Blackbucks in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गोमर्दा वन्यजीव अभयारण्य में करीब 50 साल बाद काले हिरणों यानी ब्लैकबक की वापसी होने जा रही है। इसके लिए बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य से 50 काले हिरणों को चरणबद्ध तरीके से गोमर्दा लाने की योजना बनाई गई है।
वन विभाग की इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में जैव विविधता को मजबूत करना और काले हिरणों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास विकसित करना है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस प्रयास से गोमर्दा अभयारण्य की वन्यजीव संपदा बढ़ेगी। इसके साथ ही भविष्य में वन्यजीव पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
पांच दशक पहले इलाके से गायब हो गए थे ब्लैकबक
काला हिरण भारतीय वन्यजीव जगत की एक खास प्रजाति है। इसकी पहचान नर के गहरे रंग, लंबे घुमावदार सींगों और तेज दौड़ने की क्षमता से होती है। खुले घास के मैदान इसके प्राकृतिक आवास के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
विभागीय जानकारी के अनुसार, शिकार, अवैध वन्यजीव गतिविधियों, अतिक्रमण और प्राकृतिक आवास में बदलाव के कारण गोमर्दा क्षेत्र से काले हिरण धीरे-धीरे गायब हो गए थे। वर्ष 1970 के दशक तक इस इलाके में इनकी मौजूदगी खत्म हो गई थी और तब से इन्हें यहां स्थानीय रूप से विलुप्त माना जाता रहा है।
अब करीब पांच दशक बाद इन्हें दोबारा इस क्षेत्र में बसाने की तैयारी की जा रही है। यह कदम केवल वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बरनवापारा में सफल रहा था काले हिरणों का ट्रांसलोकेशन

गोमर्दा में काले हिरणों को बसाने की योजना के पीछे बरनवापारा अभयारण्य में किए गए पहले के प्रयासों का अनुभव महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2017-18 में बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों को लाने का अभियान चलाया गया था।
उस दौरान कुल 77 ब्लैकबक लाए गए थे। इनमें 50 काले हिरण नई दिल्ली के नेशनल जियोलॉजिकल पार्क और 27 बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल गार्डन से लाए गए थे।
इस पहल के बाद बरनवापारा में काले हिरणों की आबादी बढ़ने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, वहां इनकी संख्या 150 से अधिक हो चुकी है। शुरुआती दौर में नए वातावरण के अनुकूल होने में हिरणों को समय लगा था, इसलिए उन्हें चरणबद्ध तरीके से खुले प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ा गया।
बरनवापारा का अनुभव अब गोमर्दा में काले हिरणों की वापसी की योजना के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
बरनवापारा से गोमर्दा लाए जाएंगे 50 काले हिरण

गोमर्दा अभयारण्य में काले हिरणों को फिर से बसाने के लिए बरनवापारा से 50 ब्लैकबक लाने की योजना बनाई गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन्हें एक साथ स्थानांतरित करने के बजाय चरणों में लाया जाएगा, ताकि नए वातावरण में ढलने की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
वन्यजीवों को एक अभयारण्य से दूसरे स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया को ट्रांसलोकेशन कहा जाता है। इसमें जानवरों की सुरक्षित पकड़, परिवहन, स्वास्थ्य की निगरानी और नए आवास में अनुकूलन जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं।
इस तरह के अभियान में यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि नए स्थान पर पर्याप्त भोजन, पानी, सुरक्षित आश्रय और प्रजाति के अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियां उपलब्ध हों। गोमर्दा में काले हिरणों की वापसी के दौरान भी इन पहलुओं पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
गोमर्दा और बरनवापारा का प्राकृतिक वातावरण है मिलता-जुलता
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गोमर्दा और बरनवापारा अभयारण्य एक-दूसरे से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर हैं और दोनों का प्राकृतिक लैंडस्केप काफी हद तक मिलता-जुलता है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) ओ.पी. यादव के मुताबिक, गोमर्दा में पर्याप्त पानी और घास के मैदान मौजूद हैं, जो काले हिरणों के लिए अनुकूल आवास तैयार करने में मददगार हो सकते हैं।
किसी प्रजाति को नए क्षेत्र में बसाने से पहले उसके प्राकृतिक आवास, भोजन की उपलब्धता और मौसम जैसी परिस्थितियों का आकलन करना जरूरी होता है। गोमर्दा और बरनवापारा के बीच प्राकृतिक समानता इस परियोजना के लिए सकारात्मक पहलू मानी जा रही है।
हालांकि, काले हिरणों के नए वातावरण में सफलतापूर्वक बसने की वास्तविक स्थिति उनके स्वास्थ्य, अनुकूलन और संरक्षण व्यवस्था की लगातार निगरानी से ही स्पष्ट होगी।
वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
Blackbucks in Chhattisgarh संरक्षण अभियान से गोमर्दा अभयारण्य की पहचान बढ़ने की उम्मीद है। काले हिरणों की वापसी से वन्यजीव प्रेमियों, प्रकृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों और फोटोग्राफी के शौकीनों का आकर्षण इस क्षेत्र की ओर बढ़ सकता है।
यदि वन्यजीव पर्यटन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है, तो स्थानीय ग्रामीणों के लिए गाइड, परिवहन, स्थानीय उत्पादों और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
हालांकि, पर्यटन को बढ़ावा देते समय वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक आवास को प्राथमिकता देना जरूरी होगा। अनियंत्रित मानवीय गतिविधियां जानवरों के व्यवहार और उनके पर्यावरण को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन इस पहल की सफलता के लिए अहम रहेगा।
PM मोदी ने ‘मन की बात’ में की थी संरक्षण अभियान की तारीफ

काले हिरणों के संरक्षण को लेकर छत्तीसगढ़ में किए गए प्रयासों की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देश में काले हिरणों के संरक्षण से जुड़े प्रयासों की सराहना की थी।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में इस तरह की पहल का उल्लेख वन्यजीव संरक्षण के महत्व को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मदद करता है। छत्तीसगढ़ में बरनवापारा में काले हिरणों की आबादी बढ़ने के अनुभव के बाद अब गोमर्दा में उन्हें फिर से बसाने की योजना इसी दिशा में एक और कदम मानी जा रही है।
काले हिरणों की वापसी से मजबूत होगी जैव विविधता
गोमर्दा अभयारण्य में काले हिरणों को दोबारा बसाने की योजना छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बरनवापारा में पहले हुए ट्रांसलोकेशन के अनुभव का इस्तेमाल करके इस प्रजाति को नए आवास में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
आने वाले समय में इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि काले हिरण नए वातावरण में किस तरह ढलते हैं और उनके लिए भोजन, पानी, सुरक्षा तथा प्रजनन की परिस्थितियां कितनी अनुकूल रहती हैं।
यदि यह पहल सफल होती है, तो गोमर्दा अभयारण्य में जैव विविधता को मजबूती मिलने के साथ छत्तीसगढ़ के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को भी नई पहचान मिल सकती है। साथ ही, जिम्मेदार पर्यटन के जरिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक लाभ पहुंचाने की संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं।