Kanker Police Drug Bust: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में पुलिस ने गांजा तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। सिंगारभाठ की पहाड़ियों के पास पुलिस को 280 किलो गांजा लावारिस हालत में मिला है। जब्त गांजे की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पुलिस की घेराबंदी और नाकाबंदी देखकर तस्कर गांजे की खेप छोड़कर मौके से फरार हो गए। पुलिस अब आरोपियों के साथ-साथ इस अवैध कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
इस कार्रवाई के बाद सीमावर्ती इलाकों से छत्तीसगढ़ में गांजे की तस्करी को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। पुलिस को संदेह है कि यह खेप पड़ोसी राज्य ओडिशा की ओर से लाई जा रही थी। हालांकि, गांजे के वास्तविक स्रोत, इसे पहुंचाने वाले लोगों और संभावित खरीदार की पहचान को लेकर जांच अभी जारी है।

सिंगारभाठ की पहाड़ियों में मिली गांजे की बड़ी खेप
ओडिशा से जुड़ा है कनेक्शन बताया जा रहा है कि यह खेप ओडिशा की सीमा से लाई जा रही थी। पुलिस रास्ते में लगातार चेकिंग अभियान चला रही थी। घेराबंदी की भनक लगते ही तस्कर घबरा गए। उन्होंने पकड़ाने के डर से रास्ता बदलने का प्रयास किया। रास्ता बदलते समय वे रास्ते में ही माल छोड़ गए। तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग निकले। पुलिस अब पूरे इलाके में नाकाबंदी कर उनकी तलाश कर रही है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस को मुखबिर से सिंगारभाठ पहाड़ियों के आसपास गांजे की तस्करी से जुड़ी सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने इलाके में पहुंचकर घेराबंदी और जांच शुरू की। इसी दौरान पुलिस को कई थैलियों में रखा गांजा मिला।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि तस्कर बीती रात ही इस खेप को वहां छोड़कर भागे थे। बताया जा रहा है कि पुलिस की नाकाबंदी की जानकारी मिलते ही आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से गांजे को मौके पर छोड़ दिया और अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
पुलिस ने मौके से बरामद गांजे को जब्त किया और तीन वाहनों की मदद से थाने तक पहुंचाया। कुल बरामदगी करीब 280 किलोग्राम बताई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा है।
ओडिशा से छत्तीसगढ़ लाई जा रही थी खेप?

नेटवर्क का पता लगा रही पुलिस फिलहाल कांकेर पुलिस आरोपियों की धरपकड़ में जुट गई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि यह माल कहां से आ रहा था। इसके साथ ही इसके मुख्य खरीदार की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस की कई टीमें संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। जल्द ही इस गिरोह के पर्दाफाश होने की उम्मीद है।
पुलिस नशे के इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने की कोशिश में है। ओडिशा से आ रहा था 1 करोड़ गांजा प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अवैध नशे की यह बड़ी खेप पड़ोसी राज्य ओडिशा के रास्ते छत्तीसगढ़ में खपाने की तैयारी थी। सीमावर्ती इलाकों से इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों का अंदर आना सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
Kanker Police Drug Bust मामले में ओडिशा कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, गांजे की यह खेप पड़ोसी राज्य ओडिशा की तरफ से छत्तीसगढ़ लाई जा रही थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक तस्करी के पूरे रास्ते और माल भेजने वाले लोगों की पुष्टि नहीं की है।
सीमावर्ती इलाकों में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पुलिस लगातार निगरानी और चेकिंग अभियान चला रही है। माना जा रहा है कि इसी कार्रवाई के दौरान तस्करों को पुलिस की गतिविधियों की भनक लग गई होगी। इसके बाद उन्होंने रास्ता बदलने या गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की और गांजे की खेप छोड़कर भाग निकले।
फिलहाल ओडिशा से माल लाने वाले संभावित रास्तों और इस खेप को छत्तीसगढ़ में कहां पहुंचाया जाना था, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
मुख्य खरीदार और तस्करी नेटवर्क की तलाश
गांजे की बरामदगी के बाद पुलिस की जांच अब सिर्फ मौके से फरार हुए आरोपियों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में गांजा किसके लिए लाया जा रहा था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
जांच के प्रमुख बिंदुओं में गांजे का वास्तविक स्रोत, परिवहन में शामिल लोगों की पहचान, संभावित खरीदार और तस्करी से जुड़े अन्य संपर्क शामिल हैं। पुलिस इन जानकारियों के आधार पर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए तस्करों की पहचान और उनकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
सीमावर्ती इलाकों में नशा तस्करी रोकना पुलिस के सामने चुनौती

कांकेर की सिंगारभाठ पहाड़ियों के पास 280 किलो गांजे की बरामदगी नशे के अवैध कारोबार की गंभीरता को दिखाती है। एक करोड़ रुपये से अधिक कीमत की खेप का मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि तस्करी में बड़े स्तर पर माल की आवाजाही की आशंका है।
पुलिस के सामने अब फरार आरोपियों को पकड़ने के साथ इस कारोबार से जुड़े सप्लाई और खरीद नेटवर्क का पता लगाने की चुनौती है। यदि जांच में ओडिशा से छत्तीसगढ़ तक फैले नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो तस्करी के रास्तों और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी।
लिस महकमा इस बात की गहराई से छानबीन कर रहा है कि इस काले कारोबार के पीछे कौन सा बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही फरार आरोपियों की पहचान कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और इस तस्करी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।कांकेर पुलिस जब्त गांजे के स्रोत, मुख्य खरीदार और फरार तस्करों की तलाश में जुटी है। इस कार्रवाई में आगे क्या खुलासे होते हैं, यह जांच के नतीजों के बाद स्पष्ट होगा।