Mahanadi Water Dispute को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से जारी विवाद के समाधान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में महानदी जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर बातचीत, तकनीकी सहयोग और आपसी सहमति के जरिए समाधान तलाशने पर जोर दिया गया।
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष तथा दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। हालांकि, विवाद का अंतिम समाधान अभी नहीं हुआ है, लेकिन दोनों राज्यों के बीच संवाद आगे बढ़ाने को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं।
अमित शाह की अध्यक्षता में क्या हुई चर्चा?

बैठक का मुख्य उद्देश्य Mahanadi Water Dispute के लंबे समय से लंबित मुद्दे को बातचीत और तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाना रहा। महानदी के पानी के इस्तेमाल, जल उपलब्धता और दोनों राज्यों की जरूरतों को लेकर लंबे समय से अलग-अलग पक्ष सामने आते रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा ने 2016 में महानदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र से न्यायाधिकरण गठित करने का अनुरोध किया था। बातचीत से समाधान नहीं निकलने के बाद मार्च 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया।
अब केंद्र की पहल के तहत दोनों राज्यों के बीच तकनीकी और संवाद आधारित समाधान की कोशिश आगे बढ़ाई जा रही है।
CWC के फैसले को लेकर दोनों राज्यों की सहमति
इस पूरे घटनाक्रम में केंद्रीय जल आयोग यानी Central Water Commission (CWC) की भूमिका महत्वपूर्ण है। आकाशवाणी के अनुसार, दोनों राज्यों ने CWC को लिखित आश्वासन दिया है कि आयोग द्वारा दोनों राज्यों के व्यापक हित में लिया गया फैसला स्वीकार्य होगा।
इससे संकेत मिलता है कि विवाद को केवल राजनीतिक स्तर पर नहीं, बल्कि जल उपलब्धता और तकनीकी आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
छत्तीसगढ़ की क्या है स्थिति?
छत्तीसगढ़ लंबे समय से यह कहता रहा है कि राज्य को महानदी के पानी का उपयोग सिंचाई, औद्योगिक और घरेलू जरूरतों के लिए करना आवश्यक है। दूसरी ओर, ओडिशा की ओर से महानदी के ऊपरी हिस्से में छत्तीसगढ़ में बनाए जा रहे जल ढांचों को लेकर आपत्ति जताई जाती रही है। ओडिशा का कहना है कि इससे गैर-मानसून अवधि में उसके हिस्से में पानी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
ऐसे में समाधान के लिए दोनों राज्यों की वर्तमान और भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।
वैज्ञानिक और तकनीकी आकलन पर जोर
Mahanadi Water Dispute के समाधान में तकनीकी आकलन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र सरकार की जुलाई 2026 की बैठक में भी संवाद, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के जरिए सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की बात सामने आई थी।
केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में गठित विस्तारित तकनीकी समिति की पहली बैठक भी 29 जुलाई 2026 को हुई थी। इस समिति में छत्तीसगढ़ और ओडिशा सरकारों के प्रतिनिधि शामिल हैं और इसका उद्देश्य शेष तकनीकी मुद्दों पर विचार करना है।
किसानों और पेयजल जरूरतों पर भी रहेगा फोकस

महानदी का पानी दोनों राज्यों के लिए कृषि, सिंचाई और पेयजल की जरूरतों से जुड़ा हुआ है। इसलिए विवाद के समाधान में केवल वर्तमान जल उपलब्धता ही नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली मांग को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।
इसके साथ ही पर्यावरणीय जरूरतों और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को लेकर भी तकनीकी स्तर पर आकलन महत्वपूर्ण रहेगा। दोनों राज्यों के बीच उपलब्ध आंकड़ों और जल जरूरतों को आधार बनाकर आगे की प्रक्रिया तय किए जाने की उम्मीद है।
2018 से लंबित है महानदी जल विवाद

Mahanadi Water Dispute को लेकर विवाद कई वर्षों पुराना है। ओडिशा की मांग के बाद केंद्र सरकार ने 12 मार्च 2018 को अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था। इसके बाद न्यायाधिकरण की प्रक्रिया चलती रही।
हाल के महीनों में दोनों राज्यों के बीच बातचीत को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं। 30 जुलाई 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में भी छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों के बीच बैठक हुई थी। उस बैठक में दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, केंद्रीय जल आयोग और जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था।
अब आगे क्या होगा?
अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद Mahanadi Water Dispute के समाधान के लिए बातचीत और तकनीकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर है। दोनों राज्यों के बीच सहमति का आधार जल उपलब्धता, तकनीकी आंकड़े, सिंचाई और पेयजल जरूरतों समेत व्यापक हितों को बनाया जा सकता है।
फिलहाल इसे विवाद का अंतिम समाधान नहीं कहा जा सकता। हालांकि, दोनों राज्यों द्वारा CWC के व्यापक हित में लिए जाने वाले निर्णय को स्वीकार करने की सहमति और केंद्र की मध्यस्थता में लगातार हो रही बैठकों से समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
महानदी को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच वर्षों से चले आ रहे मतभेदों के बीच अब बातचीत और तकनीकी आकलन के जरिए ऐसा रास्ता तलाशने की कोशिश हो रही है, जिसमें दोनों राज्यों की जल जरूरतों और हितों को ध्यान में रखा जा सके।