Bijapur Naxalite Surrender: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। अधिकारियों के मुताबिक, छह माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है। इन सभी पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में चार ऐसे कैडर शामिल हैं, जो ओडिशा में सक्रिय थे, जबकि दो वेस्ट बस्तर डिवीजन संगठन से जुड़े बताए गए हैं।
इस कार्रवाई में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और बीजापुर पुलिस की भूमिका अहम रही। अधिकारियों के अनुसार, लगातार बातचीत और संपर्क के बाद इन कैडरों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
छह माओवादी कैडरों पर था 35 लाख रुपये का इनाम

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडर अलग-अलग संगठनात्मक पदों पर सक्रिय रहे थे। इनमें पार्टी पॉलिटिकल कैडर सदस्य (PPCM) और पार्टी सदस्य (PM) शामिल हैं। इन पर घोषित इनाम की कुल राशि 35 लाख रुपये बताई गई है।
इन कैडरों के आत्मसमर्पण को बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान और पुनर्वास प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग कैडरों की संगठनात्मक भूमिका और गतिविधियों से जुड़ी जानकारी पुलिस के आधिकारिक विवरण के आधार पर ही देखी जानी चाहिए।
ओडिशा में सक्रिय माओवादी कैडरों ने भी छोड़ा संगठन

आत्मसमर्पण करने वालों में ओडिशा में सक्रिय कैडर भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, रानी सोढ़ी उर्फ संध्या ओडिशा स्टेट कंपनी नंबर-8 में PPCM के पद पर सक्रिय थी। उसके सिर पर आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पांडो पोडियम उर्फ सस्मिता भी इसी कंपनी में PPCM के रूप में सक्रिय बताई गई है। उस पर भी आठ लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा सुक्कु कुडियम उर्फ संतोष ओडिशा स्टेट कमेटी के पूर्व सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर चुका था।
गणेश उइका पर भी आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। अधिकारियों के मुताबिक, उसने भी आत्मसमर्पण कर दिया है। इन कैडरों के संगठन छोड़ने से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क पर असर पड़ने की संभावना है।
कोसा माडवी और अन्य कैडरों ने भी किया सरेंडर
आत्मसमर्पण करने वालों में कोसा माडवी भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, वह कंपनी नंबर-2 में ए-सेक्शन कमांडर और PPCM के रूप में सक्रिय था। उस पर आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।
देवे माडकम उर्फ जन्नी पार्टी सदस्य था और ओडिशा स्टेट एसजेडसीएम जगदीश इरपा के सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करता था। उस पर दो लाख रुपये का इनाम था। लालू ताती ने भी आत्मसमर्पण किया, जिस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों की पृष्ठभूमि और संगठन में उनकी भूमिकाएं अलग-अलग रही हैं। इन सभी को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
किन कारणों से माओवादियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता?
अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने इसके पीछे कई कारण बताए। इनमें सुरक्षाबलों की बढ़ती सक्रियता, माओवादी संगठन का कमजोर होना, संगठन की हिंसक विचारधारा से मोहभंग और आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों का विस्तार शामिल है।
उन्होंने पुराने कैडरों के सफल पुनर्वास से मिलने वाली प्रेरणा का भी उल्लेख किया। लगातार संपर्क और बातचीत के जरिए सुरक्षाबलों ने उन्हें हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने के लिए प्रेरित किया।
हालांकि, आत्मसमर्पण के पीछे बताए गए कारण अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित हैं। इन कारणों के प्रभाव का आकलन क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और आगे होने वाले घटनाक्रमों के आधार पर किया जा सकता है।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी आर्थिक और रोजगार संबंधी सहायता

छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को आर्थिक सहायता के साथ कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार और रोजगार से जुड़ी मदद दिए जाने का प्रावधान है।
इसका उद्देश्य हिंसा छोड़ने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना और उनके लिए सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है। पुनर्वास प्रक्रिया के तहत पात्रता और निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता दी जाएगी।
बीजापुर में इस कार्रवाई की सफलता में DRG, CRPF की 170वीं बटालियन और जिला पुलिस के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया है।
बीजापुर में नक्सल विरोधी अभियान के लिए अहम घटनाक्रम
Bijapur Naxalite Surrender की यह घटना बस्तर क्षेत्र में जारी नक्सल विरोधी प्रयासों और पुनर्वास नीति के महत्व को सामने लाती है। छह माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण ऐसे समय में हुआ है, जब सुरक्षाबल सक्रिय नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने के साथ-साथ संगठन छोड़ने वालों को मुख्यधारा में लाने के प्रयास कर रहे हैं।
फिलहाल अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को सरकारी पुनर्वास नीति के तहत सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस घटनाक्रम का क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।