LPG Connection: इस व्यवस्था के लागू होने से एक ही पते पर पाइपलाइन गैस और LPG सिलेंडर दोनों रखने का विकल्प खत्म हो जाएगा। जिन इलाकों में पहले ही पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन परिवारों ने अब तक PNG कनेक्शन नहीं लिया है, वहां भी जल्द नियम का पालन कराने की तैयारी है। इसकी जिम्मेदारी जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों को सौंपी जाएगी।
छत्तीसगढ़ में रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के 20 से ज्यादा शहरों में सिटी गैस पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, जिन घरों से करीब 100 मीटर के दायरे में PNG पाइपलाइन उपलब्ध होगी, वहां रहने वाले परिवारों को पाइपलाइन गैस का कनेक्शन लेना अनिवार्य हो सकता है। इसके साथ ही गैस की सप्लाई शुरू होने के बाद उसी पते पर इस्तेमाल हो रहा LPG सिलेंडर कनेक्शन सरेंडर करना होगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य घरेलू गैस वितरण को पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ना और PNG के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। हालांकि, उपभोक्ताओं के सामने एक बड़ा सवाल यह भी है कि अगर किसी तकनीकी खराबी या दूसरी वजह से पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति बंद हो गई, तो खाना बनाने के लिए उनके पास वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी? ऐसे सवालों को देखते हुए सरकार और संबंधित विभाग लोगों को नई नीति के प्रावधानों के बारे में जागरूक करने की तैयारी कर रहे हैं।
रायपुर समेत 20 से ज्यादा शहरों में PNG कनेक्शन की तैयारी

LPG Connection: के तहत प्रदेश के उन शहरी इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां सिटी गैस वितरण नेटवर्क बिछाया जा रहा है। घर से लगभग 100 मीटर के दायरे में पाइपलाइन उपलब्ध होने पर परिवारों को PNG कनेक्शन लेने के लिए कहा जाएगा। पाइपलाइन से नियमित गैस आपूर्ति शुरू होने के बाद उसी पते का LPG कनेक्शन रखने की अनुमति नहीं होगी, ऐसा उपलब्ध जानकारी में बताया गया है।
इसका मतलब है कि एक ही पते पर PNG और LPG दोनों सुविधाओं का इस्तेमाल जारी रखने का विकल्प सीमित हो सकता है। जिन इलाकों में पहले से पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन परिवारों ने अभी तक कनेक्शन नहीं लिया है, वहां भी नियमों का पालन कराने की तैयारी है।
इसके लिए जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों को जिम्मेदारी देने की बात कही गई है। अधिकारियों के माध्यम से लोगों को नीति की जानकारी दी जाएगी और कनेक्शन लेने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
40 हजार से ज्यादा घरों में लगाए जा चुके हैं PNG मीटर

छत्तीसगढ़ में घरेलू PNG नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 40 हजार से ज्यादा घरों में PNG कनेक्शन देकर मीटर लगाए जा चुके हैं। हालांकि, इनमें से करीब डेढ़ हजार घरों में ही गैस की आपूर्ति शुरू हो पाई है। यानी मीटर लगाए जाने और वास्तविक गैस सप्लाई शुरू होने के बीच अभी बड़ा अंतर है।
गैस कंपनियों के मुताबिक, किसी घर में PNG की आपूर्ति शुरू होने के बाद तय अवधि के भीतर उसी पते का LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा। उपभोक्ता अपने मौजूदा LPG कनेक्शन को किसी दूसरे पते पर स्थानांतरित करा सकते हैं। एचजीसी के मैनेजर राकेश रंजन के हवाले से भी ऐसी व्यवस्था की जानकारी दी गई है।
LPG Connection: उपभोक्ताओं की चिंता यह है कि PNG की सप्लाई बाधित होने पर उनके पास खाना बनाने का दूसरा साधन नहीं रहेगा। खासकर उन परिवारों के लिए यह सवाल महत्वपूर्ण है, जो रोजमर्रा के घरेलू कामों के लिए लगातार गैस पर निर्भर रहते हैं।
10 लाख घरों तक PNG नेटवर्क पहुंचाने का लक्ष्य
राज्य में 10 लाख से ज्यादा घरेलू PNG कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। राजधानी रायपुर में ही करीब एक लाख घरों तक गैस पाइपलाइन पहुंचाने की योजना है। शहर के भनपुरी, टाटीबंध, सरोना, फाफाडीह और अवंति विहार की कुछ कॉलोनियों में गैस की सप्लाई शुरू होने की जानकारी दी गई है।
रायपुर के अलावा बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, रायगढ़, कोरबा, अंबिकापुर, राजनांदगांव और जगदलपुर समेत कई प्रमुख शहरों और कस्बों में भी पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में घरों तक सीधे पाइपलाइन के माध्यम से रसोई गैस पहुंचाना है।
नेटवर्क के विस्तार के साथ यह भी जरूरी होगा कि पाइपलाइन बिछाने, कनेक्शन देने और नियमित आपूर्ति शुरू करने की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो। केवल मीटर लगा देने से उपभोक्ताओं को सुविधा नहीं मिलेगी, जब तक उनके घरों में गैस की सप्लाई नियमित रूप से शुरू न हो जाए।
किन कंपनियों को किन जिलों में नेटवर्क बनाने की जिम्मेदारी?
प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में PNG पाइपलाइन बिछाने का काम विभिन्न गैस कंपनियों को सौंपा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनियों की जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं:
1. हरियाणा सिटी गैस
हरियाणा सिटी गैस को रायपुर, बलौदाबाजार और गरियाबंद में सिटी गैस वितरण नेटवर्क तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। राजधानी रायपुर में घरेलू कनेक्शन बढ़ाने के लिए इस नेटवर्क का विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2. अडानी टोटल गैस
अडानी टोटल गैस को बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और जांजगीर-चांपा समेत कई जिलों में पाइपलाइन नेटवर्क तैयार करना है। इन क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से घरेलू और अन्य उपभोक्ताओं तक गैस पहुंचाने की योजना है।
3. BPCL
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) को सरगुजा संभाग के कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर और सरगुजा जिलों में गैस पाइपलाइन बिछाने की जिम्मेदारी दी गई है।
4. गेल
गेल को बस्तर संभाग के जिलों में गैस नेटवर्क तैयार करना है। इससे संभाग के प्रमुख शहरी क्षेत्रों तक पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने की योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
सरगुजा संभाग तक लाई जा रही 214 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन
छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में PNG नेटवर्क पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश के शहडोल से करीब 214 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन लाई जा रही है। इसके लिए कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर और सरगुजा क्षेत्र में पहाड़ी इलाकों से पाइपलाइन बिछाने का काम किया जा रहा है।
इस परियोजना में भौगोलिक परिस्थितियां एक बड़ी चुनौती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने के लिए विशेष निर्माण कार्य और तकनीकी व्यवस्थाओं की जरूरत होती है। नेटवर्क तैयार होने के बाद इन जिलों में भी पाइपलाइन के माध्यम से घरेलू गैस आपूर्ति का रास्ता खुल सकेगा।
किन परिवारों को PNG कनेक्शन की अनिवार्यता से मिलेगी छूट?
प्रस्तावित नियमों में उन परिवारों को राहत देने की बात कही गई है, जिनके घरों तक पाइपलाइन पहुंचाना तकनीकी या भौगोलिक कारणों से मुश्किल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऐसे इलाकों में रहने वाले परिवारों को PNG कनेक्शन लेने की अनिवार्यता से छूट मिल सकती है।
इसके लिए पाइपलाइन से दूरी का दायरा करीब एक किलोमीटर रखा गया है। यानी जिन घरों तक निर्धारित दूरी के भीतर पाइपलाइन पहुंचाना संभव नहीं होगा, उन्हें राहत मिलने की संभावना है।
हालांकि, छूट से जुड़े नियमों और पात्रता की अंतिम स्थिति संबंधित विभाग के दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगी। इसलिए उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र के गैस वितरक या संबंधित सरकारी कार्यालय से जानकारी लेनी चाहिए।
कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों को सौंपी गई जिम्मेदारी
शहरी गैस वितरण नीति-2026 को लेकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। बैठक में अधिकारियों को नीति के प्रावधानों की जानकारी दी गई।
उन्हें बताया गया कि जिन इलाकों में PNG पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, वहां आसपास के घरों को कनेक्शन लेने के लिए जागरूक किया जाए। इसके लिए जिला और नगरीय निकाय स्तर पर लोगों तक जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी तय की जा रही है।
नई व्यवस्था को लागू करने में स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उपभोक्ताओं को कनेक्शन की प्रक्रिया, खर्च, गैस आपूर्ति की शुरुआत और LPG कनेक्शन स्थानांतरित करने के विकल्पों की स्पष्ट जानकारी देना भी जरूरी होगा।
PNG सप्लाई बंद हुई तो क्या होगा? उपभोक्ताओं के मन में सवाल
PNG कनेक्शन को अनिवार्य करने की तैयारी के बीच सबसे बड़ा सवाल गैस की नियमित आपूर्ति को लेकर है। LPG सिलेंडर को बैकअप के तौर पर रखने का विकल्प खत्म होने पर उपभोक्ताओं को पाइपलाइन सप्लाई पर ही निर्भर रहना पड़ सकता है।
अगर पाइपलाइन में तकनीकी खराबी, मरम्मत या किसी अन्य कारण से गैस आपूर्ति रुकती है, तो परिवारों को परेशानी हो सकती है। इसलिए नई व्यवस्था लागू करने से पहले गैस कंपनियों और प्रशासन को शिकायत निवारण, आपातकालीन मरम्मत और वैकल्पिक सहायता की व्यवस्था स्पष्ट करनी होगी।
उपभोक्ताओं के लिए यह जानना भी जरूरी है कि LPG कनेक्शन सरेंडर करने की प्रक्रिया क्या होगी, कनेक्शन को दूसरे पते पर कैसे स्थानांतरित किया जा सकेगा और PNG आपूर्ति बाधित होने पर किससे संपर्क करना होगा।
क्या अब LPG सिलेंडर रखना पूरी तरह बंद हो जाएगा?
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, जिन घरों के निर्धारित दायरे में PNG पाइपलाइन उपलब्ध है और जहां गैस की सप्लाई शुरू हो चुकी है, वहां उसी पते पर LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा। हालांकि, पाइपलाइन से दूर रहने वाले या तकनीकी कारणों से कनेक्शन नहीं ले पाने वाले परिवारों को छूट मिलने की बात कही गई है।
इसलिए यह नियम प्रदेश के हर घर पर एक साथ लागू होने वाला बदलाव नहीं है। इसका दायरा पाइपलाइन की उपलब्धता, घर की दूरी, गैस आपूर्ति शुरू होने और नीति में तय छूट की शर्तों पर निर्भर करेगा।
LPG Connection: से रायपुर समेत प्रदेश के 20 से ज्यादा शहरों में घरेलू गैस इस्तेमाल करने का तरीका बदल सकता है। सरकार का लक्ष्य 10 लाख से अधिक घरों तक PNG नेटवर्क पहुंचाना है। लेकिन नियम लागू होने के साथ उपभोक्ताओं की सुरक्षा, नियमित सप्लाई, तकनीकी शिकायतों के समाधान और LPG कनेक्शन स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करना भी उतना ही जरूरी होगा।