरवाइजर रईस खान ने बताया कि घटना वाली शाम वह नादरा बस स्टैंड पर मौजूद था।
जांच के संदर्भ में कर्मचारियों से मिली जानकारी और मौके पर पाए गए तथ्यों का मिलान करना महत्वपूर्ण होगा। इससे घटना के समय की परिस्थितियों को समझने और जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि जांच एजेंसियों ने कर्मचारियों के बयानों की पुष्टि के लिए कौन-कौन से अतिरिक्त कदम उठाए हैं।
गोविंदपुरा थाने में FIR दर्ज, आगे की जांच जारी
गोविंदपुरा थाना प्रभारी अवधेश कुमार के अनुसार, वर्मा ट्रेवल्स के संचालक दीपक वर्मा की लिखित शिकायत के आधार पर वॉल्वो बसों में आग लगने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिस ने बताया कि मामले की आगे जांच की जा रही है। फॉरेंसिक टीम की ओर से जुटाए गए नमूनों की जांच और घटनास्थल से मिले तथ्यों का विश्लेषण आग लगने की परिस्थितियों को समझने में अहम हो सकता है।
Bhopal ISBT Agnikand : भोपाल ISBT अग्निकांड में डीजल टैंक का ढक्कन गायब मिलना, बस के पिछले हिस्से में ज्वलनशील पदार्थ जैसी गंध दर्ज होना और जले हुए अवशेषों का प्रयोगशाला भेजा जाना जांच के प्रमुख बिंदु हैं। आग लगने का वास्तविक कारण क्या था और क्या किसी तकनीकी खराबी या अन्य परिस्थिति की इसमें भूमिका थी, इसका स्पष्ट जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।