Digvijaya Singh Sanatan Yatra: मध्य प्रदेश में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन से शुरू हुई इस यात्रा में साधु-संतों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी देखने को मिली। वहीं, भाजपा नेताओं ने यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा है।
विजयदशमी पर दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत उज्जैन से धूमधाम के साथ हुई। इस दौरान बड़े संख्या में साधु संत और कांग्रेस कार्यकर्त्ता यात्रा में शामिल हुए और एक दूसरे का हौसला बढ़ाया। 70 दिन तक चलते वाली इस यात्रा को लेकर लोगों में जहां उत्साह है। तो वही दूसरी तरफ मप्र बीजेपी के खेल मंत्री विश्वास सारंग और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता पर निशाना साधा है।
यात्रा को लेकर विश्वास सारंग ने कहा कि दिग्विजय सिंह की यात्रा पहले ही एक्सपोज़ हो चुकी है। यह सनातन को तोड़ने वाली यात्रा है। सारंग ने राम मंदिर और जाकिर नाइक को लेकर दिग्विजय सिंह के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके ऐसे बयान सामने लाए जाएंगे, जिन्हें भाजपा सनातन विरोधी मानती है।

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने यात्रा को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह के पुराने बयानों का हवाला देते हुए यात्रा की मंशा पर सवाल उठाए, जबकि राकेश सिंह ने पूछा कि यह यात्रा प्रायश्चित के लिए निकाली जा रही है या इसके पीछे कोई दूसरा उद्देश्य है।
यात्रा को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। इस बीच उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित यात्रा के मार्ग और उसके समापन को लेकर भी चर्चा हो रही है।
Digvijaya Singh Sanatan Yatra पर विश्वास सारंग का हमला

दिग्विजय सिंह की यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने इसे लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि यात्रा का उद्देश्य पहले ही उजागर हो चुका है और इसे सनातन को तोड़ने वाली यात्रा बताया।
विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह के राम मंदिर और जाकिर नाइक से जुड़े पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा ऐसे बयानों को सामने लाएगी, जिन्हें पार्टी सनातन विरोधी मानती है।
सारंग की टिप्पणी के बाद यात्रा को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। भाजपा की ओर से जहां दिग्विजय सिंह के पुराने बयानों को आधार बनाकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं यात्रा के नाम और उद्देश्य को लेकर कांग्रेस की राजनीतिक पहल पर भी चर्चा हो रही है।
हालांकि, विश्वास सारंग के आरोप भाजपा का राजनीतिक पक्ष हैं। इन टिप्पणियों को यात्रा के उद्देश्य के संबंध में किसी स्वतंत्र रूप से स्थापित निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
राकेश सिंह ने पूछा—यात्रा का उद्देश्य क्या है?
मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भी दिग्विजय सिंह की यात्रा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि कांग्रेस नेता किस उद्देश्य से यात्रा निकाल रहे हैं।
राकेश सिंह ने सवाल किया कि क्या यह यात्रा किसी तरह के प्रायश्चित के लिए है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। उन्होंने कांग्रेस के घर वापसी अभियान पर भी टिप्पणी की।
राकेश सिंह के मुताबिक, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए कई लोग अब भाजपा नेतृत्व से जुड़ चुके हैं। उनके इस बयान को कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में जाने वाले नेताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है।
दोनों भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि दिग्विजय सिंह की यात्रा धार्मिक-सामाजिक आयोजन के साथ-साथ मध्य प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गई है।
विजयादशमी पर उज्जैन से शुरू हुई यात्रा

दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ की शुरुआत विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन से हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यात्रा में बड़ी संख्या में साधु-संत और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।
यात्रा को लेकर समर्थकों में उत्साह का दावा किया गया है। आयोजकों के अनुमान के मुताबिक, इसके दौरान प्रतिदिन करीब 1,000 से 1,500 लोगों के शामिल होने की संभावना है। पहले दिन लगभग 3,000 लोगों की भागीदारी का दावा किया गया।
यात्रा की कुल दूरी करीब 950 किलोमीटर बताई गई है। इसे दो चरणों में पूरा करने की योजना का भी उल्लेख किया गया है। यात्रा के कार्यक्रम और अंतिम पड़ाव को लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
यात्रा के समर्थक इसे सनातन परंपरा और स्वाभिमान से जुड़ी पहल के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि भाजपा नेता इसके उद्देश्य पर सवाल उठा रहे हैं। इस तरह यात्रा को लेकर दोनों दलों के बीच वैचारिक और राजनीतिक बहस जारी है।
उज्जैन से अयोध्या तक क्या रहेगा यात्रा का रूट?
Digvijaya Singh Sanatan Yatra मध्य प्रदेश से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए अयोध्या तक पहुंचने के लिए प्रस्तावित है। दिए गए कार्यक्रम के अनुसार, यात्रा का मार्ग कई शहरों और कस्बों से होकर गुजरेगा।
मध्य प्रदेश में इन जगहों से गुजरेगी यात्रा
यात्रा उज्जैन से शुरू होकर मध्य प्रदेश के इन क्षेत्रों से गुजरने के लिए निर्धारित बताई गई है:
- तराना
- शाजापुर
- सारंगपुर
- खुजनेर
- राजगढ़
- चाचौड़ा
- आरोन
- अशोकनगर
- चंदेरी
इन क्षेत्रों से गुजरने के दौरान यात्रा में स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर पहुंचने के समय और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी संबंधित आयोजकों के आधिकारिक कार्यक्रम से ही स्पष्ट होगी।
उत्तर प्रदेश के रास्ते अयोध्या पहुंचेगी यात्रा
मध्य प्रदेश के बाद यात्रा उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए अयोध्या पहुंचने के लिए प्रस्तावित है। बताए गए रूट में ये स्थान शामिल हैं:
- तालबेहट
- जेरोन
- ओरछा
- चिरगांव
- उरई
- कालपी
- कानपुर देहात
- लखनऊ देहात
- बाराबंकी
- अयोध्या
यात्रा का अंतिम पड़ाव अयोध्या स्थित राम मंदिर बताया गया है। इस मार्ग के जरिए यात्रा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों को जोड़ेगी।
यात्रा की तारीखों को लेकर ध्यान देने वाली बात
उपलब्ध जानकारी में यात्रा की शुरुआत 20 अक्टूबर और समापन 5 नवंबर बताया गया है। साथ ही इसे करीब 950 किलोमीटर लंबी यात्रा कहा गया है। हालांकि, शुरुआत, समापन और दो चरणों के कार्यक्रम से संबंधित तारीखों की आधिकारिक पुष्टि के लिए आयोजकों की ओर से जारी विस्तृत कार्यक्रम देखना जरूरी है।
यात्रा के दौरान किन स्थानों पर कितने समय तक कार्यक्रम होंगे और कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल होंगे, इसकी पूरी जानकारी सामने आने पर यात्रा का कार्यक्रम अधिक स्पष्ट हो सकेगा।
मध्य प्रदेश में धार्मिक मुद्दों पर सियासत तेज
Digvijaya Singh Sanatan Yatra को लेकर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। भाजपा इस यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठा रही है, जबकि यात्रा के नाम और स्वरूप को लेकर समर्थकों की अपनी व्याख्या है।
विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह के पुराने बयानों का हवाला दिया, तो राकेश सिंह ने यात्रा के पीछे की मंशा पर सवाल उठाए। इन बयानों के बाद यात्रा केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि राज्य की राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गई है।
आगे यात्रा के अलग-अलग पड़ावों पर नेताओं की प्रतिक्रियाएं, स्थानीय भागीदारी और अयोध्या में प्रस्तावित समापन पर नजर रहेगी। फिलहाल, भाजपा के सवालों और यात्रा के समर्थकों के रुख के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है।