Rahul Gandhi BJP Attack: तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी और कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख किया।
यह विवाद चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश के बाद तेज हुआ है, जिसमें आयोग ने पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनावों के लिए दोनों प्रतिद्वंद्वी TMC गुटों को मूल ‘All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Flowers & Grass’ चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने से रोक दिया था। दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प देने को कहा गया था।
TMC Symbol Freeze पर राहुल गांधी का बयान

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए शिवसेना, NCP और TMC का उल्लेख किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर विपक्षी दलों को बांटने और उनके चुनाव चिन्ह छीनने का काम कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने इसे ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ से जोड़ते हुए चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल ममता बनर्जी का नहीं, बल्कि उन सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं का है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं।
सुधांशु त्रिवेदी ने किया पलटवार
राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता के राजनीतिक इतिहास और पार्टी की जानकारी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में पहले शिवसेना, फिर NCP और अब TMC का जिक्र करते हुए बीजेपी पर आरोप लगाया है। त्रिवेदी ने दावा किया कि TMC और NCP दोनों का गठन कांग्रेस से अलग हुए नेताओं ने किया था।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये सुधांशु त्रिवेदी द्वारा किए गए राजनीतिक दावे और आरोप हैं, न कि इस खबर का स्वतंत्र निष्कर्ष।
TMC और NCP का उदाहरण

सुधांशु त्रिवेदी ने ममता बनर्जी और शरद पवार का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने कांग्रेस से अलग होने के बाद क्रमशः तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया।
उन्होंने ममता बनर्जी के 1997 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाने और शरद पवार के 1999 में कांग्रेस से अलग होकर NCP बनाने का उल्लेख किया।
TMC के इतिहास के संदर्भ में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पार्टी की स्थापना कांग्रेस से अलग होने के बाद 1998 में हुई थी।
कांग्रेस सरकारों का भी किया जिक्र
सुधांशु त्रिवेदी ने अपने बयान में कांग्रेस के पुराने राजनीतिक फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर, एच.डी. देवगौड़ा और आई.के. गुजराल की सरकारों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर पूर्व में सरकारों को समर्थन देने और वापस लेने के जरिए राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के आरोप लगाए।
उन्होंने 1980 के बाद कांग्रेस के सत्ता में आने और विभिन्न राज्यों की सरकारों को बर्खास्त किए जाने का भी उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने एस.आर. बोम्मई मामले और 1994 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संदर्भ देते हुए कहा कि किसी सरकार के बहुमत का परीक्षण सदन के पटल पर होना चाहिए।
‘राहुल गांधी को कांग्रेस का इतिहास देखना चाहिए’

बीजेपी नेता ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास में कई ऐसे उदाहरण हैं, जिन पर कांग्रेस नेता को ध्यान देना चाहिए।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व से जुड़े पुराने विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने अशोक गहलोत से जुड़े कांग्रेस अध्यक्ष पद के घटनाक्रम का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर क्या परिस्थितियां बनी थीं।
इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी के बयान को कांग्रेस के अपने राजनीतिक इतिहास से जोड़कर निशाना साधा।
TMC विवाद में आगे क्या हुआ?
इस बीच TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग की कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है। 18 सितंबर को आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ममता बनर्जी गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह, जबकि दूसरे गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और लिफाफा चिन्ह दिया गया है।
यह व्यवस्था आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू होगी। मूल TMC नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला आयोग द्वारा पार्टी के भीतर चल रहे विवाद पर आगे की सुनवाई और निर्धारण के बाद किया जाना है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Rahul Gandhi BJP Attack से जुड़ी राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक ओर राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाए हैं, वहीं बीजेपी की ओर से सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के इतिहास और TMC-NCP के गठन का हवाला देते हुए उनके आरोपों का जवाब दिया है। दोनों पक्षों के दावों को उनके संबंधित राजनीतिक बयानों के रूप में देखा जाना चाहिए।